तुर्कमान गेट में अवैध निर्माण पर बुलडोजर, पुलिस पर पत्थरबाजी से 5 जवान घायल
पुरानी दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में मंगलवार रात अवैध निर्माण हटाने के दौरान भारी बवाल हो गया

एमसीडी की कार्रवाई के बीच बवाल, 10 लोग हिरासत में, सीसीटीवी से पहचान जारी
- जॉइंट कमिश्नर बोले- न्यूनतम बल प्रयोग से हालात नियंत्रित किए गए
- हाई कोर्ट के आदेश पर 36,400 स्क्वायर फीट क्षेत्र से अतिक्रमण हटाया गया
- 85% अवैध निर्माण गिराया, भारी पुलिस बल और सुरक्षा इंतज़ाम जारी
नई दिल्ली। पुरानी दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में मंगलवार रात अवैध निर्माण हटाने के दौरान भारी बवाल हो गया। एमसीडी की कार्रवाई के बीच उपद्रवियों ने पुलिस पर पत्थरबाजी की, जिसमें पाँच पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाला और अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। अब तक 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है और संदिग्धों की पहचान की जा रही है।
सीसीटीवी से पहचान की कोशिश
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पत्थरबाजों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज और बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग खंगाली जा रही है। एफआईआर दंगा, सरकारी कर्मचारी पर हमला और ड्यूटी में बाधा डालने जैसी धाराओं में दर्ज की गई है। चार से पाँच संदिग्धों की पहचान हो चुकी है, जबकि बाकी की तलाश जारी है।
पुलिस ने हालात संभाले
सेंट्रल रेंज के जॉइंट कमिश्नर मधुर वर्मा ने बताया कि तोड़फोड़ के दौरान कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “स्थिति को सोच-समझकर और न्यूनतम बल प्रयोग के साथ तुरंत नियंत्रित किया गया, ताकि हालात सामान्य हो सकें।”
हाई कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई
डिप्टी कमिश्नर विवेक अग्रवाल ने बताया कि यह मामला लंबे समय से हाई कोर्ट में लंबित था। कोर्ट के आदेश के बाद एमसीडी ने लगभग 36,400 स्क्वायर फीट क्षेत्र में बने अवैध निर्माण को हटाने की कार्रवाई शुरू की। उन्होंने स्पष्ट किया कि मस्जिद की जमीन सुरक्षित है और पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था।
एमसीडी का अभियान जारी
बुधवार सुबह तक एमसीडी के बुलडोजर रात में तोड़े गए ढांचे का मलबा हटाने में लगे रहे। लगभग 85 प्रतिशत अवैध निर्माण हटाया जा चुका है, जबकि एक छोटा हिस्सा मलबे की वजह से फिलहाल बचा हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि मलबा हटते ही शेष संरचना भी गिरा दी जाएगी।
सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम
कार्रवाई के दौरान इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा। पूरे क्षेत्र को नौ जोन में बाँटा गया था, जिनकी निगरानी एडिशनल डीसीपी स्तर के अधिकारियों ने की। अमन कमेटी और स्थानीय हितधारकों के साथ पहले ही कई बैठकें की गई थीं ताकि शांति बनाए रखी जा सके।


