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जाति गणना पर सरकार की मंशा संदिग्ध, ओबीसी का जिक्र गायब

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जनगणना को लेकर मोदी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं

जाति गणना पर सरकार की मंशा संदिग्ध, ओबीसी का जिक्र गायब
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प्रश्न 12 में ओबीसी नहीं: जयराम रमेश ने उठाए गंभीर सवाल

  • कांग्रेस बोली– निष्पक्ष जाति गणना पर संदेह, सरकार से तुरंत संवाद की मांग
  • जनगणना 2027 पर विवाद: अधिसूचना में ओबीसी और सामान्य वर्ग का उल्लेख नहीं

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जनगणना को लेकर मोदी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 22 जनवरी को जारी अधिसूचना में हाउस-लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना के लिए 33 सवालों की सूची अधिसूचित की है। यह जनगणना का पहला चरण है, जो अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच चलेगा। इसमें मकानों की सामग्री, उपयोग, स्वामित्व, पीने के पानी, शौचालय, रोशनी, ईंधन, इंटरनेट, मोबाइल, वाहन और मुख्य अनाज जैसी जानकारी जुटाई जाएगी।

जनगणना 2027 दो चरणों में होगी। पहला चरण हाउस-लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना का है, जबकि दूसरा चरण यानी जनसंख्या गणना हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के बर्फीले इलाकों में सितंबर 2026 में और बाकी देश में फरवरी 2027 में होगी। जयराम रमेश ने याद दिलाया कि 30 अप्रैल 2025 को मोदी सरकार ने अचानक यू-टर्न लिया और जातिगणना को जनगणना 2027 में शामिल करने की घोषणा की। बाद में 12 दिसंबर 2025 को स्पष्ट किया गया कि यह दूसरे चरण में होगी। इससे पहले सरकार लगातार जाति जनगणना का विरोध करती रही थी। उदाहरण के तौर पर 20 जुलाई 2021 को लोकसभा में और 21 सितंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में इसे खारिज किया गया था। यहां तक कि 28 अप्रैल 2024 को प्रधानमंत्री ने एक टीवी इंटरव्यू में जाति जनगणना की मांग करने वालों पर 'अर्बन नक्सल मानसिकता' का आरोप लगाया था। जयराम रमेश का कहना है कि आखिरकार व्यापक मांग के आगे केंद्र सरकार को झुकना पड़ा, जिसे कांग्रेस ने लगातार उठाया था।

अब जारी अधिसूचना में सवाल नंबर 12 में पूछा गया है कि परिवार का मुखिया अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या 'अन्य' श्रेणी से है या नहीं, लेकिन ओबीसी और सामान्य श्रेणी का स्पष्ट जिक्र नहीं है। जयराम रमेश ने इसे सरकार की असली मंशा पर सवाल उठाया। उनका आरोप है कि जब जाति गणना को शामिल करने का फैसला हो चुका है तो प्रश्न ऐसे क्यों तैयार किए गए हैं जो व्यापक और निष्पक्ष जाति गणना की प्रतिबद्धता पर संदेह पैदा करते हैं?

कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि जाति गणना के विवरण को अंतिम रूप देने से पहले सभी राजनीतिक दलों, राज्य सरकारों और नागरिक संगठनों से तुरंत बातचीत शुरू की जाए। जयराम रमेश ने तेलंगाना सरकार के 2025 के स्पीच सर्वे का उदाहरण दिया, जिसमें जाति-वार शिक्षा, रोजगार, आय और राजनीतिक भागीदारी की विस्तृत जानकारी जुटाई गई थी। उनका कहना है कि यह तरीका आर्थिक और सामाजिक न्याय के लिए सबसे व्यापक और सही है।

यह अधिसूचना रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के कार्यालय द्वारा जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 8 के तहत जारी की गई है। इससे पहले 2020 की अधिसूचना को रद्द किया गया है। कांग्रेस का मानना है कि जाति गणना को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता संदिग्ध है और सभी हितधारकों से सलाह लेना जरूरी है, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और न्यायपूर्ण हो।


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