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सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कर कराएं फोर्स फीडिंग, हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर की गई मांग

याचिका सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता राकेश कुमार सैनी ने दाखिल की है। इसमें मांग की गई है कि वांगचुक को अस्पताल ले जाकर आवश्यक इलाज उपलब्ध कराया जाए और जरूरत पड़ने पर उनकी जान बचाने के लिए चिकित्सकीय हस्तक्षेप किया जाए।

सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कर कराएं फोर्स फीडिंग, हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर की गई मांग
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नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है। वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है, जिसमें केंद्र और दिल्ली सरकार को उन्हें तुरंत चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता राकेश कुमार सैनी ने दाखिल की है। इसमें मांग की गई है कि वांगचुक को अस्पताल ले जाकर आवश्यक इलाज उपलब्ध कराया जाए और जरूरत पड़ने पर उनकी जान बचाने के लिए चिकित्सकीय हस्तक्षेप किया जाए।

सुनवाई वकीलों की हड़ताल के कारण स्थगित

दिल्ली हाई कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई होनी थी, लेकिन वकीलों की हड़ताल के बीच केंद्र सरकार की ओर से कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद अदालत ने सुनवाई को आगे के लिए टाल दिया। याचिका में दावा किया गया है कि लंबे समय से चल रही भूख हड़ताल के कारण वांगचुक का स्वास्थ्य प्रभावित हुआ है। याचिकाकर्ता ने अदालत से अपील की है कि उनकी स्थिति को देखते हुए तत्काल कदम उठाए जाएं।

याचिका में स्वास्थ्य को लेकर जताई गई चिंता

PIL में कहा गया है कि यदि भूख हड़ताल जारी रहती है तो वांगचुक की सेहत और खराब हो सकती है। याचिका में दावा किया गया है कि उनका वजन करीब 8.5 किलोग्राम कम हो गया है और शरीर में कमजोरी समेत कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सामने आ रही हैं। याचिकाकर्ता ने कहा है कि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए सरकार को उनकी चिकित्सा सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। याचिका में अदालत से यह भी आग्रह किया गया है कि मानव जीवन की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

सरकार के रवैये पर उठाए गए सवाल

याचिका में केंद्र सरकार के रवैये पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसमें आरोप लगाया गया है कि वांगचुक के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है जैसे वह किसी गंभीर अपराध के आरोपी हों। याचिकाकर्ता ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह किसी भी नागरिक के स्वास्थ्य और जीवन की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए। PIL में कहा गया है कि अगर किसी व्यक्ति की जान खतरे में हो तो प्रशासन को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

28 जून से जंतर-मंतर पर जारी है अनशन

सोनम वांगचुक 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे हैं। उनका यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा है। वांगचुक ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठाई है। उनके समर्थकों का कहना है कि परीक्षा संबंधी अनियमितताओं से बड़ी संख्या में छात्र प्रभावित हुए हैं।

समर्थक कर रहे हैं अनशन खत्म करने की अपील

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भूख हड़ताल के कारण वांगचुक की शारीरिक स्थिति कमजोर हुई है। समर्थक लगातार उनसे आंदोलन समाप्त करने की अपील कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने अपनी मांगें पूरी होने तक अनशन जारी रखने की बात कही है। उनके स्वास्थ्य को लेकर आंदोलन से जुड़े लोगों और समर्थकों में चिंता बनी हुई है।

CJP का संसद मार्च का ऐलान

इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने घोषणा की है कि वह संसद के मानसून सत्र के पहले दिन 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद भवन तक शांतिपूर्ण मार्च निकालेगी। CJP ने छात्रों, अभिभावकों और आम नागरिकों से इस मार्च में शामिल होने की अपील की है। संगठन की प्रमुख मांगों में शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और छात्रों के हितों की सुरक्षा शामिल है।

आंदोलन पर बढ़ी राजनीतिक नजर

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल अब केवल एक सामाजिक आंदोलन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा सुधार और सरकार की जवाबदेही को लेकर व्यापक बहस का विषय बन चुकी है। हाई कोर्ट में दाखिल याचिका के बाद अब सभी की नजर अदालत की अगली सुनवाई और सरकार के रुख पर टिकी हुई है।


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