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दिल्ली में मणिपुरी संगीतकार की हत्या से उठते सवाल

राजधानी दिल्ली में मणिपुर के एक गिटार वादक की हत्या ने पूर्वोत्तर में नाराजगी भड़का दी है. इसके साथ ही देश के बाकी हिस्सों में पूर्वोत्तर के लोगों के साथ हिंसा और उत्पीड़न का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है

दिल्ली में मणिपुरी संगीतकार की हत्या से उठते सवाल
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राजधानी दिल्ली में मणिपुर के एक गिटार वादक की हत्या ने पूर्वोत्तर में नाराजगी भड़का दी है. इसके साथ ही देश के बाकी हिस्सों में पूर्वोत्तर के लोगों के साथ हिंसा और उत्पीड़न का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है.

यहां इस बात का जिक्र प्रासंगिक है कि चोंगथाम विक्रम सिंह बाफ्टा अवार्ड जीतने वाली भारत की पहली फिल्म 'बूंग' की निर्देशक लक्ष्मीप्रिया देवी के चचेरे भाई थे. दिल्ली पुलिस ने इस हत्या के मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया है. लेकिन पूर्वोत्तर के लोगों के साथ अक्सर होने वाली ऐसी घटनाओं ने उनकी सुरक्षा और उनके प्रति आम लोगों के नजरिए को एक बार फिर सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है.

पूर्वोत्तर राज्यों में इस हत्या के खिलाफ भारी नाराजगी फैली है. इसके साथ ही सवाल उठ रहे हैं कि आखिर अति सुरक्षित समझी जाने वाली देश की राजधानी में भी पूर्वोत्तर के लोग सुरक्षित क्यों नहीं हैं और ऐसा कब तक जारी रहेगा?

चोंगथाम विक्रम सिंह की घटना के बारे में अब तक क्या पता है?

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, कुछ लोगों ने दक्षिण दिल्ली में रहने वाले मणिपुर संगीतकार चोंगथाम विक्रम सिंह (55) की मामूली कहासुनी के बाद पीट-पीट कर हत्या कर दी.

बताया जा रहा है कि वो रविवार देर रात घर के सामने बड़े पैमाने पर होने वाले शोरगुल का विरोध करने घर से बाहर निकले थे. इस हमले में गंभीर रूप से घायल सिंह को उनके पुत्र तुरंत अस्पताल ले गए. लेकिन उन्होंने सोमवार तड़के वहां दम तोड़ दिया. उनके परिवार में पत्नी और एक पुत्र हैं. पुलिस ने इस मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया है. उनमें 15 साल का एक किशोर भी शामिल है.

घटना के खिलाफ विरोध तेज

सिंह की हत्या के खबर फैलते ही दिल्ली में रहने वाले पूर्वोत्तर समुदाय के लोगों से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों तक विरोध तेज हो गया. मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने एक्स पर अपने एक संदेश में इस घटना पर गहरा दुख और चिंता जताई है. पूर्व मुख्यमंत्री ने लिखा, "संगीत में उनके अमूल्य योगदान को हमेशा याद किया जाएगा. उनका असमय निधन उनके परिवार, संगीत जगत और मणिपुर के लोगों के लिए एक बड़ा नुकसान है." उन्होंने दिल्ली पुलिस से इस मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अपील की है ताकि पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय मिल सके.

मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने भी इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए दिल्ली में पूर्वोत्तर के लोगों के साथ बढ़ती ऐसी घटनाओं पर चिंता जताई है. उन्होंने केंद्र सरकार से इस स्थिति पर काबू पाने की दिशा में ठोस कदम उठाने की अपील की है.

इस घटना के विरोध और विक्रम के परिजनों को न्याय दिलाने की मांग को लेकर विभिन्न संगठनों ने दिल्ली से इम्फाल तक मोमबत्ती रैलियां आयोजित की हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय की नार्थ ईस्ट स्टूडेंट्स सोसाइटी ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है. सोसाइटी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, "विक्रम सिंह दिल्ली में बच्चों को गिटार सिखाते थे. मणिपुरी समाज में उनका योगदान बेहद सराहनीय है." बयान में दिल्ली और देश के दूसरे हिस्सों में रहने वाले पूर्वोत्तर के लोगों को सुरक्षा मुहैया कराने की भी मांग की गई है.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस घटना की निंदा करते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस की आलोचना की है. अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा कि इस दुखद घटना ने भारत की राजधानी में रहने वाले पूर्वोत्तर के नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी इस घटना की आलोचना की है.

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कौन थे चोंगथाम विक्रम सिंह?

