Top
Begin typing your search above and press return to search.

नेपाल बाढ़ पर पर्यावरणविद् की चेतावनी- हिमालय के बढ़ते खतरे को समझें, टिकाऊ विकास जरूरी

पर्यावरणविद् भवरीन कंधारी ने नेपाल में आई अचानक बाढ़ को लेकर रविवार को चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि नेपाल की आपदा को जलवायु परिवर्तन, ग्लेशियर पिघलने और हिमालय के बढ़ते खतरे के बारे में एक गंभीर चेतावनी के तौर पर देखा जाना चाहिए

नेपाल बाढ़ पर पर्यावरणविद् की चेतावनी- हिमालय के बढ़ते खतरे को समझें, टिकाऊ विकास जरूरी
X

दिल्ली। पर्यावरणविद् भवरीन कंधारी ने नेपाल में आई अचानक बाढ़ को लेकर रविवार को चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि नेपाल की आपदा को जलवायु परिवर्तन, ग्लेशियर पिघलने और हिमालय के बढ़ते खतरे के बारे में एक गंभीर चेतावनी के तौर पर देखा जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने चित्रकूट जैसे इलाकों में जहां जलस्तर बढ़ रहा है। उन्होंने टिकाऊ विकास और तत्काल तैयारी की जरूरत पर भी जोर दिया।

नेपाल में अचानक आई बाढ़ पर भवरीन कंधारी ने कहा, "इसे सिर्फ प्राकृतिक आपदा कहना सही नहीं है, क्योंकि जाहिर है कि जहां ग्लेशियर होते हैं, वहां प्राकृतिक आपदाएं तो आती ही हैं। हिमालय भी दूसरी पर्वत श्रृंखलाओं की तुलना में काफी नई पर्वत श्रृंखला है, इसलिए यह अभी भी पूरी तरह मजबूत नहीं है। इसे स्थिर होने या बसने में शायद लाखों साल लग जाएंगे।"

उन्होंने आगे कहा, "ऐसे प्राकृतिक आपदा आते हैं, लेकिन हम उन्हें और बदतर और गंभीर बनाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। तापमान ