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लोकतंत्र का अपमान करेंगे तो जनता कभी जनादेश नहीं देगी: मुख्तार अब्बास नकवी

भाजपा के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी के पीए की हत्या का मुद्दा उठाते हुए टीएमसी सरकार पर निशाना साधा

लोकतंत्र का अपमान करेंगे तो जनता कभी जनादेश नहीं देगी: मुख्तार अब्बास नकवी
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नई दिल्ली। भाजपा के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी के पीए की हत्या का मुद्दा उठाते हुए टीएमसी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि गुंडागर्दी और अत्याचार के जरिए लोकतंत्र को बंधक नहीं बनाया जा सकता। अगर लोकतंत्र का अपमान किया गया तो जनता कभी जनादेश नहीं देगी।

नई दिल्ली में मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि देखिए, एक बात बिल्कुल साफ है कि कोई भी गुंडागर्दी के जरिए गणतंत्र की ताकत को बदनाम या बंधक नहीं बना सकता। जो लोग अराजकता के जरिए गणतंत्र की शक्ति को कलंकित और दबाने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें समझ लेना चाहिए कि रात कितनी भी भारी क्यों न हो, सवेरा किसी के रोके नहीं रुकता। रात जितनी भारी होगी, सुबह उतनी ही शानदार होगी।

नकवी ने टीएमसी पर आरोप लगाते हुए कहा कि अत्याचार, गुंडागर्दी, तोड़फोड़ और सामूहिक हत्याओं के जरिए डर और भ्रम का माहौल बनाने वाले कभी सफल नहीं होंगे।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि लोगों का सम्मान नहीं करेंगे तो लोग भी आप पर सवाल उठाएंगे। नकवी ने विपक्षी दलों के कुछ नेताओं पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कुछ नेता बंगाल जाकर टीएमसी के नेताओं को सांत्वना दे रहे हैं।

भाजपा नेता ने कहा कि छल-कपट और सामाजिक भेदभाव को दूर किए बिना अगर आप एक-दूसरे को अपमानित करते रहेंगे और रुदाली मंडली बनकर रोते रहेंगे तो इसका कोई फायदा नहीं होगा।

नकवी ने कहा कि जनादेश का अपमान गलत बात है। अगर आप लोकतंत्र का अपमान करेंगे तो जनता आपको कभी जनादेश नहीं देगी।

भाजपा नेता ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सुरक्षा बलों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों ने अत्याचार और अपराध के दरिंदों को करारा जवाब दिया है। भारत को इस पर गर्व है। यह संदेश न केवल आतंकियों के लिए, बल्कि उनके सरपरस्तों और आकाओं के लिए भी है।

वंदे मातरम विवाद पर नकवी ने कहा कि कुछ लोग इसे इस्लाम के खिलाफ बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोग वंदे मातरम गाते हुए फांसी पर चढ़ गए थे। उन्हें फांसी दे दी गई, और आज कुछ लोग कह रहे हैं कि अगर फांसी भी दे दी जाए तो वे वंदे मातरम नहीं गाएंगे। हमारे राष्ट्रीय नेताओं की सोच और उनकी सोच में कितना फर्क है।


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