मैतेई समुदाय के विक्रम सिंह मणिपुर की राजधानी इंफाल के रहने वाले थे. वो 1980 के दशक की शुरुआत में मणिपुर के उभरते रॉक संगीत के प्रमुख चेहरे के तौर पर उभरे थे. दरअसल, उनको संगीत अपने परिवार से विरासत में मिला था. उनकी माता चोंगथाम कमला मणिपुर में मशहूर शास्त्रीय गायिका हैं. किसी दौर में उनको मणिपुर फिल्म उद्योग का लता मंगेशकर कहा जाता था. उन्होंने कई मणिपुरी फिल्मों के लिए भी गीत गाए हैं.

विक्रम सिंह ने राज्य के मशहूर रॉक बैंड 'फीनिक्स' के प्रमुख गिटार वादक के रूप में अपनी पहचान बनाई थी. वो 'अल्ट्रा वायर्स' और 'ईस्टर्न डार्क' जैसे बैंड्स के साथ भी गिटारवादक के तौर पर काम कर चुके हैं.

सिंह करीब दो दशक पहले दिल्ली आ गए थे. उन्होंने दिल्ली संगीत विद्यालय में अध्यापन के साथ अपने घर से एक निजी संगीत विद्यालय चलाकर सैकड़ों छात्रों को गिटार और संगीत की शिक्षा दी थी. 'फीनिक्स' में सिंह के साथ काम करने वाले गायक विवेक शर्मा ने पत्रकारों से कहा, "वो एक नायाब इंसान और बड़े भाई की तरह थे. विक्रम हमेशा परदे के पीछे रह कर सबकी मदद के लिए तैयार रहते थे. वो चाहे संगीतकारों का समूह हो या कोई कलाकार."

पूर्वोत्तर के लोगों को प्रताड़ित करने के और भी मामले​​​​​

राजधानी दिल्ली और देश के दूसरे हिस्सों में पहले भी पूर्वोत्तर के लोगों के साथ ऐसी हिंसक घटनाएं होती रही हैं. पूर्वोत्तर के छात्रों और आम लोगों को प्रताड़ित करने और उनके साथ नस्लीय दुर्व्यवहार के मामले भी अक्सर सामने आते रहे हैं. इस साल मई में दिल्ली के नेहरू प्लेस में युवाओं के एक समूह ने असम और नागालैंड की दो युवतियों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणी की और विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की गई.

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इससे पहले बीते साल दिसंबर के आखिर में देहरादून में एमबीए की पढ़ाई करने वाले त्रिपुरा के एक छात्र एंजेल चकमा की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी. उसने 17 दिनों तक अस्पताल में जीवन-मौत के बीच जूझने के बाद दम तोड़ दिया था. उस घटना ने काफी सुर्खियां बटोरी थी.

बीती फरवरी में दिल्ली के मालवीय नगर में किराए पर रहने वाली अरुणाचल प्रदेश की तीन महिलाओं ने पड़ोसियों पर प्रताड़ित करने और नस्लीय टिप्पणी करने का आरोप लगाया था. इस मामले में पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार किया था.

फरवरी में ही गोरखपुर में नागालैंड की महिला एक डाक्टर के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया था. बीते साल जनवरी में दिल्ली के करोल बाग इलाके में अरुणाचल प्रदेश के एक युवक अरुण रेमो के साथ भी मारपीट की घटना सामने आई थी.

क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे मामले?

मणिपुर के वरिष्ठ पत्रकार के. सरोज सिंह ने डीडब्ल्यू से कहा, "पूर्वोत्तर के लोगों के प्रति देश के दूसरे हिस्सों में अक्सर नस्लीय टिप्पणियां की जाती हैं. लेकिन कई बार ऐसे मामले गंभीर हिंसा में बदल जाते हैं."

राज्य की एक महिला कार्यकर्ता के. चानू डीडब्ल्यू से कहती हैं, "ऐसी हर घटना के बाद कुछ दिनों तक हलचल रहती है. लेकिन उसके बाद सब कुछ पहले की तरह हो जाता है." उनका कहना था कि पूर्वोत्तर के लोगों के प्रति नजरिए में बदलाव जरूरी है. अक्सर उनके खिलाफ नस्लीय टिप्पणियां होती रहती हैं.

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे ज्यादातर मामले में दोषियों को ठोस सजा नहीं मिलना भी बढ़ते मामलों की प्रमुख वजह है.

अंग्रेजी अखबार 'इंडियन एक्सप्रेस' ने हाल में दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के हवाले बताया था कि बीते 12 साल के दौरान पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ होने वाले अपराधों के मामले में दर्ज एफआईआर में नामजद लोगों में आधे से ज्यादा लापता रहे हैं.

रिपोर्ट में कहा गया था कि वर्ष 2014 से इस साल 30 अप्रैल तक ऐसे मामलों में 2,656 प्राथमिकी दर्ज की गई थी. लेकिन सिर्फ 33 मामलों में ही दोषियों को सजा मिल सकी, यानी सजा मिलने की दर महज 1.82 फीसदी रही. सरोज सिंह कहते हैं कि यही वजह है कि ऐसे मामले कम होने की बजाय बढ़ रहे हैं.


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