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मनीष सिसोदिया का भाजपा पर हमला, सीबीआई के जरिए भाजपा में शामिल होने का दबाव बनाया गया

मनीष सिसोदिया ने प्रेस वार्ता में कहा, “हमारी असली कमाई कट्टर ईमानदारी है। जनता को हमारे ऊपर पूरा विश्वास है। भाजपा नेतृत्व ने ईडी और सीबीआई के माध्यम से भ्रष्टाचार की झूठी कहानी लिखवाई थी, जो अदालत में फुस्स हो गई।”

मनीष सिसोदिया का भाजपा पर हमला, सीबीआई के जरिए भाजपा में शामिल होने का दबाव बनाया गया
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नई दिल्लीः Delhi Excise Policy: दिल्ली के कथित आबकारी (शराब) नीति मामले में अदालत से आरोपमुक्त होने के बाद आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता और पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई के माध्यम से उन पर भाजपा में शामिल होने का दबाव बनाया गया। सिसोदिया ने कहा कि न केवल उन्हें, बल्कि उनके परिवार को भी इस दौरान मानसिक और सामाजिक रूप से परेशान किया गया। राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा हाल ही में इस मामले में सभी आरोपियों को बरी किए जाने के बाद आप नेतृत्व इसे “सत्य की जीत” बता रहा है। वहीं भाजपा ने फैसले पर सवाल उठाते हुए आगे कानूनी विकल्पों की बात कही है।

“कट्टर ईमानदारी ही हमारी असली कमाई”

मनीष सिसोदिया ने प्रेस वार्ता में कहा, “हमारी असली कमाई कट्टर ईमानदारी है। जनता को हमारे ऊपर पूरा विश्वास है। भाजपा नेतृत्व ने ईडी और सीबीआई के माध्यम से भ्रष्टाचार की झूठी कहानी लिखवाई थी, जो अदालत में फुस्स हो गई।” उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले तीन वर्षों से वे और उनका परिवार भारी मानसिक दबाव में रहे। “हम घुट-घुट कर जी रहे थे। 27 फरवरी का दिन मेरे लिए बहुत भारी रहा है। 26 फरवरी 2023 को मुझे गिरफ्तार किया गया और अगले दिन अदालत में खड़ा किया गया। मुझे घोटालेबाज और षड्यंत्रकारी कहा गया,” उन्होंने कहा।

परिवार पर पड़ा असर

सिसोदिया ने भावुक होते हुए कहा कि उनके परिवार ने इस पूरे प्रकरण में काफी कष्ट झेला। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी लंबे समय से बीमार थीं और उनका बेटा हॉस्टल में अकेले बैठकर रोता था। उन्होंने कहा, “मैं सोचता था कि लोग मुझे शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले एक ईमानदार नेता के रूप में जानेंगे, लेकिन मुझे ऐसे शब्द सुनने पड़े। आप नेताओं का कहना है कि अदालत का फैसला उनके नेताओं की छवि को बहाल करता है और यह साबित करता है कि आरोप राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित थे।

आबकारी नीति विवाद: कब, क्या हुआ?

दिल्ली की नई आबकारी नीति को लेकर विवाद जुलाई 2021 में शुरू हुआ, जब दिल्ली सरकार ने इसे लागू किया। सरकार का दावा था कि इससे शराब की रिटेल बिक्री को आधुनिक बनाया जाएगा और राजस्व बढ़ेगा।

घटनाक्रम की प्रमुख तारीखें:

जुलाई 2021: दिल्ली सरकार ने नई आबकारी नीति पेश की।

जुलाई 2022: दिल्ली के मुख्य सचिव ने नीति निर्माण और लागू करने में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट उपराज्यपाल को भेजी और सीबीआई जांच की सिफारिश की।

अगस्त 2022: सीबीआई ने मनीष सिसोदिया सहित अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की और कई स्थानों पर छापेमारी की।

सितंबर 2022: बढ़ते विवाद के बीच दिल्ली सरकार ने नई नीति वापस ले ली और पुरानी व्यवस्था लागू कर दी।

फरवरी 2023: पूछताछ के बाद सीबीआई ने सिसोदिया को गिरफ्तार किया।

मार्च 2024: ईडी के नौ समन के बाद भी पेश न होने पर अरविंद केजरीवाल को उनके आवास से गिरफ्तार किया गया।

अगस्त 2024: सुप्रीम कोर्ट ने 17 महीने की हिरासत के बाद सिसोदिया को जमानत दी।

सितंबर 2024: सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद केजरीवाल जेल से बाहर आए।

जेल में बिताए दिन

इस पूरे मामले में आप के शीर्ष नेतृत्व को लंबी कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ा।
अरविंद केजरीवाल: दो अलग-अलग चरणों में कुल लगभग 156 दिन जेल में रहे।
मनीष सिसोदिया: करीब 530 दिन हिरासत में रहे।

आप का दावा है कि इतने लंबे समय तक हिरासत के बावजूद आरोप सिद्ध नहीं हो सके, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मामला कमजोर था।

भाजपा की प्रतिक्रिया

भाजपा ने अदालत के फैसले को अंतिम नहीं मानते हुए कहा है कि कानूनी प्रक्रिया अभी समाप्त नहीं हुई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि वे आदेश का अध्ययन करेंगे और आवश्यक होने पर आगे की कार्रवाई करेंगे। भाजपा ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि नीति में कोई गड़बड़ी नहीं थी, तो उसे वापस क्यों लिया गया। पार्टी का कहना है कि कई निर्णयों ने गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं और मामले की जांच व्यापक स्तर पर हुई है।

राजनीतिक असर

विश्लेषकों का मानना है कि अदालत से मिली राहत आप के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, खासकर ऐसे समय में जब पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। वहीं भाजपा इस मुद्दे को पूरी तरह समाप्त मानने को तैयार नहीं दिख रही। यह मामला दिल्ली की राजनीति में पिछले तीन वर्षों से केंद्रीय मुद्दा बना हुआ था। गिरफ्तारी, जमानत और अब आरोपमुक्ति इन सभी चरणों ने राजनीतिक विमर्श को प्रभावित किया है।

नैतिक और कानूनी जीत


हालांकि निचली अदालत से आरोपमुक्ति मिल गई है, लेकिन यदि जांच एजेंसियां उच्च अदालत में अपील करती हैं, तो मामला फिर न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ सकता है। फिलहाल आप नेतृत्व इसे नैतिक और कानूनी जीत के रूप में पेश कर रहा है।

फैसले की गूंज


मनीष सिसोदिया का कहना है कि अदालत का फैसला उनके और पार्टी के लिए “कट्टर ईमानदारी” का प्रमाण है। वहीं भाजपा ने फैसले पर सवाल उठाते हुए कानूनी प्रक्रिया जारी रहने की बात कही है। दिल्ली की राजनीति में यह मामला लंबे समय तक चर्चा में रहा है और आगे भी इसकी गूंज बनी रह सकती है। फिलहाल अदालत के आदेश ने आप नेतृत्व को बड़ी राहत जरूर दी है, लेकिन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा।


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