Top
Begin typing your search above and press return to search.

JNU में 17 दिन बाद खत्म हुई छात्रों की भूख हड़ताल, पांच छात्रों का निष्कासन रद्द; FIR वापसी पर बनी सहमति

छात्रों की प्रमुख मांगों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान दर्ज एफआईआर वापस लेना और शुरू की गई प्रॉक्टरियल जांच समाप्त करना शामिल था। समझौते के अनुसार, इन मामलों में कार्रवाई वापस लेने पर सहमति बनी है।

JNU में 17 दिन बाद खत्म हुई छात्रों की भूख हड़ताल, पांच छात्रों का निष्कासन रद्द; FIR वापसी पर बनी सहमति
X

नई दिल्ली: दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में पिछले 17 दिनों से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों ने आखिरकार भूख हड़ताल समाप्त कर दी है। छात्र संघ और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच हुई बातचीत में कई अहम मुद्दों पर सहमति बनने के बाद यह फैसला लिया गया। समझौते के तहत पांच छात्रों का निष्कासन रद्द कर दिया गया है। इसके अलावा, विरोध प्रदर्शनों के दौरान छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने, प्रॉक्टरियल जांच समाप्त करने और विश्वविद्यालय के विवादित नियमों की समीक्षा करने जैसे मुद्दों पर भी सहमति बनी है। हालांकि, छात्र संघ ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन समाप्त होने का मतलब संघर्ष खत्म होना नहीं है। जब तक प्रशासन अपने सभी आश्वासनों को लागू नहीं करता, तब तक वह मांगों की पूर्ति पर नजर रखेगा।

पांच छात्रों का निष्कासन तत्काल प्रभाव से रद्द

विश्वविद्यालय प्रशासन ने 19 अक्टूबर को जारी एक अलग नोटिस में बताया कि कुलपति शांतिश्री धूलिपुडी पंडित के निर्देश पर पांच छात्रों का निष्कासन तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। इनमें अदिति मिश्रा, के गोतिका बाबू, सुनील यादव, दानिश अली और नीतीश कुमार शामिल हैं। इनमें से चार छात्र वर्तमान जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के पदाधिकारी हैं, जबकि नीतीश कुमार पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष रह चुके हैं। प्रशासन ने संबंधित छात्रों को उन पर लगाए गए जुर्माने का भुगतान करने की सलाह भी दी है। वहीं, छात्र प्रतिनिधियों और स्कूल ऑफ सोशल साइंस के डीन विवेक कुमार के बीच हुए समझौते में कई अन्य मांगों पर भी आगे की कार्रवाई का भरोसा दिया गया है।

एफआईआर और प्रॉक्टरियल जांच वापस लेने पर सहमति

छात्रों की प्रमुख मांगों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान दर्ज एफआईआर वापस लेना और शुरू की गई प्रॉक्टरियल जांच समाप्त करना शामिल था। समझौते के अनुसार, इन मामलों में कार्रवाई वापस लेने पर सहमति बनी है। इसके अलावा, चीफ प्रॉक्टर ऑफिस (सीपीओ) के मैनुअल में शामिल विवादित नियमों की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की जाएगी। इस समिति में छात्र संघ का प्रतिनिधि भी शामिल होगा। जेएनयू प्रवेश परीक्षा (जेएनयूईई) से संबंधित मुद्दों की जांच के लिए भी समिति बनाने का निर्णय लिया गया है। छात्रों ने इन फैसलों को अपने आंदोलन की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। हालांकि, इन आश्वासनों को व्यवहार में लागू करना अब विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए अहम होगा।

छात्रवृत्ति और छात्रावास सुविधाओं पर भी आश्वासन

समझौते में छात्रों की शैक्षणिक और बुनियादी जरूरतों से जुड़े मुद्दों को भी शामिल किया गया है। प्रशासन ने मेरिट-कम-मीन्स (एमसीएम) छात्रवृत्ति में 25 प्रतिशत बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर विचार करने की सहमति दी है। सिद्धांत फाउंडेशन के पाठ्यक्रमों को बंद करने के प्रस्ताव पर संबंधित समिति सक्षम प्राधिकारी को अनुकूल सिफारिश देगी। समान अवसर कार्यालय (ईओसी) की ऑडिट रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराने और छात्र संघ से परामर्श के बाद कार्यालय के पुनर्गठन पर भी सहमति बनी है। छात्रावास आवंटन में आरक्षण से जुड़ी शिकायतों की जांच के लिए समिति गठित की जाएगी। बुनियादी सुविधाओं के तहत सभी छात्रावासों में दो सप्ताह के भीतर गीजर चालू करने का आश्वासन दिया गया है। ताप्ती और माही-मांडवी छात्रावासों के साथ ट्रांसजेंडर एवं जेंडर इक्वैलिटी फैसिलिटेशन एरिया का संरचनात्मक ऑडिट कराकर मरम्मत कार्य कराने की बात भी कही गई है। टेफलास का संरचनात्मक ऑडिट, सीएसएलजी कैंटीन दोबारा खोलने और बराक छात्रावास में मेस तथा वाई-फाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए समिति बनाने का आश्वासन दिया गया है। स्कूलों के पुस्तकालय रात नौ बजे तक खुले रखने पर भी सहमति बनी है।

सभी वादे पूरे होने तक जारी रहेगी निगरानी

भूख हड़ताल समाप्त होने के बाद जेएनयूएसयू ने बयान जारी कर कहा कि छात्रों की एकजुटता ने प्रशासन को न्यायसंगत, समतावादी और सभी के लिए सुलभ परिसर की मांगों पर गंभीरता से विचार करने के लिए मजबूर किया है। छात्र संघ ने चेतावनी दी कि प्रशासन के आश्वासनों को केवल बैठकों और कागजी वादों तक सीमित नहीं रहने दिया जाएगा। छात्र संघ के मुताबिक, मांगों पर हुई प्रगति की समीक्षा और समझौते को लागू करने के तौर-तरीकों पर चर्चा के लिए 14 दिन बाद प्रशासन के साथ दोबारा बैठक होगी। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि विश्वविद्यालय प्रशासन तय समयसीमा में कितनी मांगों को पूरा करता है।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it