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इंडस्ट्री को स्किल की वैल्यू करनी होगी, सर्टिफाइड लोगों को अधिक वेतन देना चाहिए : जयंत चौधरी

कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने कहा कि इंडस्ट्री को स्किल डेवलपमेंट की वैल्यू करनी होगी, साथ ही सर्टिफाइड लोगों को अधिक वेतन देना चाहिए

इंडस्ट्री को स्किल की वैल्यू करनी होगी, सर्टिफाइड लोगों को अधिक वेतन देना चाहिए : जयंत चौधरी
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नई दिल्ली। कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने शुक्रवार को कहा कि इंडस्ट्री को स्किल डेवलपमेंट की वैल्यू करनी होगी, साथ ही सर्टिफाइड लोगों को अधिक वेतन देना चाहिए।

राष्ट्रीय राजधानी में फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के एक कार्यक्रम में बोलते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा, "मेरा मानना है कि वर्तमान में हमारे पास रोजगार और कौशल विकास के लिए कोई वास्तविक मूल्य नहीं है, लेकिन हमें यह समझना होगा कि सर्टिफाइड लोगों को अधिक वेतन देने की आवश्यकता है और इसके लिए उद्योग जगत को कौशल विकास को महत्व देना होगा।"

उन्होंने आगे कहा कि भविष्य के स्किल, नई टेक्नोलॉजी और व्यवधान सभी यहां है और हमें इसके लिए तैयार रहने की आवश्यकता है।

राज्यसभा सांसद और केंद्रीय शिक्षुता परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कि इस कार्यक्रम में फोकस था कि कैसे देश के डेमोग्राफिक डेटा को डिविडेंड में कैसे बदले हैं, हमारे देश की 62 प्रतिशत आबादी 15-35 की आयु वर्ग की है।

उन्होंने आगे कहा कि इन बड़ी आबादी को केवल स्किल सिखाना ही नहीं, बल्कि उसको रोजगार देना भी आवश्यक है। इसके लिए इंडस्ट्री और एकेडमी के साझेदारी होना आवश्यक है।

हाल ही में केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने एक लिखित उत्तर में बताया था कि पिछले 10 वर्षों में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के तहत 1.6 करोड़ से ज्यादा लोगों को ट्रेनिंग दी गई है, जिनमें से 1.29 करोड़ को (30 जून तक) सर्टिफिकेट भी दिया जा चुका है। साथ ही, राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के अन्य कार्यक्रमों के तहत लगभग 1.74 करोड़ उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया गया है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, "एनएसडीसी ने पुरस्कार देने वाली संस्थाओं के माध्यम से 2.32 लाख से ज्यादा प्रशिक्षकों को प्रमाणन प्रदान किया है। प्रशिक्षक-से-लाभार्थी अनुपात प्रशिक्षण के प्रकार, बैच के आकार, क्षेत्र के मानदंडों और भौगोलिक स्थिति के आधार पर भिन्न होता है।"

पीएमकेवीवाई के कार्यान्वयन के लिए, एमएसडीई ने वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 1,538.29 करोड़ रुपए जारी किए हैं।


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