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पूरे देश में कांग्रेस ने 'मनरेगा बचाओ संग्राम' की शुरुआत की

कांग्रेस ने शनिवार को देश भर में 'मनरेगा बचाओ संग्राम' की शुरुआत की। इस अभियान के तहत सभी जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालयों में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गईं

पूरे देश में कांग्रेस ने मनरेगा बचाओ संग्राम की शुरुआत की
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मनरेगा बचाओ संग्राम कांग्रेस का देशव्यापी बिगुल

  • काम का अधिकार खतरे में कांग्रेस का आंदोलन तेज
  • गांव गांव से उठी आवाज मनरेगा खत्म नहीं होगा
  • 45 दिन का संघर्ष मनरेगा बचाने का संकल्प

नई दिल्ली। कांग्रेस ने शनिवार को देश भर में 'मनरेगा बचाओ संग्राम' की शुरुआत की। इस अभियान के तहत सभी जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालयों में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गईं। पार्टी ने कहा कि वह लोगों के संवैधानिक अधिकार ‘काम के अधिकार’ की रक्षा के लिए तब तक संघर्ष करती रहेगी, जब तक यह अधिकार पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाता।

कांग्रेस सांसद और पार्टी के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए कहा, “आज भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस देश भर के सभी जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालयों में प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए मनरेगा बचाओ संग्राम की शुरुआत कर रही है।”

विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन एक्ट पर कांग्रेस का विरोध

उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस इस आंदोलन को तब तक जारी रखेगी जब तक काम के अधिकार, आजीविका और जवाबदेही को पूरी तरह बहाल नहीं कर दिया जाता। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने मनरेगा को कमजोर करके लोगों से ये अधिकार छीन लिए हैं।

इससे पहले 3 जनवरी को, कांग्रेस ने विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की योजना की जानकारी दी। कांग्रेस का आरोप है कि यह एक्ट महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम को "चुपचाप खत्म" कर रहा है और ग्रामीण नागरिकों के गारंटीड काम के कानूनी अधिकार को कमजोर कर रहा है।

यह घोषणा नई दिल्ली में कांग्रेस कार्यालय में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पार्टी के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल और वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने की।

विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन एक्ट पर कांग्रेस का विरोध

वेणुगोपाल ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस ने देशव्यापी अभियान के माध्यम से मनरेगा की रक्षा के लिए एक विस्तृत योजना तैयार की है।

उन्होंने कहा, "विकसित भारत-जी राम जी भारत सरकार द्वारा बनाया गया एक कानून है। इस कानून के खिलाफ आगे की कार्रवाई पर गंभीर चर्चा हुई और कांग्रेस राष्ट्रीय समिति ने मनरेगा को बचाने के लिए पूरे देश में एक मजबूत अभियान शुरू करने का फैसला किया।"

वेणुगोपाल ने नए कानून को हानिकारक बताते हुए कहा, "यह कानून मनरेगा को खत्म करना चाहता है। मनरेगा की वजह से भूख कम हुई, पलायन कम हुआ, और सड़कें, नहरें और बांध बनाए गए। कोविड-19 काल और आर्थिक संकट के दौरान, मनरेगा देश के लोगों के लिए एक सुरक्षा कवच बन गया।"

कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि विकसित भारत-जी राम जी एक्ट के तहत रोजगार अब गारंटी वाला अधिकार नहीं रहा।

मनरेगा बनाम विकसित भारत योजना की तुलना

वेणुगोपाल ने कहा, "विकसित भारत-जी राम जी योजना के तहत रोजगार अब अधिकार नहीं रहा। काम सिर्फ पंचायतों के जरिए दिया जाएगा, सरकार द्वारा नहीं। मनरेगा मांग-आधारित था, जबकि विकसित भारत-जी राम जी योजना में बजट की सीमाएं हैं। यह चुपचाप काम के कानूनी अधिकार को खत्म कर देता है।"

जयराम रमेश की चेतावनी

सांसद जयराम रमेश ने चेतावनी दी कि मनरेगा के विकेन्द्रीकृत स्वरूप को खत्म किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "मनरेगा एक विकेन्द्रीकृत योजना थी। अब सब कुछ दिल्ली में तय होगा और गांवों को नुकसान होगा। कई पंचायतों को जीरो फंड मिलेगा।"

रमेश ने आरोप लगाया कि यह कानून संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा, "संविधान का अनुच्छेद 258 कहता है कि यह फॉर्मूला राज्य और केंद्र सरकारों के बीच सलाह-मशविरे के बाद तय किया जाना चाहिए, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने इसे खुद ही तय कर लिया। यह संविधान का उल्लंघन है।"

किसान आंदोलन से तुलना और व्यापक स्तर पर अभियान

उन्होंने किसानों के आंदोलन से तुलना करते हुए कहा, "तीन कृषि कानूनों का विरोध दिल्ली-केंद्रित था, लेकिन मनरेगा बचाओ अभियान दिल्ली-केंद्रित नहीं होगा। यह राज्य, जिला, ब्लॉक और पंचायत स्तर पर चलेगा।"

उन्होंने मनरेगा की शुरुआत को याद करते हुए कहा कि इसे 2005 में व्यापक राजनीतिक सहमति और कमेटी की जांच के बाद पास किया गया था।

‘विनाश भारत’ कहकर नए कानून का विरोध

जयराम रमेश ने कहा, "इस नए कानून में यह विकसित भारत नहीं, बल्कि विनाश भारत है। हम मांग करते हैं कि मनरेगा को वापस लाया जाए और ग्रामीण भारत को बचाया जाए।"

उन्होंने रोडमैप की घोषणा करते हुए कहा कि यह अभियान 45 दिनों तक चलेगा।

उन्होंने आगे कहा, "यह एक राष्ट्रीय आंदोलन होगा। अगर जरूरत पड़ी तो हम कोर्ट भी जाएंगे। नतीजा वही होगा जो तीन काले कृषि कानूनों के मामले में हुआ था।"


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