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भारत और जापान ने चीन की आक्रामक गतिविधियों पर जताई चिंता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने पूर्वी और दक्षिण चीन सागर की स्थिति को लेकर गहरी चिंता जताई।

भारत और जापान ने चीन की आक्रामक गतिविधियों पर जताई चिंता
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने गुरुवार को पूर्वी और दक्षिण चीन सागर की स्थिति को लेकर गहरी चिंता जताई।

नई दिल्ली में हुई बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों नेताओं ने कहा कि वे ऐसे किसी भी एकतरफा कदम का कड़ा विरोध करते हैं जो समुद्री और हवाई आवाजाही की सुरक्षा और आजादी को खतरे में डालता हो या फिर ताकत या दबाव के जरिए मौजूदा स्थिति बदलने की कोशिश करता हो।

बयान में कहा गया, "दोनों नेताओं ने विवादित इलाकों में बढ़ते सैन्यीकरण पर भी गंभीर चिंता जताई। समुद्री विवादों का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार होना चाहिए, जैसा कि यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी (यूएनसीएलओएस) में तय किया गया है।"

दोनों नेताओं ने उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों के मुताबिक उत्तर कोरिया को पूरी तरह परमाणु हथियारों से मुक्त करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

साथ ही इस बात पर भी जोर दिया कि उत्तर कोरिया से और उत्तर कोरिया तक परमाणु और मिसाइल तकनीक के फैलाव को लेकर लगातार बनी हुई चिंताओं का समाधान किया जाना चाहिए।

उन्होंने सभी संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों से अपील की कि वे सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के तहत लगाए गए प्रतिबंधों का पूरी तरह पालन करें। इसमें उत्तर कोरिया को हथियार और उससे जुड़ा कोई भी सामान भेजने या वहां से खरीदने पर लगी रोक भी शामिल है। दोनों नेताओं ने यह भी कहा कि अपहरण से जुड़े मामलों का जल्द से जल्द समाधान होना जरूरी है।

दोनों प्रधानमंत्री ने म्यांमार की स्थिति और उसके क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने सभी पक्षों से तुरंत हिंसा रोकने और ऐसा माहौल बनाने की अपील की, जिससे सभी हितधारकों के बीच बातचीत हो सके और म्यांमार के नेतृत्व में, म्यांमार की भागीदारी से एक शांतिपूर्ण और लंबे समय तक टिकने वाला समाधान निकले।

दोनों नेताओं ने मध्य पूर्व में स्थायी शांति और स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई। ईरान से जुड़े हालात पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि होर्मुज स्‍ट्रेट से जहाजों की सुरक्षित और बिना रुकावट आवाजाही सुनिश्चित करना, ऊर्जा और दूसरी जरूरी चीजों की सप्लाई चेन को स्थिर बनाए रखना और अंतरराष्ट्रीय कानून, खासकर 'यूएनसीएलओएस' का पालन करना बेहद जरूरी है।

दोनों नेताओं ने गाजा के पुनर्निर्माण की व्यापक योजना को आगे बढ़ाने और दो-राष्ट्र समाधान (टू-स्टेट सॉल्यूशन) के वादे को पूरा करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में जल्द से जल्द स्थिरता बहाल करने और लंबे समय तक शांति कायम करने के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास जरूरी हैं।

प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री ताकाइची ने यूक्रेन में भी अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार न्यायपूर्ण और स्थायी शांति का समर्थन किया। उन्होंने इस दिशा में अलग-अलग देशों द्वारा किए जा रहे कूटनीतिक प्रयासों का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि इससे क्षेत्र में न्यायपूर्ण और स्थायी शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी।


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