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दिल्ली में प्रदूषण पर नजर रखने के लिए 'पवन' प्लेटफॉर्म लॉन्च, भूपेंद्र यादव ने की समीक्षा

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रदूषण रोकने के लिए दिल्ली में 'कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट' (सीएक्यूएम) के नए विकसित 'इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर' (आई3सी) के तकनीकी ढांचे और परिचालन तैयारियों की समीक्षा की।

दिल्ली में प्रदूषण पर नजर रखने के लिए पवन प्लेटफॉर्म लॉन्च, भूपेंद्र यादव ने की समीक्षा
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नई दिल्ली। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शुक्रवार को प्रदूषण रोकने के लिए दिल्ली में 'कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट' (सीएक्यूएम) के नए विकसित 'इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर' (आई3सी) के तकनीकी ढांचे और परिचालन तैयारियों की समीक्षा की।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस केंद्र का नाम 'पवन' (एनसीआर के लिए वायु गुणवत्ता निगरानी और विश्लेषण मंच) रखा गया है।

भूपेंद्र यादव ने कहा, "केवल एक एजेंसी या एक राज्य के अकेले काम करने से साफ हवा नहीं मिल सकती। आई3सी सभी महत्वपूर्ण डेटा को एक ही स्क्रीन पर लाता है, ताकि खेतों में आग लगने, प्रदूषण फैलाने वाली चिमनियों या बिना ढके निर्माण स्थलों का तुरंत पता चल सके, उन्हें चिह्नित किया जा सके और उन पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।"

उन्होंने कहा, "यह प्रदूषण होने पर प्रतिक्रिया देने से हटकर प्रदूषण का पहले से अनुमान लगाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है। अब सभी संबंधित एजेंसियों को इन अलर्ट पर बिना किसी देरी के तुरंत कार्रवाई करनी होगी।"

यादव ने जोर देकर कहा कि क्षेत्रीय वायु प्रदूषण से निपटने में सबसे बड़ी प्राथमिकता सटीक, स्थानीय स्तर का डाटा जुटाना और पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा कि पवन-आई3सी की शुरुआत एक अहम मोड़ है। इससे काम में होने वाली देरी खत्म होगी, डेटा के अलग-अलग बिखरे हुए स्रोतों की समस्या दूर होगी और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी) एक ही सत्यापित स्रोत से जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इससे प्रदूषण फैलाने वालों को कुछ ही मिनटों में जवाबदेह ठहराना संभव होगा।

एक 'सिंगल-विंडो डिजिटल नर्व सेंटर' के रूप में विकसित पवन-आई3सी में 30 से अधिक एपीआई और डेटा स्ट्रीम को जोड़ा गया है। इसमें कई एजेंसियों से प्राप्त वायु गुणवत्ता, उत्सर्जन, मौसम संबंधी जानकारी, सैटेलाइट डेटा, कैमरे, आवागमन, शिकायतों और नियमों के पालन से जुड़ा डेटा शामिल है।

इसमें दिल्ली-एनसीआर में काम कर रहे 111 'कंटीन्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन' (सीएएक्यूएमएस), 2,300 से अधिक उद्योगों, 3,200 से ज्यादा सक्रिय निर्माण स्थलों और ट्रैफिक जाम वाले हॉटस्पॉट का डेटा भी शामिल किया गया है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पवन-आई3सी प्लेटफॉर्म की मदद से नियमों का पालन न करने वाले उद्योगों, प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों और ट्रैफिक जाम वाले हॉटस्पॉट के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी।

उन्होंने बताया कि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एनसीआर क्षेत्र में 5 से 20 नवंबर तक निर्माण और तोड़फोड़ (सीएंडडी) की गतिविधियों पर रोक रहेगी। यादव ने बताया कि पता लगाना, विश्लेषण करना और कार्रवाई करने के सिद्धांत पर काम करते हुए, पवन-आई3सी कई एजेंसियों के डेटा को एक साझा प्लेटफॉर्म पर लाता है।

इसका उद्देश्य प्रदूषण के स्तर का रियल-टाइम और ऐतिहासिक विश्लेषण करना, प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करना, रुझानों और अपनाए गए उपायों की प्रभावशीलता का आकलन करना, और तय मानकों और कार्य योजनाओं के अनुसार फील्ड-स्तर पर नियमों के पालन की निगरानी करना है।


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