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लोकतंत्र में मीडिया की जिम्मेदारी पहले से अधिक : प्रसून जोशी

नवभारत टाइम्स (एनबीटी) द्वारा सम्मानित किए जाने के बाद प्रसार भारती के चेयरपर्सन प्रसून जोशी ने संस्था के प्रति आभार व्यक्त किया

लोकतंत्र में मीडिया की जिम्मेदारी पहले से अधिक : प्रसून जोशी
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नई दिल्ली। नवभारत टाइम्स (एनबीटी) द्वारा सम्मानित किए जाने के बाद प्रसार भारती के चेयरपर्सन प्रसून जोशी ने संस्था के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने हिंदी भाषा, पत्रकारिता और लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसे वह हिंदी भाषा के प्रति अपने छोटे से योगदान की स्वीकृति के रूप में देखते हैं।

प्रसून जोशी ने कहा कि उनका नवभारत टाइम्स से वर्षों पुराना संबंध रहा है। उन्होंने हिंदी भाषा के विकास और प्रचार-प्रसार में संस्था के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान लंबे समय से हिंदी के लेखकों, साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों को अपनी बात रखने का सशक्त मंच देता रहा है। हम सभी अपनी-अपनी तरह से हिंदी के योद्धा हैं।

प्रसून जोशी ने कहा कि वह फिल्मों, गीतों और अन्य रचनात्मक माध्यमों से हिंदी की सेवा करने का प्रयास करते रहे हैं। भाषा के विकास का कार्य किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास का परिणाम होता है। उनके कार्यों को सराहा जाना उनके लिए उत्साहवर्धक है और वह इस सम्मान के लिए रक्षा मंत्री के भी आभारी हैं, जिनके हाथों उन्हें यह पुरस्कार प्राप्त हुआ। पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर जोशी ने कहा कि रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में बेहद महत्वपूर्ण बात कही। आज समाचारों का प्रसार पूरी तरह लोकतांत्रिक हो चुका है। अब केवल कुछ संस्थानों तक सूचना सीमित नहीं है, बल्कि लगभग हर व्यक्ति के हाथ में कैमरा है और हर कोई किसी भी घटना को समाचार के रूप में प्रस्तुत कर सकता है।

उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा भी आया जब कुछ समाचार चैनलों ने स्वयं को मनोरंजन चैनलों की तरह प्रस्तुत करना शुरू कर दिया। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यह खड़ा हुआ कि वास्तविक और विश्वसनीय समाचार आखिर कौन देगा। आज सूचना और खबरों की बाढ़ के दौर में सबसे बड़ी चुनौती विश्वसनीयता की है। लोगों के सामने अनेक स्रोतों से खबरें पहुंच रही हैं, लेकिन यह तय करना कठिन होता जा रहा है कि किस सूचना पर भरोसा किया जाए। ऐसे समय में पत्रकारिता की जिम्मेदारी पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ गई है।

उन्होंने आगे कहा कि वह स्वयं मीडिया जगत का हिस्सा रहे हैं और इसलिए पत्रकारों के सामने मौजूद चुनौतियों और संघर्षों को अच्छी तरह समझते हैं। पत्रकारिता का दायित्व जितना कठिन हुआ है, उतनी ही उसकी जिम्मेदारी भी बढ़ी है। उन्होंने मीडिया से जुड़े लोगों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि ऐसे समय में धैर्य बनाए रखना, अपने मूल्यों और विश्वास को कायम रखना तथा ईमानदारी के साथ अपने दायित्व का निर्वहन करते रहना ही सबसे महत्वपूर्ण है।


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