असम के नगांव लोकसभा उपचुनाव में सिबामोनी बोरा होंगी कांग्रेस उम्मीदवार
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने असम की नगांव लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए पूर्व विधायक सिबामोनी बोरा के नाम को मंजूरी दे दी है। पार्टी ने उन्हें आगामी लोकसभा उपचुनाव में अपना अधिकृत उम्मीदवार घोषित किया है। नगांव सीट पर 6 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने असम की नगांव लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए पूर्व विधायक सिबामोनी बोरा के नाम को मंजूरी दे दी है। पार्टी ने उन्हें आगामी लोकसभा उपचुनाव में अपना अधिकृत उम्मीदवार घोषित किया है। नगांव सीट पर 6 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।
नगांव उपचुनाव को असम की राजनीति में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह सीट पूर्व कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। बोरदोलोई ने लोकसभा और कांग्रेस की सदस्यता छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। उन्होंने बाद में असम विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर दिसपुर सीट से चुनाव जीत लिया, जिसके बाद नगांव लोकसभा क्षेत्र में उपचुनाव की नौबत आई।
कांग्रेस ने इस चुनावी मुकाबले के लिए पूर्व विधायक सिबामोनी बोरा पर भरोसा जताया है। पार्टी का मानना है कि बोरा स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाली नेता हैं और नगांव में कांग्रेस के समर्थन आधार को मजबूत करने में सक्षम होंगी।
वहीं, भाजपा ने पूर्व आईएएस अधिकारी और नगांव के पूर्व उपायुक्त देवाशीष शर्मा को मैदान में उतारा है। शर्मा ने 3 सितंबर को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी, 8 सितंबर को भाजपा में शामिल हुए और कुछ ही दिनों बाद उन्हें पार्टी का उम्मीदवार घोषित कर दिया गया। उनकी उम्मीदवारी भी राजनीतिक बहस का विषय बनी हुई है। कांग्रेस ने उनके प्रशासनिक कार्यकाल और राजनीति में तत्काल प्रवेश को लेकर सवाल उठाए हैं।
इस बीच, असम कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद गौरव गोगोई ने नगांव उपचुनाव को भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी लड़ाई बताया है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव इस बात की परीक्षा है कि भाजपा की कथित 'डर की राजनीति' जीतती है या फिर जनता अपने अधिकारों और सम्मान के लिए आवाज उठाती है। नगांव की जनता भय और दबाव की राजनीति को खारिज करेगी।
नगांव सीट कांग्रेस के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि पार्टी ने 2019 और 2024 दोनों लोकसभा चुनावों में यहां जीत दर्ज की थी। दूसरी ओर, भाजपा प्रद्युत बोरदोलोई के दल-बदल और देवाशीष शर्मा की स्थानीय पहचान को चुनावी लाभ में बदलने की कोशिश कर रही है।


