हल्दीघाटी का युद्ध देशभक्ति का एक जीता-जागता प्रतीक है : लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि मेवाड़ की पवित्र धरती ने पूरी दुनिया को साहस, वीरता और स्वाभिमान का संदेश दिया है।

नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को कहा कि मेवाड़ की पवित्र धरती ने पूरी दुनिया को साहस, वीरता और स्वाभिमान का संदेश दिया है।
उदयपुर में महाराणा प्रताप की स्मृति में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए बिरला ने कहा कि इस महान योद्धा का जीवन देशभक्ति, त्याग और आजादी की लड़ाई का एक अनोखा उदाहरण है, जो आज की और आने वाली पीढ़ियों को हमेशा रास्ता दिखाता रहेगा।
उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप ने जानबूझकर राज-पाट के ऐशो-आराम को छोड़ दिया। उन्होंने अपना पूरा जीवन अपनी जनता की सेवा, मेवाड़ की आजादी और लोगों के सम्मान की रक्षा में लगा दिया।
उन्होंने आगे कहा कि इतिहास में मेवाड़ का संघर्ष अनोखा है। बहुत कम साधन होने के बाद भी महाराणा प्रताप ने स्थानीय भील समुदाय और आम लोगों के साथ मिलकर देश की पहचान और सम्मान को बचाने के लिए बड़े हौसले और भरोसे के साथ लड़ाई लड़ी।
इस क्षेत्र के इतिहास की बात करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि महाराणा प्रताप, महारानी पद्मिनी, महाराणा कुंभा और राणा पुंजा जैसी महान हस्तियां देश सेवा के लिए हमेशा प्रेरणा देती रहेंगी। उन्होंने कहा कि हल्दीघाटी का ऐतिहासिक युद्ध सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देशभक्ति और अन्याय के खिलाफ लड़ाई का एक जीता-जागता प्रतीक बन चुका है।
इतिहास की इस सीख को आज के लक्ष्यों से जोड़ते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने युवाओं से अपील की कि वे 'विकसित भारत' बनाने के लिए इसी मेहनत और समर्पण के साथ काम करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि जैसे-जैसे भारत आगे बढ़ रहा है, देश के लिए समर्पण, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना सबसे ज्यादा जरूरी है।
उन्होंने कहा कि एक सच्चा विकसित भारत वह होगा, जहां संस्कृति की पुरानी पहचान भी होगी और आज के जमाने की नई तकनीक भी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि मेवाड़ का यह प्रेरक इतिहास आने वाली पीढ़ियों को देश की सेवा और स्वाभिमान के रास्ते पर चलने के लिए हमेशा प्रेरित करता रहेगा।


