सोनिया गांधी: वोटर लिस्ट से जुड़े मामले में बड़ा मोड़, मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द; अब नए सिरे से होगी सुनवाई
इस मामले में मूल शिकायत में सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी। हालांकि, वर्ष 2025 में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने शिकायत को खारिज कर दिया था। अब सत्र अदालत ने उस आदेश को रद्द कर दिया है।

नई दिल्ली: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी से जुड़े मतदाता सूची मामले में दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने निचली अदालत के आदेश को रद्द करते हुए मामले की नए सिरे से सुनवाई का रास्ता खोल दिया है। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने उस पुनरीक्षण याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें मजिस्ट्रेट अदालत के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली शिकायत खारिज कर दी गई थी। मामला उस शिकायत से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी का नाम वर्ष 1980 में मतदाता सूची में उस समय शामिल किया गया था, जब उन्हें भारतीय नागरिकता नहीं मिली थी। शिकायतकर्ता की ओर से जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया गया है। ये आरोप अदालत में विचाराधीन शिकायत का हिस्सा हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि का सवाल अलग है।
सत्र अदालत ने क्यों बदला निचली अदालत का आदेश
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि मजिस्ट्रेट अदालत का आदेश पर्याप्त कारणों पर आधारित नहीं था और उसमें मामले से जुड़े निष्कर्षों के पीछे उचित वजह स्पष्ट नहीं की गई थी। सत्र अदालत के मुताबिक, शिकायत को खारिज करने से पहले उपलब्ध सामग्री और दोनों पक्षों के तर्कों पर पर्याप्त विचार किया जाना जरूरी था। अदालत ने मामले को दोबारा एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के पास भेज दिया है। निर्देश दिया गया है कि दोनों पक्षों को सुनने के बाद शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच की जाए तथा संबंधित पुलिस अधिकारी का पक्ष भी लिया जाए।
एफआईआर की मांग वाली शिकायत पर फिर होगी सुनवाई
इस मामले में मूल शिकायत में सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी। हालांकि, वर्ष 2025 में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने शिकायत को खारिज कर दिया था। अब सत्र अदालत ने उस आदेश को रद्द कर दिया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि सोनिया गांधी के खिलाफ आरोप साबित हो गए हैं या एफआईआर दर्ज करने का आदेश हो गया है। फिलहाल मामला वापस मजिस्ट्रेट अदालत में पहुंचा है, जहां शिकायत पर कानूनी प्रक्रिया के अनुसार दोबारा विचार किया जाएगा।
फोटोकॉपी वाले रिकॉर्ड पर भी सवाल
सत्र अदालत ने निचली अदालत के उस दृष्टिकोण पर भी आपत्ति जताई, जिसमें शिकायत को एक अप्रमाणित रिकॉर्ड की फोटोकॉपी पर आधारित तथ्यात्मक दावे के तौर पर देखते हुए खारिज कर दिया गया था। पुनरीक्षण अदालत के अनुसार, उपलब्ध सामग्री की जांच और संबंधित पक्षों को सुनने के बाद ही शिकायत पर उचित निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए था। अदालत ने यह भी माना कि निचली अदालत के आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि शिकायत में संज्ञेय अपराध के तत्व सामने आते हैं या नहीं। इसी कारण सत्र अदालत ने आदेश को दोबारा विचार के लिए वापस भेजना उचित माना।
नागरिकता के सवाल पर भी अदालत की टिप्पणी
मामले में सोनिया गांधी की भारतीय नागरिकता से जुड़े सवाल भी उठाए गए हैं। शिकायत में आरोप है कि मतदाता सूची में नाम दर्ज होने के समय उनकी नागरिकता की स्थिति अलग थी। इसी आधार पर मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाया गया। सत्र अदालत ने नागरिकता से जुड़े अधिकार क्षेत्र को लेकर मजिस्ट्रेट अदालत की कुछ टिप्पणियों को उचित नहीं माना। अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग से संबंधित मुद्दों पर निचली अदालत के आदेश में की गई टिप्पणियों को भी दोबारा कानूनी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
29 सितंबर को होगी आगे की सुनवाई
सत्र अदालत ने मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए वापस भेजते हुए 29 सितंबर को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। अब मजिस्ट्रेट अदालत दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगी और शिकायत में उपलब्ध दस्तावेजों तथा अन्य संबंधित सामग्री की जांच करेगी। इस प्रक्रिया के बाद अदालत को यह तय करना होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों पर आगे जांच की आवश्यकता है या नहीं और एफआईआर दर्ज कराने की मांग पर कानून के मुताबिक क्या आदेश दिया जाना चाहिए। फिलहाल सत्र अदालत का आदेश प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने से संबंधित है, न कि आरोपों की अंतिम पुष्टि से।


