खरगे का मोदी सरकार पर हमला, बोले- ‘लोकतंत्र की जननी’ को बना दिया ‘दबा हुआ लोकतंत्र’
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा कर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को हिरासत में लेकर लोकतांत्रिक विरोध को रोकने की कोशिश की जा रही है।

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने भारत को ‘लोकतंत्र की जननी’ कहने के बावजूद लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का काम किया है। उन्होंने दिल्ली पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार से सवाल पूछने वाले युवाओं, छात्रों, पत्रकारों, वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है। खरगे की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आह्वान पर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए पहुंचने की कोशिश कर रहे लोगों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की। पुलिस ने सुरक्षा कारणों और प्रक्रियात्मक जरूरतों का हवाला देते हुए प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद प्रदर्शन स्थल की ओर बढ़ रहे कई लोगों को हिरासत में लिया गया।
‘भाजपा-आरएसएस की कायरता सामने आ गई’
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा कर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को हिरासत में लेकर लोकतांत्रिक विरोध को रोकने की कोशिश की जा रही है। खरगे ने कहा कि युवाओं, छात्रों, वकीलों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, किसान संगठनों के नेताओं, यूट्यूबर्स और कंटेंट क्रिएटर्स को निशाना बनाए जाने की खबरें चिंताजनक हैं। उनके मुताबिक, सरकार से सवाल पूछना किसी अपराध की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने ‘लोकतंत्र की जननी’ की पहचान रखने वाले भारत में लोकतांत्रिक अधिकारों के इस्तेमाल को कठिन बना दिया है। खरगे ने कहा कि हिरासत, गिरफ्तारी, जेल और पुलिस की सख्ती लोगों को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने से नहीं रोक सकती।
‘आजादी की लड़ाई में युवाओं की रही अहम भूमिका’
खरगे ने अपने बयान में स्वतंत्रता आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के युवाओं ने भारत की आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि आज भी युवा देश के भविष्य और लोकतंत्र की दिशा तय करने में अहम योगदान दे रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष के मुताबिक, लोकतंत्र में सरकार की जवाबदेही तय करना और संवैधानिक संस्थाओं से सवाल पूछना नागरिकों का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा कार्रवाई से असहमति जताने वाले लोगों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। खरगे ने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी एकजुट विपक्ष के साथ मिलकर सरकार की नीतियों का विरोध करती रहेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया है और पार्टी लोकतंत्र, संविधान तथा प्रत्येक भारतीय के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगी।
दिल्ली में 1500 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने का दावा
जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शनिवार को 1500 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जब वे मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए प्रदर्शन स्थल की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। सूत्रों के मुताबिक, नई दिल्ली क्षेत्र में पुलिस ने निगरानी बढ़ाई और प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल किया। प्रमुख सड़कों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई तथा बैरिकेडिंग के जरिए लोगों की आवाजाही नियंत्रित की गई। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने के पीछे सुरक्षा संबंधी चिंताओं और प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं का हवाला दिया है। हालांकि, पुलिस की कार्रवाई और विरोध के अधिकार को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं।
मतदाता सूची और फॉर्म-6 को लेकर विरोध
CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान मतदाता सूची में कथित हेरफेर और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर किया था। प्रदर्शन से जुड़े आरोपों में मतदाता सूची के संशोधन और नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में बदलाव का मुद्दा भी शामिल है। विरोध करने वालों का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जानी चाहिए। दूसरी ओर, प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने और हिरासत की कार्रवाई ने राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया है। इस घटनाक्रम के बाद केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच लोकतांत्रिक अधिकारों, चुनाव आयोग की जवाबदेही तथा शांतिपूर्ण प्रदर्शन की स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज हो गई है।


