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संजय कपूर संपत्ति विवाद में सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप, पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ करेंगे सुलह की कोशिश

सुनवाई के दौरान परिवार से जुड़े सभी प्रमुख पक्षों ने अदालत के सामने मध्यस्थता प्रक्रिया के लिए सहमति जताई। कोर्ट ने इसे सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि परिवारिक और विरासत से जुड़े मामलों में आपसी बातचीत से समाधान निकालना सबसे उचित तरीका माना जाता है।

संजय कपूर संपत्ति विवाद में सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप, पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ करेंगे सुलह की कोशिश
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नई दिल्‍ली: दिवंगत उद्योगपति और सोना ग्रुप के पूर्व मालिक संजय कपूर की मौत के बाद शुरू हुआ परिवार की संपत्ति और फैमिली ट्रस्ट से जुड़ा विवाद अब अहम मोड़ पर पहुंच गया है। लंबे समय से अदालतों में चल रही इस कानूनी लड़ाई को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ को मध्यस्थ नियुक्त किया है। अदालत का मानना है कि यदि मामला केवल कानूनी प्रक्रिया के सहारे आगे बढ़ता रहा, तो इसके समाधान में कई साल नहीं बल्कि दशक भी लग सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि परिवार के भीतर का यह विवाद बातचीत और समझौते के जरिए हल होना ज्यादा बेहतर होगा। इसी वजह से अदालत ने मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला लिया।

सभी पक्षों ने मध्यस्थता पर जताई सहमति

सुनवाई के दौरान परिवार से जुड़े सभी प्रमुख पक्षों ने अदालत के सामने मध्यस्थता प्रक्रिया के लिए सहमति जताई। कोर्ट ने इसे सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि परिवारिक और विरासत से जुड़े मामलों में आपसी बातचीत से समाधान निकालना सबसे उचित तरीका माना जाता है।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि अब इस मामले से जुड़ा कोई भी पक्ष मीडिया में बयानबाजी नहीं करेगा। साथ ही सोशल मीडिया पर भी विवाद से जुड़ी कोई टिप्पणी या पोस्ट साझा नहीं की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई अगस्त महीने में तय की है, जहां मध्यस्थता की प्रगति पर रिपोर्ट पेश की जाएगी।

संपत्ति और फैमिली ट्रस्ट को लेकर शुरू हुआ विवाद

यह पूरा मामला संजय कपूर की मौत के बाद परिवार की संपत्ति, विरासत और फैमिली ट्रस्ट को लेकर शुरू हुआ। संजय कपूर की मां रानी कपूर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर फैमिली ट्रस्ट को रद्द करने की मांग की थी। रानी कपूर का आरोप है कि ट्रस्ट उनकी जानकारी और सहमति के बिना बनाया गया। उनका कहना है कि परिवार की संपत्तियों को एक सुनियोजित तरीके से ट्रस्ट में ट्रांसफर किया गया, ताकि विरासत और संपत्ति पर नियंत्रण हासिल किया जा सके। उन्होंने अदालत से यह भी मांग की कि अंतिम फैसला आने तक परिवार की संपत्तियों के ट्रांसफर, बिक्री या किसी भी तरह के लेन-देन पर रोक लगाई जाए और यथास्थिति बनाए रखी जाए।

रानी कपूर ने लगाए गंभीर आरोप

रानी कपूर ने अदालत में दायर याचिका में कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जब वह स्वास्थ्य समस्याओं से गुजर रही थीं, उसी दौरान उनसे कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए। उन्होंने दावा किया कि कुछ कागजात खाली थे और उन्हें पूरी जानकारी दिए बिना साइन करवाया गया। रानी कपूर का आरोप है कि बीमारी और कमजोर स्वास्थ्य का फायदा उठाकर संपत्तियों को फैमिली ट्रस्ट में ट्रांसफर किया गया। उन्होंने अपने दिवंगत बेटे संजय कपूर और बहू प्रिया कपूर पर इस प्रक्रिया में भूमिका निभाने का आरोप लगाया। रानी कपूर का कहना है कि उनके पति डॉ. सुरिंदर कपूर की संपत्ति की वह इकलौती कानूनी उत्तराधिकारी हैं और वर्ष 2017 में कई कथित अवैध लेन-देन के जरिए संपत्तियों का नियंत्रण बदला गया।

प्रिया कपूर ने आरोपों को बताया निराधार

दूसरी ओर संजय कपूर की पत्नी प्रिया कपूर ने रानी कपूर के सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि ट्रस्ट और संपत्ति से जुड़े सभी फैसले कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए गए थे। प्रिया कपूर ने आरोप लगाया कि परिवार के कुछ सदस्य उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर किए गए कथित अपमानजनक बयानों को लेकर मानहानि का मामला भी दायर किया है। उनका कहना है कि विवाद को अनावश्यक रूप से सार्वजनिक बनाकर परिवार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया गया।

करिश्मा कपूर और बच्चों का भी आया नाम

इस विवाद में अभिनेत्री करिश्मा कपूर और उनके बच्चों समायरा कपूर और कियान कपूर का नाम भी सामने आया है। करिश्मा कपूर ने अपने बच्चों की ओर से उत्तराधिकार से जुड़ा मामला दायर किया था। बताया जा रहा है कि संपत्ति और विरासत के अधिकारों को लेकर परिवार के कई सदस्य अलग-अलग दावे कर रहे हैं। यही वजह है कि मामला लगातार जटिल होता गया और अंततः सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।

अब सबकी नजर मध्यस्थता प्रक्रिया पर

पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ की नियुक्ति के बाद अब इस हाई-प्रोफाइल पारिवारिक विवाद के समाधान की उम्मीद बढ़ गई है। कानूनी जानकारों का मानना है कि अगर मध्यस्थता सफल रहती है, तो परिवार को लंबी अदालती लड़ाई से राहत मिल सकती है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अदालत का उद्देश्य केवल कानूनी फैसला देना नहीं, बल्कि परिवार के भीतर स्थायी समाधान निकालना है। अब अगस्त में होने वाली अगली सुनवाई में यह साफ हो सकेगा कि मध्यस्थता की प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ रही है।


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