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सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद आंदोलन तेज, केजरीवाल और अखिलेश ने सरकार पर साधा निशाना

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि किसी आंदोलन को बलपूर्वक समाप्त करने के बजाय सरकार को प्रदर्शनकारियों से संवाद करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों का समाधान बातचीत के माध्यम से होना चाहिए।

सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद आंदोलन तेज, केजरीवाल और अखिलेश  ने सरकार पर साधा निशाना
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नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर लंबे समय से जारी भूख हड़ताल के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार को पुलिस चिकित्सा जांच और इलाज के लिए अस्पताल ले गई। इसके बाद आंदोलन ने नया राजनीतिक और सामाजिक मोड़ ले लिया। प्रदर्शन स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है, जबकि प्रशासन प्रदर्शनकारियों से जंतर-मंतर खाली करने की अपील कर रहा है। दूसरी ओर, आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि उनका विरोध जारी रहेगा और 20 जुलाई को प्रस्तावित "संसद चलो" अभियान तय कार्यक्रम के अनुसार आयोजित किया जाएगा।

दीपके ने शुरू किया अनिश्चितकालीन अनशन

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद स्वयं भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा की। इस दौरान वह भावुक भी नजर आए। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन यह समझता है कि वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाने से आंदोलन समाप्त हो जाएगा, तो यह उसकी गलतफहमी है। दीपके ने कहा कि आंदोलन पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तक सीमित था, लेकिन हालिया घटनाक्रम के बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग भी उठाई जाएगी। उन्होंने समर्थकों से 20 जुलाई के संसद मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की।

दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट के निर्देशों का दिया हवाला

दिल्ली पुलिस ने पूरे घटनाक्रम पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सोनम वांगचुक को उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह और दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में अस्पताल पहुंचाया गया है। पुलिस का कहना है कि यह कदम केवल आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया। प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने और कानून-व्यवस्था में सहयोग करने की भी अपील की है।

सोनम वांगचुक की पत्नी ने उठाए सवाल

वांगचुक की पत्नी ने दावा किया कि उनके पति अब भी अपनी भूख हड़ताल जारी रखे हुए हैं और उन्होंने चिकित्सकों को इलेक्ट्रोलाइट या अन्य दवाएं देने की अनुमति नहीं दी है। उन्होंने कहा कि वह उनकी चिकित्सकीय जांच किसी स्वतंत्र प्रयोगशाला से भी कराना चाहती हैं क्योंकि उन्हें वर्तमान चिकित्सा व्यवस्था पर भरोसा नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन और पुलिस उनकी मेडिकल रिपोर्ट साझा नहीं कर रहे हैं तथा जिस कक्ष में सोनम वांगचुक भर्ती हैं, वहां मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं दी जा रही। हालांकि उन्होंने बताया कि अब उनके निजी डॉक्टर और कानूनी प्रतिनिधियों को मुलाकात की अनुमति मिल गई है।

विपक्षी नेताओं ने सरकार को घेरा

सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि किसी आंदोलन को बलपूर्वक समाप्त करने के बजाय सरकार को प्रदर्शनकारियों से संवाद करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों का समाधान बातचीत के माध्यम से होना चाहिए।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यदि किसी व्यक्ति को उसके अनशन स्थल से बलपूर्वक हटाया गया है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने इस कार्रवाई को लेकर पारदर्शिता की मांग करते हुए संबंधित तथ्यों को सार्वजनिक करने की बात कही।

वहीं, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि आंदोलनकारियों की मांगों पर संवाद होना चाहिए और लोकतांत्रिक विरोध का सम्मान किया जाना चाहिए।


कायरतापूर्ण, शर्मनाक और पूरी तरह से गैर-कानूनी

सामाजिक कायकर्ता योगेंद्र यादव ने कहा, "आज सुबह दिल्ली पुलिस ने जो कार्रवाई की, वह कायरतापूर्ण, शर्मनाक और पूरी तरह से गैर-कानूनी है। यह कायरतापूर्ण और शर्मनाक इसलिए है क्योंकि आपने अपनी कार्रवाई को छिपाने के लिए सफेद चादरों का पर्दा लगाया और फिर उस व्यक्ति को उसकी मर्जी के खिलाफ घसीटते हुए ले गए। पर्दे के पीछे छिपने की बात ही यह साबित करती है कि यह कितना शर्मनाक है। यह गैर-कानूनी इसलिए है क्योंकि कोर्ट के आदेश में कहीं भी यह नहीं कहा गया था कि आप उसे जबरदस्ती ले जा सकते हैं, और न ही यह कहा गया था कि आप उसे जबरदस्ती खाना खिला सकते हैं। किसी भी डॉक्टर की रिपोर्ट में यह नहीं कहा गया था कि उसके वाइटल साइन (शरीर के ज़रूरी संकेत) गिर रहे थे।"

20 जुलाई के संसद मार्च पर सबकी नजर

आंदोलन से जुड़े संगठनों ने स्पष्ट किया है कि सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद उनका अभियान जारी रहेगा। अभिजीत दीपके और अन्य प्रदर्शनकारी 20 जुलाई को प्रस्तावित "संसद चलो" मार्च की तैयारियों में जुटे हैं। उधर, प्रशासन ने राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। फिलहाल सोनम वांगचुक अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में हैं, जबकि आंदोलन और उससे जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।


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