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गगनयान की तैयारी में इसरो का बड़ा कदम: सफल हुआ श्रीहरिकोटा में इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट का परीक्षण

स्पेस एजेंसी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन की तैयारियों के तहत दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (आईएडीटी-02) शुक्रवार को सफलतापूर्वक आयोजित किया

गगनयान की तैयारी में इसरो का बड़ा कदम: सफल हुआ श्रीहरिकोटा में इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट का परीक्षण
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नई दिल्ली। स्पेस एजेंसी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन की तैयारियों के तहत दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (आईएडीटी-02) शुक्रवार को सफलतापूर्वक आयोजित किया। यह टेस्ट आंध्र प्रदेश के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा में किया गया।

भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो के अनुसार, इस टेस्ट में लगभग 5.7 टन वजन वाले एक नकली क्रू मॉड्यूल को भारतीय वायु सेना के चिनूक हेलीकॉप्टर द्वारा करीब 3 किलोमीटर की ऊंचाई तक उठाया गया। इसके बाद श्रीहरिकोटा तट के पास समुद्र में तय ड्रॉप जोन के ऊपर इसे छोड़ दिया गया। यह नकली मॉड्यूल पहले बिना क्रू वाले गगनयान मिशन (जी1) के क्रू मॉड्यूल के वजन के बराबर है।

मॉड्यूल के नीचे उतरते समय चार अलग-अलग प्रकार के कुल दस पैराशूट एक सटीक क्रम में खोले गए। इससे मॉड्यूल की गति धीरे-धीरे कम हुई और सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित हुई। टेस्ट के बाद भारतीय नौसेना की मदद से इस नकली क्रू मॉड्यूल को समुद्र से सफलतापूर्वक बरामद कर लिया गया। यह टेस्ट मुख्य रूप से क्रू मॉड्यूल में लगे पैराशूट आधारित गति कम करने वाले सिस्टम की कार्यक्षमता को जांचने के लिए किया गया था।

आईएडीटी-02 ने इस सिस्टम की विश्वसनीयता को प्रमाणित किया है, जो अंतरिक्ष यात्री की सुरक्षित वापसी के लिए बहुत जरूरी है। गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन है, जिसमें तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजा जाएगा। इस मिशन की तैयारी में आईएडीटी-02 महत्वपूर्ण है। गगनयान मिशन 2027 में लॉन्च होने वाला है।

टेस्ट में भारतीय वायुसेना, भारतीय नौसेना और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन का सक्रिय सहयोग रहा। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस सफलता पर इसरो को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह टेस्ट अगले साल प्रस्तावित गगनयान मिशन की तैयारियों को मजबूत करता है।

पहला इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट अगस्त 2025 में किया गया था। ये टेस्ट गगनयान के क्रू मॉड्यूल की री-एंट्री और समुद्र में सुरक्षित लैंडिंग की प्रक्रिया को परखते हैं। इसरो के अनुसार, ऐसे टेस्ट अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करते हैं। गगनयान मिशन में पैराशूट सिस्टम क्रू मॉड्यूल को पृथ्वी पर वापस लाने का अहम हिस्सा है।


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