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जेएनयू में ‘लांग मार्च’ निकालने को लेकर हंगामा: छात्रों और पुलिस में झड़प, 25 से अधिक हिरासत में

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में गुरुवार को उस समय तनाव बढ़ गया जब छात्रसंघ ने कुलगुरु (वाइसचांसलर )के खिलाफ विश्वविद्यालय परिसर से शिक्षा मंत्रालय तक ‘लांग मार्च’ निकालने की घोषणा की।

जेएनयू में ‘लांग मार्च’ निकालने को लेकर हंगामा: छात्रों और पुलिस में झड़प, 25 से अधिक हिरासत में
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नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में गुरुवार को उस समय तनाव बढ़ गया जब छात्रसंघ ने कुलगुरु (वाइसचांसलर ) के खिलाफ विश्वविद्यालय परिसर से शिक्षा मंत्रालय तक ‘लांग मार्च’ निकालने की घोषणा की। विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर के बाहर प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने की जानकारी दी थी और मार्च को कैंपस तक सीमित रखने को कहा था। इसके बावजूद जब छात्र मुख्य द्वार से बाहर निकलने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद छात्रों और पुलिस के बीच झड़प की स्थिति बन गई। घटनाक्रम के दौरान करीब 25 छात्रों को हिरासत में लिया गया है। वहीं पुलिस का दावा है कि कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। शुक्रवार सुबह पुलिस ने इन पकड़े गए छात्रों को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया, जहां अदालत ने सभी आरोपी छात्रों को 25000 रुपये के बेल बांड पर जमानत दे दी।

मुख्य द्वार पर टकराव

दक्षिण-पश्चिमी जिला पुलिस उपायुक्त अमित गोयल के अनुसार, गुरुवार दोपहर लगभग 3:20 बजे करीब 500 छात्र मुख्य द्वार से बाहर निकलकर शिक्षा मंत्रालय की ओर मार्च करने लगे। चूंकि इसके लिए अनुमति नहीं थी, इसलिए पुलिस ने गेट पर बैरिकेड लगाकर छात्रों को रोका। छात्रसंघ अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष गोपिका के बाबू, महासचिव सुनील यादव, संयुक्त सचिव दानिश अली और पूर्व अध्यक्ष नितीश कुमार अपने समर्थकों के साथ बैरिकेड हटाकर आगे बढ़ने का प्रयास करने लगे। पुलिस के अनुसार, इसी दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और झड़प शुरू हो गई। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स को नुकसान पहुंचाया और कुछ छात्रों ने सुरक्षा बलों पर बैनर, डंडे और जूते फेंके। आरोप है कि धक्का-मुक्की के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों को काटने तक की घटनाएं हुईं।

पुलिसकर्मियों के घायल होने का दावा

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, एसएचओ किशनगढ़ समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जिन्हें उपचार के लिए सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। हिरासत में लिए गए छात्रों की संख्या 50 के आसपास बताई जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति बाहरी मार्च निकालना नियमों का उल्लंघन है।

छात्रों का आरोप: “शांतिपूर्ण मार्च पर बल प्रयोग”

छात्रसंघ अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि छात्र शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे थे, लेकिन बिना वर्दी में मौजूद लोगों ने उन्हें घसीटकर हिरासत में लिया। छात्र नेताओं का दावा है कि सैकड़ों पुलिसकर्मी पहले से ही परिसर के बाहर तैनात थे और छात्रों को बाहर निकलने से रोका गया। झड़प के दौरान एक छात्र के हाथ में चोट लगने और हिरासत के दौरान एक छात्रा के पुलिस बस में बेहोश होने की बात भी सामने आई है। छात्रों का कहना है कि उनका उद्देश्य शिक्षा मंत्रालय तक अपनी मांगें पहुंचाना था और वे किसी प्रकार की हिंसा नहीं चाहते थे।

कुलगुरु के बयान के विरोध में प्रदर्शन

यह मार्च विश्वविद्यालय की कुलगुरु शांतिश्री डी. पंडित के कथित जातिसूचक बयान के विरोध में आयोजित किया गया था। छात्रसंघ का आरोप है कि कुलगुरु के बयान से विश्वविद्यालय के समावेशी वातावरण को ठेस पहुंची है। छात्र नेताओं का कहना है कि वे शिक्षा मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग करना चाहते थे। उनका आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी बात सुनने के बजाय दमनात्मक रवैया अपना रहा है।

विश्वविद्यालय प्रशासन की सफाई

जेएनयू प्रशासन ने बयान जारी कर कहा है कि छात्रसंघ द्वारा यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नियम लागू करने की मांग वर्तमान परिस्थितियों में उचित नहीं है। प्रशासन के अनुसार, इन नियमों पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्थगन आदेश दे चुका है, इसलिए कुलपति या रजिस्ट्रार के पास उन्हें लागू करने का अधिकार नहीं है। प्रशासन ने यह भी कहा कि हाल में जिन छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की गई, उसका कारण परिसर में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और हिंसा की घटनाएं हैं। इन मामलों की जांच प्राक्टोरियल प्रक्रिया के तहत की गई है। बयान में यह भी कहा गया कि हिंसा और तोड़फोड़ के मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए एक महिला ओबीसी कुलगुरु पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं, जो “अत्यंत निंदनीय” है।

कैंपस में बढ़ती राजनीतिक सक्रियता

जेएनयू लंबे समय से छात्र राजनीति और आंदोलनों का केंद्र रहा है। हाल के वर्षों में विभिन्न मुद्दों को लेकर विश्वविद्यालय में कई बार विरोध प्रदर्शन हुए हैं। इस बार का विवाद प्रशासनिक निर्णयों, यूजीसी नियमों और कुलगुरु के कथित बयान को लेकर है। विशेषज्ञों का मानना है कि विश्वविद्यालय परिसरों में संवाद और पारदर्शिता की कमी से ऐसे टकराव की स्थितियां उत्पन्न होती हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच समय रहते बातचीत हो, तो तनाव कम किया जा सकता है।

पुलिस की तैनाती बढ़ी

फिलहाल कैंपस और आसपास के इलाकों में पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई है। हिरासत में लिए गए छात्रों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई पर निर्णय लिया जा रहा है। दूसरी ओर छात्रसंघ ने संकेत दिया है कि वे अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखेंगे। प्रशासन ने भी स्पष्ट किया है कि नियमों और अदालत के आदेशों के तहत ही निर्णय लिए जाएंगे। जेएनयू में हुआ यह घटनाक्रम एक बार फिर विश्वविद्यालय परिसरों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्रशासनिक अधिकार और कानून-व्यवस्था के संतुलन पर बहस को सामने ले आया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों पक्ष बातचीत के जरिए समाधान निकालते हैं या टकराव और गहराता है।


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