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एफसीआर का बिल लाकर लोगों का ध्यान वास्तविक मुद्दों से भटकाना चाहती है सरकार : बीजद सांसद सुलता देव

बीजद सांसद सुलता देव ने विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 पर केंद्र सरकार की आलोचना की है

एफसीआर का बिल लाकर लोगों का ध्यान वास्तविक मुद्दों से भटकाना चाहती है सरकार : बीजद सांसद सुलता देव
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नई दिल्ली। बीजद सांसद सुलता देव ने गुरुवार को विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 पर केंद्र सरकार की आलोचना की है।

उन्होंने कहा कि जिन एनजीओ को विदेशी अनुदान मिलता है, वे पहले से ही एफसीआरए का हिसाब-किताब रखते हैं और गृह मंत्रालय के अंतर्गत आते हैं।

सुलता देव ने पूछा, "एफसीआर का बिल क्यों लाया जा रहा है? अगर किसी एनजीओ द्वारा फंड का गलत उपयोग हो रहा है तो इसके खिलाफ पहले से ही कार्रवाई हो सकती है और उन्हें ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को उन कामों पर ध्यान देना चाहिए जिनसे लोगों का भला हो, न कि नए-नए बिल लाकर लोगों को व्यस्त रखने पर।

सांसद ने सरकार पर आरोप लगाया कि चुनाव वाले राज्यों में गैस और तेल की कीमतें बढ़ा दी जाएंगी। उन्होंने कहा, "सरकार ने एक साल में दो करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था। 14 साल बीत गए, 28 करोड़ नौकरियां कहां हैं? सरकार बस इधर-उधर के बिल लाकर जनता का ध्यान भटकाना चाहती है।"

एफसीआरए कानून की मौजूदा व्यवस्था पर सुलता देव ने कहा कि पहले से ही काफी कड़े प्रावधान हैं। अगर उनका सही तरीके से पालन किया जाए तो एक भी पैसा गलत जगह नहीं खर्च हो सकता। उन्होंने दावा किया कि नया संशोधन विधेयक एनजीओ क्षेत्र पर अनावश्यक नियंत्रण बढ़ाने का प्रयास है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर भी सुलता देव ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "आजकल लोग चुनाव आयोग पर सवाल क्यों खड़े कर रहे हैं? कुछ दिन पहले एक पत्र वायरल हुआ जिसमें भाजपा की स्टैंप लगी हुई थी। ऐसा कैसे संभव है?" उन्होंने चेतावनी दी कि अगर चुनाव आयोग ठीक से काम नहीं करेगा तो जनता उस पर विश्वास नहीं करेगी। सुलता देव ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता बनाए रखना बेहद जरूरी है, वरना लोकतंत्र की नींव कमजोर हो जाएगी।

बीजद सांसद ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह एफसीआरए संशोधन के जरिए एनजीओ पर और सख्त नियंत्रण स्थापित करना चाहती है, जबकि मौजूदा कानून पर्याप्त हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को वास्तविक मुद्दों जैसे बेरोजगारी, महंगाई और विकास पर ध्यान देना चाहिए बजाय एनजीओ को निशाना बनाने के।


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