अगर भारत में हो रहे प्रदर्शनों के पीछे विदेशी शक्तियों का हाथ, तो अमित शाह क्या कर रहे हैं : उदित राज
कांग्रेस प्रवक्ता उदित राज ने भारतीय जनता पार्टी द्वारा भारत में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को फ्रांस में फैली अशांति से जोड़े जाने वाले बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने भाजपा से इस दावे के प्रमाण पेश करने की मांग की है।

नई दिल्ली। कांग्रेस प्रवक्ता उदित राज ने भारतीय जनता पार्टी द्वारा भारत में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को फ्रांस में फैली अशांति से जोड़े जाने वाले बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने भाजपा से इस दावे के प्रमाण पेश करने की मांग की है।
उदित राज ने भाजपा के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा, "इसका प्रमाण प्रस्तुत करना चाहिए। खबर तो खबर होती है, कोई निश्चित बात नहीं कही गई है, सिर्फ संभावनाएं व्यक्त की हैं। अगर ऐसी कोई संभावना है भी, तो हमारे गृह मंत्री क्या कर रहे हैं? क्या वह केवल चुनाव लड़ने में लगे हुए हैं? एनआईए और रॉ क्या कर रही हैं? अगर देश में ऐसी कोई साजिश चल रही है, तो उसे रोका जाना चाहिए और भारत में मौजूद उसके एजेंटों और उत्प्रेरकों पर पहले काबू पाना चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा कि अगर यह किसी अंतरराष्ट्रीय गिरोह की साजिश है, तो यह मीडिया में चर्चा का विषय नहीं होना चाहिए। उदित राज ने सवाल उठाया कि भाजपा नेता इस तरह की संवेदनशील बातों को लेकर मीडिया में क्यों जाते हैं। यह इंटेलिजेंस का मामला है। जो चीज होती है, वह दिखती नहीं और जो दिखती है, वह होती नहीं है। हमारा इंटेलिजेंस तंत्र क्या कर रहा है? उसे इस साजिश को कवर करना चाहिए और रोकना चाहिए।
कांग्रेस प्रवक्ता ने आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार द्वारा भारत में हो रहे प्रदर्शनों के पीछे विदेशी फंडिंग का हाथ होने के आरोपों पर भी पलटवार किया।
उदित राज ने कहा कि आरएसएस के ही छह-सात सौ संगठन अमेरिका और इंग्लैंड में रजिस्टर्ड हैं। अगर विदेशी फंडिंग की जांच करनी ही है, तो सबसे पहले उन संगठनों की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "आरएसएस का जो मुख्यालय बना है, वह लगभग तीन सौ करोड़ रुपये का होगा। उसके धन की जांच कराई जानी चाहिए। जगह-जगह आरएसएस की क्षेत्रीय इमारतें बनी हुई हैं, उनके धन की भी जांच होनी चाहिए। भाजपा के 290 से ज्यादा कार्यालय बन चुके हैं, उनकी भी जांच होनी चाहिए। ये दूसरों पर उंगली उठाते हैं, जबकि इनके खुद के दामन में दाग है।"
वहीं, लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला के उस बयान पर भी उदित राज ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) को हटाने की प्रक्रिया वैसी ही है जैसी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की है और अगर विपक्ष इस संबंध में महाभियोग प्रस्ताव लाता है, तो प्रक्रिया के तहत उस पर चर्चा की जाएगी।
उदित राज ने कहा कि 2023 में सरकार द्वारा बनाया गया चुनाव आयुक्तों से संबंधित कानून बेहद खतरनाक है। उन्होंने कहा, "इस कानून में ऐसी इम्युनिटी दी गई है जो किसी को नहीं मिलती। ज्ञानेश कुमार या कोई भी चुनाव आयुक्त कुछ भी गलत करे, तो उसके खिलाफ जब तक वह पद पर है, तब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकती। क्या ऐसा कानून कहीं होता है?"
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने लोकसभा में अपने बहुमत के दम पर यह कानून बनाया है। सरकार जानती है कि जब तक सत्ता परिवर्तन नहीं होता और उनकी सीटें कम नहीं होतीं, तब तक इस कानून के तहत चुनाव आयुक्त को हटाना संभव नहीं हो पाएगा।
बीकानेर हाउस में रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी से 70 से अधिक तस्वीरें हटाए जाने के मामले पर भी उदित राज ने अपनी बात रखी। बीकानेर हाउस प्रबंधन ने कहा था कि कुछ तस्वीरें उनकी नीतियों के विरुद्ध थीं और राजनीतिक थीं, इसलिए उन्हें हटाया गया।
इस पर उदित राज ने कहा, "इसकी कोई पॉलिसी नहीं होती। पेंटिंग, कला और संस्कृति एक व्यक्ति की अभिव्यक्ति होती है, सच्चाई की अभिव्यक्ति होती है। इसकी कोई नीति नहीं हो सकती। अगर कोई आर्टिस्ट या पेंटर देश में चल रहे आंदोलनों और मौजूदा घटनाओं को कैप्चर नहीं करेगा, तो फिर क्या करेगा? यह सरकार का पूर्वाग्रह है। इन्होंने भाजपा सरकार के दबाव में तस्वीरें हटाई हैं और अब बहाना बना रहे हैं कि यह हमारी नीति है। उनकी कौन सी नीति है? पेंटिंग तो पेंटिंग होती है, आर्ट तो आर्ट होती है।"


