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'सत्ता के अहंकार में सरकार', सोनम वांगचुक के समर्थन में आए विपक्षी नेता

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद विपक्षी दलों के नेताओं ने केंद्र सरकार पर जुबानी हमला बोला और वांगचुक के समर्थन में आवाज उठाई।

सत्ता के अहंकार में सरकार, सोनम वांगचुक के समर्थन में आए विपक्षी नेता
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सत्ता के अहंकार पर वार: विपक्षी नेताओं ने केंद्र को घेरा

  • लोकतंत्र का अपमान: शांतिपूर्ण अनशन पर पुलिस कार्रवाई की निंदा
  • संसद मार्च से डरी सरकार: विपक्ष ने लगाया आरोप
  • लद्दाख की चिंता: वांगचुक की सेहत को लेकर बढ़ी बेचैनी

नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद विपक्षी दलों के नेताओं ने केंद्र सरकार पर जुबानी हमला बोला और वांगचुक के समर्थन में आवाज उठाई।

जम्मू-कश्मीर के डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी ने कहा कि सोनम वांगचुक आम आदमी नहीं हैं। वे एक सोशल एक्टिविस्ट हैं, जिन्होंने न सिर्फ जम्मू-कश्मीर बल्कि पूरे देश में मुद्दों को उठाया है। उनका परिवार राजनीति से जुड़ा नहीं है। अगर कोई राजनेता होता तो हम कह सकते थे कि ‘सर, ऐसा हुआ, वैसा हुआ।' लेकिन उनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। यह सच है कि हमारे युवा सड़कों पर हैं। उन्होंने अपने आंदोलन का नाम ‘कॉकरोच’ रखा और ‘कॉकरोच’ नाम से एक कैंपेन शुरू किया है। सोनम वांगचुक उन्हें समर्थन देने वहां गए थे। यह देश महात्मा गांधी का है और संविधान के अनुसार, हम अपनी बात रख सकते हैं।

आप के वरिष्ठ नेता गोपाल राय ने कहा कि सोनम वांगचुक 20 दिनों से भूख हड़ताल पर थे। पुलिस ने जबरदस्ती हटाया। यह इस बात का संकेत है कि सरकार बातचीत करने के बजाय सत्ता के अहंकार से लोकतांत्रिक आवाजों को दबाना चाहती है।

जेएमएम नेता महुआ माजी ने कहा कि जिस तरह से मशहूर एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से अस्पताल ले जाया गया, उससे पता चलता है कि केंद्र सरकार उनके आंदोलन की ताकत से डरी हुई है। सरकार जेनजी और छात्र आंदोलन से इसलिए डरी हुई है क्योंकि 20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है। उसे शायद डर था कि देश भर से आने वाले सांसद और लोग उनसे मिलेंगे। संसद तक मार्च करने की भी योजना थी और लगता है कि सरकार को इसकी चिंता थी। मुझे नहीं लगता कि यह लोकतंत्र के लिए सही है। लोकतंत्र में हर किसी को विरोध करने का अधिकार है और छात्रों की मांगें जायज हैं, जिनका सोनम वांगचुक समर्थन कर रहे हैं।

समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद रुचि वीरा ने कहा कि सोनम वांगचुक शांतिपूर्ण तरीके से अनशन कर रहे थे और देश के युवाओं की समस्याओं को लेकर कई दिनों से उपवास पर थे। जिस तरह से उन्हें हटाया गया, वह लोकतंत्र का सीधा अपमान है। सरकार के किसी भी प्रतिनिधि ने वांगचुक से बात नहीं की, जबकि संवाद होना चाहिए था। मैं इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करती हूं। संवेदनहीन सरकार से और क्या उम्मीद की जा सकती है? अघोषित आपातकाल चल रहा है।

रायजोर दल के प्रमुख और विधायक अखिल गोगोई ने कहा कि सोनम वांगचुक के साथ जिस तरह का बर्ताव किया गया, वह बिल्कुल गलत था। सोनम वांगचुक की मांग थी कि परीक्षाओं में पारदर्शिता हो। इस मांग में क्या गलत है?

सांसद मोहम्मद हनीफा जान ने कहा कि लद्दाख की आवाम सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर परेशान है। बहुत से लोग उनसे अपील कर रहे थे कि अनशन खत्म कर दें। हमने भी कहा कि अनशन वापस ले लेना चाहिए।


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