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शाहरुख खान ने खरीदी दिल्ली की पुश्तैनी बिल्डिंग, बचपन से शादी तक की यादें अब एक ही छत के नीचे

रिपोर्ट्स के अनुसार, शाहरुख खान ने पंचशील पार्क स्थित इस भवन की दूसरी और तीसरी मंजिल करीब 37 करोड़ रुपये में खरीदी हैं। इसके साथ ही अब पूरी तीन मंजिला इमारत उनके स्वामित्व में आ गई है। बताया जाता है कि यह संपत्ति लगभग 10,800 वर्ग फुट क्षेत्र में फैली हुई है।

शाहरुख खान ने खरीदी दिल्ली की पुश्तैनी बिल्डिंग, बचपन से शादी तक की यादें अब एक ही छत के नीचे
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नई दिल्ली: बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान ने अपनी जन्मभूमि दिल्ली से जुड़ी सबसे खास यादों को हमेशा के लिए अपने नाम कर लिया है। राजधानी के पॉश इलाके पंचशील पार्क में स्थित उस तीन मंजिला रिहायशी इमारत के अब वह एकमात्र मालिक बन गए हैं, जहां उन्होंने अपने जीवन के कई महत्वपूर्ण पड़ाव देखे। इसी घर में उनका संघर्ष का दौर बीता, यहीं से अभिनय के सपनों ने उड़ान भरी और शादी के बाद पत्नी गौरी खान ने पहली बार गृह प्रवेश भी किया था। हाल ही में शाहरुख खान ने इस इमारत की दूसरी और तीसरी मंजिल खरीदकर पूरी बिल्डिंग का स्वामित्व अपने नाम कर लिया है। इससे पहले भूतल और पहली मंजिल पहले से ही उनके स्वामित्व में थीं।

37 करोड़ रुपये में खरीदीं दो मंजिलें

रिपोर्ट्स के अनुसार, शाहरुख खान ने पंचशील पार्क स्थित इस भवन की दूसरी और तीसरी मंजिल करीब 37 करोड़ रुपये में खरीदी हैं। इसके साथ ही अब पूरी तीन मंजिला इमारत उनके स्वामित्व में आ गई है। बताया जाता है कि यह संपत्ति लगभग 10,800 वर्ग फुट क्षेत्र में फैली हुई है। रियल एस्टेट रिपोर्टों के अनुसार, इस इलाके में जमीन का मूल्य करीब 34,260 रुपये प्रति वर्ग फुट आंका गया है। दक्षिण दिल्ली का पंचशील पार्क क्षेत्र राजधानी के सबसे प्रतिष्ठित और महंगे आवासीय इलाकों में गिना जाता है।

यहीं बीता संघर्ष का दौर

मुंबई में बॉलीवुड के "किंग खान" बनने से पहले शाहरुख खान का जीवन पूरी तरह दिल्ली से जुड़ा रहा है। उनका बचपन राजधानी के राजेंद्र नगर इलाके में बीता। बाद में परिवार गौतम नगर में रहा और फिर पंचशील पार्क स्थित इस घर में आकर बस गया। यही वह घर है जहां शाहरुख ने अपने अभिनय करियर की शुरुआती तैयारी की, थिएटर किया और बड़े सपने देखे। फिल्मों में सफलता मिलने से पहले उन्होंने इसी घर में संघर्ष के कई वर्ष बिताए। यही कारण है कि यह इमारत उनके लिए केवल एक संपत्ति नहीं, बल्कि जीवन की अनमोल यादों का हिस्सा मानी जाती है।

शादी के बाद यहीं से शुरू हुई नई जिंदगी

शाहरुख खान और गौरी खान की प्रेम कहानी बॉलीवुड की सबसे चर्चित कहानियों में गिनी जाती है। दोनों ने 25 अक्टूबर 1991 को विवाह किया। उनकी शादी तीन अलग-अलग रीति-रिवाजों से संपन्न हुई थी, जिसमें रजिस्टर्ड सिविल मैरिज, पारंपरिक हिंदू विवाह और निकाह शामिल था। शादी के बाद गौरी खान पहली बार इसी पंचशील पार्क स्थित घर में दुल्हन बनकर आई थीं। विवाह के शुरुआती दिन भी दोनों ने इसी घर में बिताए। बाद में अभिनय में करियर बनाने के लिए शाहरुख मुंबई चले गए, जहां उन्होंने सफलता की नई इबारत लिखी। इसके बावजूद दिल्ली वाला यह घर हमेशा उनके दिल के बेहद करीब बना रहा।

पूरी बिल्डिंग खरीदने के पीछे खास वजह

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, शाहरुख खान लंबे समय से चाहते थे कि दिल्ली से जुड़ी उनकी सभी यादें एक ही छत के नीचे सुरक्षित रहें। इसी सोच के तहत उन्होंने इमारत की बची हुई दोनों मंजिलें भी खरीदने का फैसला किया। अब पूरी बिल्डिंग उनके स्वामित्व में आने के बाद यह घर उनके परिवार की निजी विरासत का हिस्सा बन गया है। बताया जाता है कि इस संपत्ति के एक हिस्से में वर्तमान में उनके रिश्तेदार रहते हैं और वही इसकी देखरेख भी करते हैं।

पंचशील पार्क की संपत्ति बनी भावनात्मक विरासत

पंचशील पार्क दक्षिण दिल्ली के सबसे प्रतिष्ठित आवासीय इलाकों में शामिल है, जहां देश के कई उद्योगपति, वरिष्ठ अधिकारी और प्रसिद्ध हस्तियां रहती हैं। ऐसे में यह संपत्ति केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से भी शाहरुख खान के लिए बेहद खास मानी जा रही है। दिल्ली में बिताए बचपन, परिवार के साथ गुजारे पलों, संघर्ष के दिनों और वैवाहिक जीवन की शुरुआत जैसी अनगिनत यादें इसी घर से जुड़ी हुई हैं। अब पूरी इमारत उनके स्वामित्व में आने के बाद यह भवन शाहरुख और गौरी खान के जीवन की उन यादों का स्थायी प्रतीक बन गया है, जिन्होंने उनके सफर को आकार दिया।

यादों से जुड़ा घर, निवेश से बढ़कर एक विरासत

फिल्मी दुनिया में अपार सफलता हासिल करने के बाद भी शाहरुख खान अपने अतीत और जड़ों से जुड़े रहने के लिए जाने जाते हैं। दिल्ली स्थित इस पुश्तैनी घर की पूरी बिल्डिंग खरीदना भी उसी जुड़ाव का प्रतीक माना जा रहा है। यह फैसला केवल रियल एस्टेट निवेश नहीं, बल्कि उन यादों को संजोने का प्रयास है, जिन्होंने एक साधारण दिल्ली के युवक को हिंदी सिनेमा का "बादशाह" बनने की प्रेरणा दी।


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