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एबीवीपी से निकले और सपा की साइकिल पर हुए सवार, योगी आदित्यनाथ को चुनौती, मनोज तिवारी की राजनीति का वह किस्सा

भोजपुरी गानों और फिल्मों में काम करते हुए सियासत की बुलंदियों को छूने वाले मनोज तिवारी की कहानी बेहद दिलचस्प है। बिना किसी पारंपरिक राजनीतिक प्रशिक्षण के उन्होंने राजनीति में कदम रखा और पहली ही पारी में बड़े नेताओं के बीच खड़े नजर आए।

एबीवीपी से निकले और सपा की साइकिल पर हुए सवार, योगी आदित्यनाथ को चुनौती, मनोज तिवारी की राजनीति का वह किस्सा
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फिल्मी पर्दे से राजनीति के मंच पर मनोज तिवारी की एंट्री

  • योगी के प्रशंसक से उनके खिलाफ उम्मीदवार बने तिवारी
  • ‘ससुरा बड़ा पैसा वाला’ से लेकर लोकसभा तक का सफर
  • गायक, अभिनेता और नेता - मनोज तिवारी की बहुआयामी पहचान

नई दिल्ली। भोजपुरी गानों और फिल्मों में काम करते हुए सियासत की बुलंदियों को छूने वाले मनोज तिवारी की कहानी बेहद दिलचस्प है। बिना किसी पारंपरिक राजनीतिक प्रशिक्षण के उन्होंने राजनीति में कदम रखा और पहली ही पारी में बड़े नेताओं के बीच खड़े नजर आए।

1 फरवरी 1971 को जन्मे मनोज तिवारी जैसे गानों और फिल्मों की परंपरा शिक्षा के बिना भोजपुरी के स्टार बने, ठीक उसी तरह उनकी राजनीति रही। वे एबीवीपी से निकलकर आए थे, लेकिन राजनीति की पहली पारी समाजवादी पार्टी के साथ शुरू की थी। उनका समाजवादी पार्टी के साथ अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने का भी फिल्म के मंच से हुई थी।

अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म 'गंगा' की शूटिंग में व्यस्त मनोज तिवारी को नहीं पता था कि अगले पल वह फिल्मी पर्दे से कहीं अधिक राजनीति के खेल में उतर पड़ेंगे। एक दिन शूटिंग के बीच अचानक अमर सिंह वहां आए थे, जो उस समय समाजवादी पार्टी के महासचिव हुआ करते थे। अमर सिंह ने मनोज तिवारी का हाथ पकड़ा और सीधे साइकिल की सवारी के लिए राजनीति के मैदान में उतार दिया।

दिलचस्प यह भी है कि मनोज तिवारी गोरखपुर से सांसद रहने वाले योगी आदित्यनाथ के बड़े प्रशंसक थे, लेकिन समाजवादी पार्टी ने उन्हीं के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए खड़ा कर दिया। एक इंटरव्यू में मनोज तिवारी ने कहा था, "अमर सिंह एक दिन मिले थे और मुझे उठाकर गोरखपुर पटक दिया। मुझे यह भी नहीं पता था कि समाजवादी पार्टी कहां से चुनाव लड़ेगी। मैं बहुत पहले से ही योगी आदित्यनाथ का फैन था, लेकिन दो दिन में समझ आ चुका था कि मुझे गलत जगह चुनाव लड़ने के लिए उतारा गया है, क्योंकि सामने योगी आदित्यनाथ ही थे।"

मनोज तिवारी बताते हैं कि वह एक बार चुनाव से भाग भी खड़े हुए थे, लेकिन उन्हें फिर से वहीं लाकर डाल दिया गया था। हालांकि, वे इसे अपने राजनीतिक जीवन की उस पहली सीढ़ी चढ़ने की सबसे बड़ी शिक्षा मानते हैं। उन्होंने कहा, "पास से राजनीति, राजनेता से जनता की उम्मीदें कितनी हों, और एक व्यक्ति कितना अपने कर्मों से लोकप्रिय हो सकता है, ये योगी आदित्यनाथ को देखते हुए मैंने सीखा। वहां से समझ आया कि राजनीति में आने के लिए हवाई जंप नहीं चाहिए, बल्कि कुछ सीखना और फिर पार्टी को ज्वाइन करना चाहिए।"

उस चुनाव में मनोज तिवारी को योगी आदित्यनाथ से हार झेलनी पड़ी थी। खैर, राजनीति में तस्वीरें हमेशा बदलती रही हैं। ठीक उसी तरह मनोज तिवारी 2014 में भाजपा का चेहरा बनकर उत्तर पूर्वी दिल्ली (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र) से चुनाव जीतकर पहली बार संसद पहुंचे। 2014 के बाद से मनोज तिवारी ने लोकसभा चुनाव में हार का सामना नहीं किया है।

फिल्मों में काम करने से पहले मनोज तिवारी ने तकरीबन दस साल भोजपुरी गायक के रूप में कार्य किया। 2003 में उन्होंने फिल्म 'ससुरा बड़ा पैसा वाला' में अभिनय किया, जो मनोरंजन और आर्थिक दृष्टि से बहुत सफल फिल्म साबित हुई। माना जाने लगा कि भोजपुरी फिल्मों का नया मोड़ शुरू हो चुका है। इसके बाद उन्होंने दो और फिल्मों 'दारोगा बाबू आई लव यू' और 'बंधन टूटे ना' में अभिनय किया।

मनोज तिवारी ने एक टेलीविजन कार्यक्रम 'चक दे बच्चे' में बतौर मेजबान कार्य किया। 2010 में उन्होंने प्रतिभागी के तौर पर रियलिटी शो 'बिग बॉस' में हिस्सा लिया। उन्होंने अनुराग कश्यप की ओर से निर्देशित फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' के लिए एक गीत 'जिय हो बिहार के लाला' भी गाया।


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