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रिलायंस कम्युनिकेशंस मामले में विशेष अदालत ने लिया संज्ञान

नई दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायालय (पीएमएलए) ने 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002' के तहत अपराधों के लिए रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड और अन्य के खिलाफ ईडी द्वारा दायर अभियोजन शिकायत (पीसी) का संज्ञान लिया है।

रिलायंस कम्युनिकेशंस मामले में विशेष अदालत ने लिया संज्ञान
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नई दिल्ली। नई दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायालय (पीएमएलए) ने 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002' के तहत अपराधों के लिए रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड और अन्य के खिलाफ ईडी द्वारा दायर अभियोजन शिकायत (पीसी) का संज्ञान लिया है।

ईडी ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत 27 मार्च को नई दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायालय (पीएमएलए) के समक्ष पुनीत गर्ग और वैशाली माने के खिलाफ अभियोजन शिकायत दायर की थी। बता दें कि इससे पहले रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के पूर्व निदेशक पुनीत गर्ग को ईडी ने 29 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया था और वे अभी भी न्यायिक हिरासत में हैं।

ईडी ने यह जांच सीबीआई की एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी, जिसे 21 अगस्त 2025 को दर्ज किया गया था। बता दें कि पुनीत गर्ग ने 2006 से 2013 तक आरकॉम के ग्लोबल एंटरप्राइज बिजनेस को संभालते हुए आरकॉम के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। इसके बाद उन्होंने 2014 से 2017 तक अध्यक्ष (नियामक मामले) के रूप में कार्य किया। बाद में अक्टूबर 2017 में उन्हें आरकॉम का कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया गया।

इसके बाद अप्रैल 2019 से अप्रैल 2025 तक उन्होंने आरकॉम के गैर-कार्यकारी निदेशक के रूप में कार्य किया। ईडी की जांच से पता चला है कि पुनीत गर्ग 2001 से 2025 तक आरकॉम में सीनियर मैनेजर और डायरेक्टर के पदों पर रहते हुए, बैंक धोखाधड़ी से मिली अवैध कमाई को हासिल करने, अपने पास रखने, छिपाने, लेयरिंग करने और उसे इधर-उधर करने में सक्रिय रूप से शामिल थे।

जांच में यह पाया गया है कि अवैध कमाई को आरकॉम की कई विदेशी सब्सिडियरी और ऑफशोर कंपनियों के जरिए दूसरी जगहों पर भेजा गया। इस अवैध कमाई का इस्तेमाल 'तियान' नाम की एक लग्जरी यॉट, जिसे जर्सी (यूके) की एक कंपनी ने खरीदा था और मैनहट्टन, न्यूयॉर्क (यूएसए) में एक लग्जरी कॉन्डोमिनियम अपार्टमेंट खरीदने के लिए किया गया था।

रिलायंस ग्रुप की कंपनियों की कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (सीआईआरपी) के दौरान ये संपत्तियां चुपके से और धोखाधड़ी करके बेची गईं। बिक्री से मिली रकम को सही हकदारों को वापस करने के बजाय इधर-उधर कर दिया गया। इसी को लेकर स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए), राउज एवेन्यू, नई दिल्ली ने सोमवार को प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट का संज्ञान लिया है।


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