दिल्ली एयरपोर्ट पर स्पाइसजेट की कई उड़ानें प्रभावित, देरी और रद्द होने से यात्रियों की बढ़ी परेशानी
स्पाइसजेट पिछले काफी समय से वित्तीय और परिचालन संबंधी चुनौतियों का सामना कर रही है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने 3 सितंबर को कहा था कि सरकार एयरलाइन के संचालन और वित्तीय स्थिति को लेकर उसके साथ लगातार बातचीत कर रही है।

नई दिल्ली: इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर शनिवार को ऑपरेशनल दिक्कतों के चलते स्पाइसजेट की कई उड़ानें प्रभावित रहीं। कुछ फ्लाइट्स निर्धारित समय से देरी से रवाना हुईं, जबकि कुछ उड़ानों को रद्द करना पड़ा। अचानक पैदा हुई इस स्थिति के कारण एयरपोर्ट पर बड़ी संख्या में यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। दिल्ली एयरपोर्ट ने सोशल मीडिया के जरिए यात्रियों से असुविधा के लिए माफी मांगी और कहा कि प्रभावित यात्रियों को जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
ग्राउंड स्टाफ यात्रियों की कर रहा मदद
दिल्ली एयरपोर्ट के मुताबिक, स्थिति से प्रभावित यात्रियों की मदद के लिए ग्राउंड स्टाफ को लगाया गया है। एयरपोर्ट प्रशासन स्पाइसजेट के साथ समन्वय कर यात्रियों को आवश्यक जानकारी और सहायता उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, शनिवार को सामने आई ऑपरेशनल समस्या की वास्तविक वजह क्या थी, इसे लेकर स्पाइसजेट की ओर से फिलहाल विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। यात्रियों को उड़ानों की स्थिति और आगे की व्यवस्था के बारे में एयरलाइन तथा एयरपोर्ट के माध्यम से जानकारी दी जा रही है।
15 सितंबर को भी घंटों लेट हुई थीं उड़ानें
स्पाइसजेट की उड़ानों में देरी का यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब कुछ दिन पहले भी दिल्ली से दुबई जाने वाली उसकी दो उड़ानें लंबे समय तक प्रभावित हुई थीं। 15 सितंबर को एक फ्लाइट करीब 30 घंटे और दूसरी करीब 19 घंटे की देरी से रवाना हुई थी। लंबी देरी से नाराज करीब 200 यात्रियों ने दिल्ली एयरपोर्ट पर विरोध प्रदर्शन भी किया था। उस समय एयरलाइन की ओर से कहा गया था कि एक विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद वैकल्पिक उड़ानों की व्यवस्था की जा रही थी।
वित्तीय और ऑपरेशनल चुनौतियों से जूझ रही एयरलाइन
स्पाइसजेट पिछले काफी समय से वित्तीय और परिचालन संबंधी चुनौतियों का सामना कर रही है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने 3 सितंबर को कहा था कि सरकार एयरलाइन के संचालन और वित्तीय स्थिति को लेकर उसके साथ लगातार बातचीत कर रही है। मंत्री के अनुसार, सरकार ने स्पाइसजेट को अपनी उड़ानों की संख्या बढ़ाने के लिए कहा था और एयरलाइन ने जल्द स्थिति में सुधार का भरोसा दिया था। उन्होंने यह भी बताया था कि स्पाइसजेट ने सरकार से सीधे अतिरिक्त वित्तीय सहायता नहीं मांगी है, लेकिन इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम यानी ECLGS के तहत फंड जुटाने की कोशिश कर रही है।
बढ़ती लागत और कम विमान संचालन का दबाव
एयरलाइन सेक्टर में बढ़ती एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF की कीमतों, एयरस्पेस से जुड़ी पाबंदियों, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कमी और उपलब्ध विमानों के सीमित इस्तेमाल जैसी वजहों से वित्तीय दबाव बढ़ा है। इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने मई में भारतीय एयरलाइंस के लिए ECLGS 5.0 को मंजूरी दी थी। इस योजना के तहत सरकार बैंकों से लिए जाने वाले कर्ज पर गारंटी देती है, जिससे पात्र कंपनियों के लिए ऋण जुटाना आसान हो सकता है।
बुकिंग प्लेटफॉर्म पर CCPA ने लगाया था जुर्माना
स्पाइसजेट को हाल के महीनों में उपभोक्ता संरक्षण से जुड़ी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ा है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने जुलाई में एयरलाइन पर उसके फ्लाइट बुकिंग प्लेटफॉर्म में कथित ‘डार्क पैटर्न’ के इस्तेमाल को लेकर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। CCPA के मुताबिक, ऑनलाइन बुकिंग प्रक्रिया में ऐसे इंटरफेस का इस्तेमाल किया गया था, जो उपभोक्ताओं की पसंद को प्रभावित कर सकते थे। प्राधिकरण ने ऑटोमेटिक लॉयल्टी प्रोग्राम में शामिल करने और प्रचार संबंधी संदेशों के लिए पहले से चुने गए विकल्पों को लेकर आपत्ति जताई थी।
समय पर उड़ान और बाजार हिस्सेदारी पर भी दबाव
उड़ानों के समय पर संचालन के मामले में भी स्पाइसजेट का प्रदर्शन बड़ी एयरलाइंस की तुलना में कमजोर रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में एयरलाइन की करीब 34.5 प्रतिशत उड़ानें निर्धारित समय पर संचालित हुईं। इसी महीने घरेलू विमानन बाजार में स्पाइसजेट की हिस्सेदारी घटकर 1.6 प्रतिशत रह गई, जो जून में 1.9 प्रतिशत थी। जुलाई में एयरलाइन ने करीब 1.87 लाख यात्रियों को यात्रा कराई। इसी अवधि में इंडिगो की बाजार हिस्सेदारी 67.4 प्रतिशत, एयर इंडिया समूह की 24 प्रतिशत और अकासा एयर की 5.5 प्रतिशत रही। शनिवार की ताजा घटनाओं के बाद यात्रियों की नजर अब एयरलाइन की उड़ान व्यवस्था सामान्य होने और देरी की समस्या कम होने पर है।


