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सरकार ने हेल्थकेयर इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए 1,500 करोड़ के बायोमेडिकल रिसर्च प्रोग्राम का किया शुभारंभ

केंद्र सरकार ने बुधवार को देश में स्वास्थ्य अनुसंधान और हेल्थकेयर इनोवेशन को नई गति देने के लिए बायोमेडिकल रिसर्च करियर प्रोग्राम के तीसरे चरण (फेज-III) का शुभारंभ किया है

सरकार ने हेल्थकेयर इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए 1,500 करोड़ के बायोमेडिकल रिसर्च प्रोग्राम का किया शुभारंभ
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बुधवार को देश में स्वास्थ्य अनुसंधान और हेल्थकेयर इनोवेशन को नई गति देने के लिए बायोमेडिकल रिसर्च करियर प्रोग्राम के तीसरे चरण (फेज-III) का शुभारंभ किया है। इस कार्यक्रम के लिए 1,500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिसका उद्देश्य फेलोशिप, रिसर्च ग्रांट और वैज्ञानिक खोजों को व्यावहारिक स्वास्थ्य सेवाओं में बदलने को बढ़ावा देना है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इस कार्यक्रम के लिए 1,000 करोड़ रुपए जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) की ओर से और 500 करोड़ रुपए लंदन स्थित वेलकम ट्रस्ट की ओर से दिए जाएंगे। यह साझेदारी भारत में बायोमेडिकल रिसर्च को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में विश्वस्तरीय बायोमेडिकल रिसर्च इकोसिस्टम तैयार करना है। इसके तहत बेसिक साइंटिस्ट, क्लिनिकल रिसर्चर, पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट, साइंस कम्युनिकेटर और रिसर्च मैनेजर जैसे विशेषज्ञों को तैयार किया जाएगा। साथ ही अंतर-विषयक और सहयोगात्मक अनुसंधान को भी बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि यह पहल भारत में बायोमेडिकल विज्ञान के क्षेत्र में नई अंतरराष्ट्रीय और परोपकारी साझेदारियों को आकर्षित करेगी, जिससे अनुसंधान पर होने वाले निवेश का दायरा और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आने वाले वर्षों में बायोटेक्नोलॉजी भारत की आर्थिक वृद्धि, वैज्ञानिक प्रगति और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का प्रमुख आधार बनने जा रही है। उन्होंने बताया कि भारत की बायोइकोनॉमी 2014 में 10 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में 195 अरब डॉलर से अधिक हो चुकी है और 2030 तक इसके 300 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

उन्होंने यह भी बताया कि देश में इस समय लगभग 12,000 बायोटेक स्टार्टअप सक्रिय हैं। भारत दुनिया के प्रमुख वैक्सीन निर्माताओं में शामिल है और तेजी से वैश्विक बायोटेक हब के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

कार्यक्रम के दौरान फेज-III की औपचारिक शुरुआत के साथ उन वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से भी संवाद किया गया, जिनके करियर को इस पहल से नई दिशा मिली है। साथ ही कार्यक्रम की वैज्ञानिक उपलब्धियों और इसके दीर्घकालिक प्रभावों पर भी प्रस्तुतियां दी गईं।

डॉ. सिंह ने कहा कि यह कार्यक्रम इस बात का उदाहरण है कि दीर्घकालिक साझेदारियां वैज्ञानिक अनुसंधान को गति देने, विश्वस्तरीय मानव संसाधन तैयार करने और राष्ट्रीय व वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान विकसित करने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

उन्होंने उद्योग और परोपकारी संस्थाओं से भी इस क्षेत्र में अधिक निवेश करने का आह्वान करते हुए कहा कि भारत के पास प्रतिभा और नवाचार की कोई कमी नहीं है, लेकिन शोध को तकनीक, डायग्नोस्टिक और किफायती स्वास्थ्य सेवाओं में बदलने के लिए सतत वित्तीय सहयोग बेहद आवश्यक है।


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