‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर सियासत तेज, केजरीवाल बोले- ‘हां, मैं हूं दिमागी नक्सल’
अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री के भाषण के अंश को साझा करते हुए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में लिखा, “हां, मैं दिमागी नक्सल हूं।” केजरीवाल ने अपने पोस्ट में युवाओं और नागरिकों से जुड़े कई मुद्दों का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या व्यवस्था से सवाल पूछने वालों को भी इसी श्रेणी में रखा जाएगा।

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द के इस्तेमाल के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। दोनों नेताओं ने सवाल उठाया कि सरकार की नीतियों पर सवाल करना, पेपर लीक जैसे मुद्दों पर आवाज उठाना और जनहित से जुड़े मामलों को उठाना क्या ‘नक्सलवाद’ माना जाएगा?
हाँ। मैं दिमाग़ी नक्सल हूँ। क्योंकि मैं देशभक्त हूँ। और मुझे इस पर गर्व है। pic.twitter.com/ADE3YRfvSJ
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) August 17, 2026
केजरीवाल का पलटवार- ‘हां, मैं दिमागी नक्सल हूं’
अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री के भाषण के अंश को साझा करते हुए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में लिखा, “हां, मैं दिमागी नक्सल हूं।” केजरीवाल ने अपने पोस्ट में युवाओं और नागरिकों से जुड़े कई मुद्दों का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या व्यवस्था से सवाल पूछने वालों को भी इसी श्रेणी में रखा जाएगा। उन्होंने पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाने वाली Gen Z और बेहतर स्कूलों की मांग करने वाले बच्चों का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि क्या अपने अधिकारों और सुविधाओं के लिए आवाज उठाना ‘दिमागी नक्सलवाद’ है। केजरीवाल ने कहा कि देश के युवाओं और नागरिकों को बुनियादी मुद्दों पर सवाल पूछने का अधिकार है।
प्रधानमंत्री ने देश के नौजवानों को ‘दिमागी नक्सल’ कहा। क्या पेपर लीक के खिलाफ आवाज़ उठाने वाली Gen Z ‘दिमागी नक्सल’ है? क्या अपने स्कूलों को ठीक करने की मांग करने वाले छोटे-छोटे बच्चे ‘दिमागी नक्सल’ हैं? या फिर लड़ाई कराने वाली ‘भारतीय झगड़ा पार्टी’ दिमागी नक्सल है? pic.twitter.com/ofV1amVVQZ
— Sanjay Singh AAP (@SanjayAzadSln) August 17, 2026
संजय सिंह ने भी साधा निशाना
AAP सांसद संजय सिंह ने भी प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाने वाले युवा और बेहतर शिक्षा की मांग करने वाले बच्चे ‘दिमागी नक्सल’ हैं, तो फिर इस शब्द की परिभाषा को लेकर सरकार को स्पष्ट करना चाहिए। संजय सिंह ने सरकार पर राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर तंज भी कसा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में वास्तविक समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, भाजपा की ओर से इन आरोपों पर अलग राजनीतिक रुख सामने आया है।
प्रधानमंत्री ने लाल किले से क्या कहा था?
15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि देश में हिंसक और हथियारबंद नक्सलवाद कमजोर हुआ है, लेकिन कुछ लोग विचारों के स्तर पर समाज को भ्रमित करने और देश को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश कर सकते हैं। प्रधानमंत्री ने ऐसे तत्वों को लेकर देशवासियों को सतर्क रहने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें अलग-थलग किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री के बयान में किसी विशेष राजनीतिक दल या नेता का नाम नहीं लिया गया था।
चिदंबरम और महबूबा मुफ्ती भी कर चुके हैं प्रतिक्रिया
इस मुद्दे पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम भी प्रधानमंत्री पर पलटवार कर चुके हैं। उन्होंने ‘दिमागी नक्सली’ कहे जाने को लेकर व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि उन्हें इस संबोधन पर गर्व है। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने भी प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 370 को लेकर अपने रुख का जिक्र करते हुए कहा कि यदि इसके समर्थन की वजह से उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कहा जाता है, तो वह भी इस श्रेणी में आती हैं।
बयान से सोशल मीडिया पर भी नई बहस
प्रधानमंत्री की टिप्पणी के बाद यह विवाद संसद और राजनीतिक मंचों से आगे सोशल मीडिया तक पहुंच गया है। अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर ‘दिमागी नक्सल’, ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ और ‘अर्बन नक्सल जनता पार्टी’ जैसे नामों से अकाउंट और कैंपेन दिखाई देने लगे हैं। सोशल मीडिया पर इन नामों को लेकर राजनीतिक व्यंग्य और विरोध दर्ज कराया जा रहा है। हालांकि, इन अकाउंट्स के पीछे कौन लोग हैं और उनका किसी राजनीतिक संगठन से औपचारिक संबंध है या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।


