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मतदाता सूची के रिवीजन का इंतजार किए बिना नए वोटर करा सकते हैं रजिस्ट्रेशन: चुनाव आयोग

जिस व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में नहीं है या जो जनवरी, अप्रैल, जुलाई या अक्टूबर की पहली तारीख को 18 साल की उम्र पूरी कर चुका है, वह मतदाता सूची के किसी भी तरह के रिवीजन का इंतजार किए बिना वोटर के रूप में अपना रजिस्ट्रेशन करा सकता है।

मतदाता सूची के रिवीजन का इंतजार किए बिना नए वोटर करा सकते हैं रजिस्ट्रेशन: चुनाव आयोग
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नई दिल्ली। जिस व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में नहीं है या जो जनवरी, अप्रैल, जुलाई या अक्टूबर की पहली तारीख को 18 साल की उम्र पूरी कर चुका है, वह मतदाता सूची के किसी भी तरह के रिवीजन का इंतजार किए बिना वोटर के रूप में अपना रजिस्ट्रेशन करा सकता है।

चुनाव आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, तय नियमों के तहत मतदाता सूचियों को नियमित रूप से अपडेट करने की प्रक्रिया में योग्य व्यक्ति अपना नाम जुड़वा सकते हैं।

भारत निर्वाचन आयोग के साथ मतदाता के रूप में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए नियमों के मुताबिक व्यक्ति का भारतीय नागरिक होना जरूरी है। साथ ही उसने निर्धारित तारीख पर 18 साल की उम्र पूरी कर ली हो, वह उस निर्वाचन क्षेत्र या मतदान क्षेत्र का सामान्य निवासी हो जहां अपना नाम दर्ज कराना चाहता है और मतदाता बनने के लिए अयोग्य घोषित न हो।

अधिकारियों के अनुसार, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 14 में किए गए संशोधन को इसी अधिनियम की धारा 19 के साथ पढ़ने पर यह प्रावधान है कि जिस व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में नहीं है या जिसने 18 साल की उम्र पूरी कर ली है, वह मतदाता के रूप में अपना रजिस्ट्रेशन करा सकता है।

अधिकारियों ने कहा कि जरूरी शर्तें पूरी करने वाला व्यक्ति मतदाता सूची के नियमित अपडेट के तहत किसी भी तरह के रिवीजन का इंतजार किए बिना वोटर के रूप में रजिस्ट्रेशन करा सकता है।

यह स्पष्टीकरण उन रिपोर्टों के बीच आया है, जिनमें चिंता जताई गई थी कि मतदाता सूची के वार्षिक रिवीजन में देरी होने से 18 साल की उम्र पूरी कर चुके नए मतदाताओं का नाम समय पर मतदाता सूची में शामिल होने पर असर पड़ सकता है।

यह मुद्दा ऐसे समय में सामने आया है जब चुनाव आयोग के भीतर मतभेद होने का दावा करने वाली रिपोर्टें भी सामने आई हैं।

रिपोर्ट में दावा किया गया था कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद मतदाता सूचियों का वार्षिक विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) दोबारा शुरू नहीं हुआ है। साथ ही कहा गया था कि इस देरी से वोट देने के योग्य हो चुके युवाओं का नाम मतदाता सूची में शामिल होने पर असर पड़ सकता है।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) दोनों जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21(3) के तहत किए जाते हैं और ये वैकल्पिक हैं।

उन्होंने कहा कि एसएसआर और एसआईआर दोनों को एक साथ कराने की कोई कानूनी अनिवार्यता नहीं है।

अधिकारियों ने युवा मतदाताओं, खासकर 18 से 29 साल आयु वर्ग के लोगों को चुनावी प्रक्रिया से जोड़ने के लिए चुनाव आयोग की ओर से किए जा रहे प्रयासों का भी जिक्र किया।

एक जनवरी 2025 तक भारत में युवा मतदाताओं की संख्या बढ़कर 21.7 करोड़ हो गई थी।

अधिकारियों का कहना है कि युवा मतदाताओं की संख्या में यह बढ़ोतरी नई पीढ़ी की चुनावी प्रक्रिया में बढ़ती भागीदारी को दिखाती है।


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