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राउज एवेन्यू कोर्ट ने जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में दिल्ली पुलिस की चार्जशीट पर सवाल उठाए

राउज एवेन्यू कोर्ट ने फरवरी 2025 में जंतर-मंतर पर यूजीसी के ड्राफ्ट रेगुलेशन के खिलाफ डीएमके के प्रदर्शन से जुड़े मामले में दिल्ली पुलिस की चार्जशीट पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

राउज एवेन्यू कोर्ट ने जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में दिल्ली पुलिस की चार्जशीट पर सवाल उठाए
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नई दिल्ली। राउज एवेन्यू कोर्ट ने फरवरी 2025 में जंतर-मंतर पर यूजीसी के ड्राफ्ट रेगुलेशन के खिलाफ डीएमके के प्रदर्शन से जुड़े मामले में दिल्ली पुलिस की चार्जशीट पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

कोर्ट ने राहुल गांधी, अखिलेश यादव, कनिमोझी, ए राजा समेत 11 लोगों के खिलाफ दाखिल चार्जशीट को बिना ठीक से सोचे-समझे दायर करने का आरोप लगाया है।

कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि पुलिस ने चार्जशीट जल्दबाजी में दाखिल कर दी। न्यायाधीश ने पुलिस के पिछले आदेश पर दिए गए जवाब से असंतोष जताया और फिर से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने याद दिलाया कि 19 फरवरी को दिए गए आदेश में पुलिस से कई सवाल पूछे गए थे। लेकिन, पुलिस ने उन सवालों का जवाब देने के बजाय सिर्फ और जांच के लिए समय मांगा।

कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि जब जंतर-मंतर प्रदर्शन के लिए छूट प्राप्त क्षेत्र है, तो फिर भी भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223(ए) कैसे लगाई गई। कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस ने यह नहीं बताया कि जांच अधिकारी ने सभी आरोपियों को जांच में शामिल होने का नोटिस क्यों नहीं दिया।

अदालत ने आगे कहा कि एसएचओ और एसीपी ने भी यह स्पष्ट नहीं किया कि चार्जशीट दायर करने से पहले उन्होंने अपने स्तर पर क्या जांच की। कोर्ट का कहना था कि जांच अधिकारी ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई और बिना कोई नया सबूत या तथ्य पेश किए आगे जांच के लिए आवेदन दे दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि पुलिस पहले इन सभी पहलुओं पर स्पष्टीकरण दे, तभी आगे समय देने की मांग पर विचार किया जाएगा।

कोर्ट ने अपने इस आदेश और 19 फरवरी के पिछले आदेश की प्रमाणित प्रति दिल्ली पुलिस कमिश्नर को भी भेजने का निर्देश दिया, ताकि जांच अधिकारी, एसएचओ और एसीपी की लापरवाही की जानकारी उन्हें मिल सके।

यह मामला फरवरी 2025 में यूजीसी के ड्राफ्ट रेगुलेशन के विरोध में डीएमके द्वारा जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन में शामिल कई प्रमुख विपक्षी नेताओं के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया था। कोर्ट की इस टिप्पणी से दिल्ली पुलिस पर जांच प्रक्रिया में लापरवाही का दबाव बढ़ गया है। अगली सुनवाई में पुलिस को इन सवालों के ठोस जवाब देने होंगे।


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