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कंगना रनौत और CJP प्रवक्ता सौरव दास के बीच जुबानी जंग तेज, सोशल मीडिया पर एक-दूसरे पर साधे निशाने

एक समाचार एजेंसी से बातचीत में CJP प्रवक्ता सौरव दास ने कंगना रनौत की छात्र आंदोलन को लेकर की गई टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनकी नजर में कंगना की बातों को उनकी अपनी पार्टी के लोग भी गंभीरता से नहीं लेते।

कंगना रनौत और CJP प्रवक्ता सौरव दास के बीच जुबानी जंग तेज, सोशल मीडिया पर एक-दूसरे पर साधे निशाने
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नई दिल्ली: पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्र आंदोलन और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को लेकर जारी बहस अब व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गई है। भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत तथा CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास के बीच सोशल मीडिया और मीडिया इंटरव्यू के जरिए तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे की टिप्पणी का जवाब देते हुए व्यक्तिगत और राजनीतिक स्तर पर सवाल उठाए हैं।

सौरव दास ने कहा- कंगना को उनकी पार्टी भी गंभीरता से नहीं लेती

एक समाचार एजेंसी से बातचीत में CJP प्रवक्ता सौरव दास ने कंगना रनौत की छात्र आंदोलन को लेकर की गई टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनकी नजर में कंगना की बातों को उनकी अपनी पार्टी के लोग भी गंभीरता से नहीं लेते। सौरव दास ने कहा कि नई पीढ़ी यानी Gen-Z और Gen Alpha के बीच भी कंगना की बातों का विशेष प्रभाव नहीं है। उन्होंने दावा किया कि छात्र आंदोलन ने लोकतंत्र में युवाओं के भरोसे को मजबूत किया है और यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण तथा लोकतांत्रिक तरीके से चलाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं को अपने शब्दों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए और पद की गरिमा बनाए रखनी चाहिए। उनके अनुसार किसी भी जनप्रतिनिधि की भाषा संयमित और जिम्मेदार होनी चाहिए।

सांसद बनने को लेकर पुराने बयान का भी किया जिक्र

सौरव दास ने अपने बयान में कंगना रनौत के उस पुराने वीडियो का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने सांसद बनने के बाद काम के दबाव का जिक्र किया था। दास ने कहा कि उस बयान से यह स्पष्ट होता है कि राजनीति को लेकर उनकी समझ और तैयारी पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी देश और लोकतंत्र के लिए सक्रिय भूमिका निभा रही है और उसे कमतर आंकना उचित नहीं है।




कंगना रनौत ने सौरव को बताया 'बेकार और बेरोजगार'

सौरव दास की टिप्पणी सामने आने के बाद कंगना रनौत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि उन्होंने इंटरनेट पर सौरव दास के बारे में जानकारी देखी और सवाल उठाया कि 28 वर्ष की उम्र में वह खुद को छात्र कैसे बताते हैं। कंगना ने लिखा कि जब वह उसी उम्र में थीं, तब तक उन्हें दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुके थे और वे सार्वजनिक जीवन में दो दशक से सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति में वह नई जरूर हैं, लेकिन फिल्म निर्माता, अभिनेत्री, लेखक, निर्माता और उद्यमी के रूप में लंबे समय से काम कर रही हैं। अपने पोस्ट में कंगना ने कहा कि जो व्यक्ति किसी पेशेवर जिम्मेदारी में नहीं होता, वह काम के दबाव को नहीं समझ सकता। उन्होंने सौरव दास को "बेकार और बेरोजगार" बताते हुए सलाह दी कि उन्हें पहले कोई कौशल सीखना चाहिए।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद बढ़ा राजनीतिक टकराव

धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के बाद से CJP और छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती गई है। कंगना रनौत कई बार सोशल मीडिया पर आंदोलन की आलोचना कर चुकी हैं। उन्होंने हाल ही में प्रदर्शनकारियों के व्यवहार और सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे वीडियो को लेकर भी सवाल उठाए थे। कंगना का कहना था कि यदि कोई सार्वजनिक मंच पर सरकार और नेतृत्व की आलोचना करता है, तो उसे जनता की प्रतिक्रिया सुनने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ जवाबदेही की भी बात कही थी।

CJP ने आंदोलन को बताया युवाओं की लोकतांत्रिक आवाज

दूसरी ओर, CJP लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक रोकने और छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए था। संगठन का कहना है कि उसके प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहे और देशभर के युवाओं ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाई। सौरव दास ने भी दोहराया कि नई पीढ़ी पारंपरिक राजनीति से अलग तरीके से अपनी बात रखती है और उसे उसी नजरिए से समझने की जरूरत है। उनके अनुसार युवाओं की आवाज को व्यक्तिगत हमलों या राजनीतिक पूर्वाग्रह के आधार पर खारिज नहीं किया जाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

कंगना रनौत और सौरव दास के बीच यह जुबानी जंग अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है। दोनों पक्षों के समर्थक अपने-अपने नेताओं के समर्थन में लगातार पोस्ट साझा कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छात्र आंदोलन के बाद उभरे इस विवाद ने शिक्षा, राजनीति और सोशल मीडिया की बहस को एक नया आयाम दे दिया है। फिलहाल दोनों नेताओं के बयान सार्वजनिक मंचों पर चर्चा का विषय बने हुए हैं और इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला जारी है।


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