पीएम मोदी ने शेयर किया सुभाषित, लिखा- प्रकृति के संरक्षण और सम्मान में ही मानवता का कल्याण निहित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर मंगलवार को सुभाषित शेयर किया है। विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस के अवसर पर पीएम ने मानव कल्याण के लिए कुदरत के संरक्षण पर जोर दिया।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर मंगलवार को सुभाषित शेयर किया है। विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस के अवसर पर पीएम ने मानव कल्याण के लिए कुदरत के संरक्षण पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "प्रकृति के संरक्षण और सम्मान में ही मानवता का कल्याण निहित है। हमारी परंपरा भी हमें इसी धर्मसम्मत आचरण की प्रेरणा देती है।" उन्होंने संस्कृत श्लोक, "लोकपालाश्च ते सर्वे वासवप्रमुखास्तथा। ऋतवः षट् च ते सर्वे मासाः संवत्सराः क्षपाः॥ दिनानि च मुहूर्ताश्च स्वस्ति कुर्वन्तु ते सदा। श्रुतिः स्मृतिश्च धर्मश्च पातु त्वां पुत्र सर्वतः॥" भी साझा किया।
जिसका हिंदी अर्थ है कि प्रकृति और धर्म के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन ही सुख, सुरक्षा और मंगल का आधार है। अतः दिशाओं के रक्षक देवता, इंद्र आदि प्रमुख देवगण, छह ऋतुएं, सभी मास, वर्ष, रात्रियां, दिन और शुभ मुहूर्त सदैव कल्याणकारी हों। वेद, स्मृतियां और धर्म भी सभी प्रकार से सर्वत्र सबकी रक्षा करें।
बीते दिन सोमवार को प्रधानमंत्री की ओर से 'एक्स' पोस्ट में संस्कृत श्लोक, शीलवान् पूजितो लोके, शीलवान् साधुसम्मतः। शीलवान् सर्वकर्मार्हः, शीलवान् प्रियदर्शनः॥ शेयर किया गया था।
जिसका हिंदी अर्थ है, "सदाचारी मनुष्य समाज में प्रतिष्ठा और सज्जनों का आदर प्राप्त करता है। उत्तम चरित्र से युक्त व्यक्ति अपने सत्यनिष्ठा, विनम्र, और मर्यादित आचरण के कारण प्रत्येक उत्तरदायित्व के योग्य माना जाता है; उसका व्यक्तित्व सभी के लिए आकर्षक और अनुकरणीय होता है। वास्तव में, सफलता, प्रभावी नेतृत्व, और अटूट विश्वास का वास्तविक आधार उत्तम चरित्र ही है।"
इससे पहले पीएम ने 24 जुलाई को भी सोशल मीडिया पर सुभाषित शेयर किया था। उन्होंने श्लोक, "कर्मणा मनसा वाचा यदभीक्ष्णं निषेवते। तदेवापहरत्येनं तस्मात्कल्याणमाचरेत्॥" साझा किया था, जिसका हिंदी अर्थ है- "मनुष्य अपने कर्मों, विचारों और वचनों के द्वारा जिस किसी भी विषय का निरन्तर अभ्यास करता है, वही अन्ततः उसके व्यक्तित्व को ढालकर उसे उसी दिशा में खींच ले जाता है, इसलिए मनुष्य को सदैव अपने चिंतन और संवाद में केवल कल्याणकारी विषयों को ही स्थान देना चाहिए।"


