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'कांग्रेस के आरोपों में कोई दम नहीं', मानसून सत्र से पहले सत्ता पक्ष ने विपक्ष को घेरा

संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले विपक्ष द्वारा केंद्र सरकार और एनडीए पर क्षेत्रीय दलों को निशाना बनाने और नेताओं को तोड़ने के आरोपों को केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और एसपी सिंह बघेल ने सिरे से खारिज कर दिया

कांग्रेस के आरोपों में कोई दम नहीं, मानसून सत्र से पहले सत्ता पक्ष ने विपक्ष को घेरा
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नई दिल्ली। संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले विपक्ष द्वारा केंद्र सरकार और एनडीए पर क्षेत्रीय दलों को निशाना बनाने और नेताओं को तोड़ने के आरोपों को केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और एसपी सिंह बघेल ने सिरे से खारिज कर दिया। दोनों नेताओं ने कहा कि विपक्ष बेबुनियाद आरोप लगा रहा है और सांसद अपनी इच्छा तथा राजनीतिक विचारधारा के आधार पर फैसले लेते हैं।

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी के दावों में कोई तथ्य नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई किसी नेता या सांसद को नहीं तोड़ता। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के आरोपों में कोई दम नहीं है और न ही कोई तथ्य है। कोई किसी को तोड़ता नहीं है। जो लोग अपनी ही पार्टी में असहज महसूस करते हैं या उससे आक्रांत हो जाते हैं, वे अपनी स्वेच्छा से पार्टी छोड़ते हैं। इसमें किसी तरह का दबाव या तोड़फोड़ नहीं होती।

संसद के मानसून सत्र को लेकर केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल ने कहा कि विपक्ष का रवैया हमेशा नकारात्मक रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष रचनात्मक भूमिका निभाने के बजाय सदन की कार्यवाही बाधित करता है। विपक्ष का काम ही आरोप लगाना है। वे सकारात्मक विरोध नहीं करते, बल्कि नकारात्मक राजनीति करते हैं। पिछले कई सत्रों से मैं देख रहा हूं कि वे सदन चलने नहीं देते। अगर वे सदन को सुचारु रूप से चलने दें, तो अपनी बात पूरे देश और दुनिया के सामने प्रभावी ढंग से रख सकते हैं।

एनडीए पर अन्य दलों के नेताओं को अपने साथ जोड़ने के लिए राजनीतिक दबाव के आरोपों पर एसपी सिंह बघेल ने कहा कि सांसद कोई मासूम बच्चे नहीं होते, बल्कि वे जनता द्वारा चुने गए परिपक्व और समझदार जनप्रतिनिधि हैं। उन्होंने कहा कि सांसद किसी भी पार्टी के हों, वे अपना भला-बुरा समझते हैं। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रीति-नीति, सिद्धांतों और विकास कार्यक्रमों से प्रभावित होकर एनडीए में शामिल हो रहे हैं। इसमें किसी तरह की हॉर्स ट्रेडिंग या दबाव की राजनीति नहीं है। जो लोग अपनी इच्छा से एनडीए का हिस्सा बनना चाहते हैं, उनका स्वागत किया जाता है। किसी को जबरन तोड़ा नहीं जा सकता।


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