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मेरठ में अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 16,726 संपत्तियां सील करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश की गई स्थिति रिपोर्ट के मुताबिक मेरठ शहर और उसके आसपास के इलाकों को सर्वे के लिए चार जोन में बांटा गया है। इनमें जोन ए, बी, सी और डी शामिल हैं।

मेरठ में अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 16,726 संपत्तियां सील करने का आदेश
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नई दिल्ली: मेरठ में अवैध निर्माण और आवासीय संपत्तियों के कथित व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित अधिकारियों को मेरठ के जोन ए में चिन्हित 16,726 अवैध या अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। अदालत ने पहले चरण में इन परिसरों को खाली कराने और सील करने का आदेश दिया है। इसके बाद अनधिकृत निर्माणों को हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा गया है।

एक जोन में मिले 16 हजार से ज्यादा अवैध निर्माण

सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश की गई स्थिति रिपोर्ट के मुताबिक मेरठ शहर और उसके आसपास के इलाकों को सर्वे के लिए चार जोन में बांटा गया है। इनमें जोन ए, बी, सी और डी शामिल हैं। अदालत ने कहा कि जोन ए में निरीक्षण और सर्वे के लिए गठित 16 टीमों ने कुल 16,726 निर्माणों की पहचान पूरी तरह अवैध या अनधिकृत के रूप में की है। इनमें 12,907 आवासीय, 874 आवासीय एवं गैर-आवासीय दोनों श्रेणी के और 2,945 गैर-आवासीय निर्माण बताए गए हैं।

संपत्तियां खाली कराने और सील करने का निर्देश

पुराने आदेशों के अनुपालन को लेकर दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने अधिकारियों को जोन ए में चिन्हित सभी 16,726 संपत्तियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई करने को कहा। अदालत के निर्देश के मुताबिक कार्रवाई का पहला चरण संबंधित परिसरों को खाली कराना और उसके बाद उन्हें सील करना होगा। पीठ ने यह भी चिंता जताई कि इनमें से कुछ निर्माण जर्जर स्थिति में हो सकते हैं। अदालत ने कहा कि यदि ऐसे भवनों के गिरने से लोगों की जान जाती है तो ऐसी स्थिति को किसी भी कीमत पर टाला जाना चाहिए।

चारों जोन की मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभी उपलब्ध स्थिति रिपोर्ट में जोन बी, जोन सी और जोन डी में मौजूद अनधिकृत निर्माणों की पूरी जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए अदालत ने संबंधित अधिकारियों से अगली सुनवाई में तीनों जोन की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि जोन ए में अवैध निर्माण पहले ही चिन्हित किए जा चुके हैं, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई में देरी नहीं की जानी चाहिए। अदालत ने चारों जोन में आवश्यक कार्रवाई आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है।

44 संपत्तियों पर पहले हो चुकी कार्रवाई

उल्देपुर से संबंधित रिपोर्ट में अदालत के सामने बताया गया कि 44 संपत्तियों को सील किया गया था और उनके मालिकों को नोटिस जारी किए गए थे। इनमें से 20 संपत्तियों को अब तक गिराए जाने की जानकारी अदालत को दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, इन संपत्तियों में से 38 के भवन नक्शे स्वीकृत थे, लेकिन बाद में कथित तौर पर अतिरिक्त और अनधिकृत निर्माण कर दिए गए। इनमें कुछ परिसरों का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भी किया जा रहा था।वहीं, छह संपत्तियां प्लॉट के तौर पर बेची गई थीं और उनमें बिना स्वीकृत योजना या नक्शे के आवासीय तथा व्यावसायिक निर्माण किए जाने की बात सामने आई।

बची 24 संपत्तियां भी गिराने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि 44 सील की गई संपत्तियों में से बची हुई 24 संपत्तियों को भी जल्द से जल्द गिराने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अदालत ने अनधिकृत व्यावसायिक इस्तेमाल को रोकने पर भी जोर दिया। पीठ ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि अवैध और जर्जर निर्माणों के कारण कोई अप्रिय घटना होती है और लोगों की जान जाती है, तो संबंधित सरकारी अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

पांच साल की निष्क्रियता की होगी जांच

अवैध कॉलोनियों के विकास के कारणों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग गठित किया है। आयोग यह जांच करेगा कि मेरठ विकास प्राधिकरण कथित तौर पर पांच साल से अधिक समय तक निष्क्रिय क्यों रहा और इसी अवधि में उल्देपुर तथा आसपास के इलाकों में अनधिकृत आवासीय कॉलोनियां कैसे विकसित होती रहीं। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को विध्वंस और अन्य कार्रवाई जारी रखने तथा अगली सुनवाई में प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।


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