चुनाव आयोग ने टीएमसी का नाम और प्रतीक फ्रीज किया
निर्वाचन आयोग ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के आंतरिक विवाद पर व्यवस्था देते हुए उसके दोनों गुटों के पार्टी के मूल नाम और आधिकारिक चुनाव चिह्न 'फूल और घास' के इस्तेमाल पर गुरुवार को तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी

ममता बनर्जी और अरूप रॉय गुट पर लगी रोक
- ‘फूल-घास’ चुनाव चिन्ह अब किसी गुट को नहीं मिलेगा
- दोनों गुटों से मांगे गए नए नाम और प्रतीक
- उपचुनावों में अलग नाम और प्रतीक से उतरेंगे उम्मीदवार
नई दिल्ली। निर्वाचन आयोग ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के आंतरिक विवाद पर व्यवस्था देते हुए उसके दोनों गुटों के पार्टी के मूल नाम और आधिकारिक चुनाव चिह्न 'फूल और घास' के इस्तेमाल पर गुरुवार को तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी।
आयोग ने पार्टी के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों अरूप रॉय के नेतृत्व वाले याचिकाकर्ता समूह और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले समूह को समान अवसर देने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए 'प्रतीक आदेश के पैरा 15' के तहत यह अंतरिम आदेश जारी किया। यह व्यवस्था विवाद के अंतिम निस्तारण तक लागू रहेगी।
आदेश के अनुसार, पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों के उपचुनावों में दोनों में से किसी भी गुट को केवल 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम अथवा उसके आरक्षित प्रतीक 'फूल और घास' का उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी। दोनों धड़ों को अपने-अपने समूहों के लिए अलग नाम रखने होंगे, हालांकि वे चाहें तो अपने नए नाम में मूल पार्टी 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' का संदर्भ जोड़ सकते हैं। इसके अलावा आयोग की चुनाव चिह्नों की सूची में से दोनों गुटों को अलग-अलग प्रतीक आवंटित किए जाएंगे।
निर्वाचन आयोग ने दोनों पक्षों को सख्त निर्देश जारी करते हुए 18 सितंबर (शुक्रवार) की सुबह 11:00 बजे तक अपनी प्राथमिकताओं की सूची सौंपने को कहा है।
आयोग के अनुसार, दोनों गुटों को वरीयता क्रम में तीन नए नामों के विकल्प देने होंगे। साथ ही, आगामी उपचुनावों में उतरने वाले प्रत्याशियों के लिए चुनाव चिह्नों की सूची में से अपनी पसंद के तीन-तीन प्रतीकों के विकल्प आयोग को बताने होंगे, जिनमें से किसी एक को चुनाव आयोग की मंजूरी मिलेगी।
आयोग के इस फैसले के बाद अब दोनों गुट नए नाम और नए प्रतीक के साथ चुनावी मैदान में उतरेंगे। आयोग के अनुसार यह व्यवस्था अस्थायी है और विवाद का हल होने तक जारी रहेगी।
गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले और अरूप रॉय/ऋतव्रत बनर्जी धड़े के बीच चुनाव चिह्न को लेकर पिछले कई महीनों से विवाद चल रहा है। चुनाव आयोग ने कई मौकों पर दोनों पक्षों से दस्तावेज मांगे और उनके प्रतिनिधियों की प्रस्तुतियां सुनीं। गुरुवार को दिल्ली में दोनों गुटों को अलग-अलग बैठकों के लिए आयोग के समक्ष बुलाया गया था।


