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गायत्री मंत्र और अखंड ज्योति ने शिवराज को दी जीवन की नई दिशा

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि गायत्री मंत्र और अखंड ज्योति ने मेरे जीवन को नयी दिशा दी है

गायत्री मंत्र और अखंड ज्योति ने शिवराज को दी जीवन की नई दिशा
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हरिद्वार में शिवराज सिंह चौहान बोले साधक और सेवक बनकर आया हूं

  • मातृ-समर्पण यात्रा में शिवराज का अनुभव गायत्री परिवार ने जीवन को आलोकित किया
  • योग और मंत्रजप से मिली शक्ति शिवराज ने साझा किया आध्यात्मिक सफर
  • गुरुदेव और माताजी की कृपा से जीवन सार्थक दिशा में आगे बढ़ा शिवराज

हरिद्वार/नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को कहा है कि गायत्री मंत्र और अखंड ज्योति ने मेरे जीवन को नयी दिशा दी है।

श्री चौहान आज को उत्तराखंड के हरिद्वार में अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा आयोजित माता भगवती देवी शर्मा की जन्म शताब्दी एवं अखंड दीप शताब्दी वर्ष पर आयोजित मातृ-समर्पण यात्रा और समापन समारोह में शामिल हुए।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मैं यहाँ किसी पद या प्रतिष्ठा के भाव से नहीं, बल्कि एक शिष्य, एक साधक और एक सेवक बनकर आया हूं। उन्होंने कहा कि पूज्य गुरुदेव जी और वंदनीय माताजी की कृपा से ही मेरा जीवन सार्थक दिशा में आगे बढ़ सका है।

केंद्रीय मंत्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मेरा जन्म एक छोटे से गाँव में हुआ, जहाँ साधन सीमित थे, लेकिन अखंड ज्योति पत्रिका ने मेरे जीवन में प्रकाश का संचार किया। उस पत्रिका का हर एक शब्द मंत्र के समान था और गायत्री मंत्र के जप ने मेरे जीवन की दिशा ही बदल दी।

उन्होंने कहा कि गुरुदेव के होशंगाबाद आगमन का समाचार मिला, तो मैं उसी शाम भोपाल से वहाँ पहुँच गया और जब गुरुदेव ने माथे पर तिलक लगाया, तो वह अनुभव आज भी मेरी चेतना में जीवित है। ये कृपा किसी पद या वैभव के लिए नहीं, बल्कि मानव जीवन को श्रेष्ठ बनाने के लिए थी।

श्री चौहान ने कहा कि गायत्री परिवार कोई सामान्य संस्था नहीं, बल्कि संस्कारों का सागर और अध्यात्म की अखंड ज्योति है, जो सम्पूर्ण विश्व को आलोकित कर रही है। उन्होंने कहा कि मैं प्रतिदिन योग और गायत्री मंत्र के जप के बाद "ॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मामृतं गमय" का उच्चारण करता हूं। उन्होंने कहा कि इस मंत्र के साथ मुझे भीतर और बाहर दोनों ओर प्रकाश का अनुभव होता है, जो जीवन पथ को स्पष्ट करता है।

श्री चौहान ने कहा कि यदि गुरुदेव साधना थे, तो माताजी साधना की सिद्धि थीं। करुणा, ममता और वात्सल्य की जीवंत प्रतिमूर्ति माताजी ने साधकों को भक्ति के साथ-साथ सेवा और कर्तव्य का मार्ग भी दिखाया। उन्होंने माताजी की तुलना मीरा, शबरी, यशोदा, सीता और माँ पार्वती से करते हुए कहा कि उनके जीवन और शिक्षाओं ने असंख्य लोगों को दिशा दी। उन्होंने कहा कि आज विश्व के अनेक हिस्सों में अशांति, संघर्ष और भय का वातावरण है।

उन्होंने कहा कि सौ साल पहले स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था कि सुदीर्घ रजनी समाप्त हुई जान पड़ती है, महान निशा का अंत निकट है। जो अंधे हैं वे नहीं देख सकते, जो बहरे हैं वे नहीं सुन सकते, लेकिन मैं स्पष्ट रूप से देख रहा हूँ कि भारत माता एक बार फिर अंगड़ाई लेकर खड़ी हो रही है और विश्व गुरु के पद पर अधिष्ठित हो रही है। यह परिवर्तन केवल कल्पना नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई दे रहा है।

श्री चौहान ने कहा कि बदलाव कौन करेगा.. हम करेंगे। गुरुदेव के आशीर्वाद से यह होना है। चाहे आंधी आए, चाहे तूफान आए, कितने भी व्यवधान आएं, हमें आगे बढ़ते रहना है। भारत ने आत्मवत् सर्वभूतेषु का भाव दिया, जिसमें सभी प्राणियों में एक ही चेतना का दर्शन होता है। उन्होंने कहा कि वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना उदार हृदय वाले लोगों की है, जो पूरी दुनिया को एक परिवार मानते हैं। भारत की धरती आज भी उद्घोष कर रही है, धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो और विश्व का कल्याण हो।

उन्होंने कहा कि भारत विश्व कल्याण की कामना करने वाला देश है और पूज्य गुरुदेव, वंदनीय माताजी और माँ गायत्री की कृपा से इस लक्ष्य को पूरा करना हम सबका दायित्व है। हम स्वयं को इस महान कार्य के योग्य बनाकर यहां से लौटें।


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