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सीबीआई के नोटिस पर 1 मई से लगेगा क्यूआर कोड, फर्जी नोटिस और साइबर ठगी रोकने के लिए नया कदम

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने साइबर ठगी और फर्जी नोटिस के मामलों पर रोक लगाने के लिए एक बड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है।

सीबीआई के नोटिस पर 1 मई से लगेगा क्यूआर कोड, फर्जी नोटिस और साइबर ठगी रोकने के लिए नया कदम
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नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने साइबर ठगी और फर्जी नोटिस के मामलों पर रोक लगाने के लिए एक बड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है। 1 मई 2026 से सीबीआई द्वारा जारी किए जाने वाले सभी आधिकारिक नोटिसों पर एक विशेष क्यूआर कोड शामिल किया जाएगा। यह व्यवस्था इसलिए लागू की जा रही है, ताकि लोगों को साइबर अरेस्ट या फर्जी नोटिस के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी से बचाया जा सके।

सीबीआई से जुड़े सूत्रों के अनुसार, हर नोटिस पर एक अलग और यूनिक क्यूआर कोड होगा, जिसे स्कैन करके यह पुष्टि की जा सकेगी कि नोटिस असली है या नहीं। इसके साथ ही यह भी जानकारी मिलेगी कि नोटिस कब तक वैध है। बताया गया है कि जैसे ही नोटिस की वैधता समाप्त होगी, उस नोटिस से जुड़ा क्यूआर कोड अपने आप निष्क्रिय हो जाएगा, जिससे उसका दुरुपयोग नहीं किया जा सकेगा।

अधिकारियों का कहना है कि हाल के समय में साइबर अपराधियों द्वारा फर्जी नोटिस और नकली जांच एजेंसियों के नाम पर लोगों को डराकर ठगी करने के मामले तेजी से बढ़े हैं। इसी को देखते हुए यह तकनीकी व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया गया है, ताकि आम जनता आसानी से असली और नकली नोटिस के बीच अंतर कर सके।

इसके अलावा, सीबीआई ने यह भी बताया है कि किसी भी तरह की शंका या संदेह होने पर लोग अब सीबीआई के नए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित हेल्पबॉट 'अभय' की मदद ले सकते हैं। इस हेल्पबॉट के जरिए लोग नोटिस पर दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन करके उसकी सत्यता की जांच कर सकेंगे और तुरंत जानकारी प्राप्त कर पाएंगे।

सीबीआई का मानना है कि इस नई प्रणाली से न केवल जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि आम नागरिकों का विश्वास भी मजबूत होगा। साथ ही साइबर अपराधियों की गतिविधियों पर भी काफी हद तक रोक लगाने में मदद मिलेगी।


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