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शेख हसीना का हुंकार: कठपुतली सरकार को उखाड़ फेंको

बंगलादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बंगलादेश की मौजूदा एवं अंतरिम सरकार पर देश को अराजकता में धकेलने और लोकतंत्र को गंभीर खतरे में डालने का आरोप लगाया

शेख हसीना का हुंकार: कठपुतली सरकार को उखाड़ फेंको
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लोकतंत्र पर संकट, बांग्लादेश खून के आँसू रो रहा है

  • यूनुस शासन को चुनौती, जनता की एकजुटता ही समाधान
  • हसीना का आरोप, देश को विशाल जेल बना दिया गया
  • संप्रभुता खतरे में, अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग

नई दिल्ली। बंगलादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने शुक्रवार को बंगलादेश की मौजूदा एवं अंतरिम सरकार पर देश को अराजकता में धकेलने और लोकतंत्र को गंभीर खतरे में डालने का आरोप लगाया।

उन्होंने यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में ऑडियो लिंक के माध्यम से अपनी बात रखते हुए कहा कि राष्ट्र को मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली इस "कठपुतली सरकार" को उखाड़ फेंकने के लिए एकजुट होकर उठ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने 1971 की मुक्ति संग्राम की भावना का समर्थन करने वाली सभी ताकतों से आह्वान किया कि वे यूनुस शासन के "विश्वासघाती मंसूबों" का डटकर मुकाबला करें।

अवामी लीग की प्रमुख ने आरोप लगाया कि पांच अगस्त, 2024 को उन्हें सत्ता से हटाए जाने के बाद से बंगलादेश एक ऐसी "विश्वासघाती साजिश" का सामना कर रहा है, जिसका मकसद देश की क्षेत्रीय अखंडता का सौदा करना है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि बंगलादेश की संप्रभुता और एकता खतरे में है और आज यह एक ऐसा राष्ट्र बन गया है जो "खून के आंसू रो रहा है"।

सुश्री हसीना ने यह भी दावा किया कि उग्रवादियों और मोहम्मद यूनुस ने उन्हें जबरन सत्ता से बेदखल किया और उस दिन से पूरा देश निरंतर हिंसा, दमन और आर्थिक संकट की चपेट में है, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाएं व्यवस्थित रूप से कमजोर हो गई हैं। सुश्री हसीना ने वर्तमान बंगलादेश की तुलना एक "विशाल जेल" से करते हुए कहा कि वहां आम लोग दैनिक हिंसा, असुरक्षा और आर्थिक तंगी के बीच जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने मौजूदा शासन के तहत महिलाओं और अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त की और एक गैर-पक्षपाती सरकार की बहाली की मांग की।

उन्होंने प्रशासन से अराजकता को खत्म करने, नागरिक सेवाओं को सुचारू करने, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और प्रेस तथा विपक्षी दलों के खिलाफ राजनीति से प्रेरित कार्रवाइयों को तुरंत रोकने की अपील की। उन्होंने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बहाल करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। अपनी मांगों को विस्तार देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र से आग्रह किया कि वह पिछले एक वर्ष के दौरान हुई हिंसा और मानवाधिकारों के उल्लंघन की जांच के लिए हस्तक्षेप करे। उन्होंने तर्क दिया कि जवाबदेही तय करने और जनता का विश्वास बहाल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय निगरानी अनिवार्य है। सुश्री हसीना ने कहा कि उनका देश वर्तमान में भय और दमन के दौर से गुजर रहा है जिसे केवल जनता की एकजुटता से ही बदला जा सकता है। उधर बंगलादेश की अंंतरिम सरकार ने सुश्री हसीना के लगाये गये इन गंभीर आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।


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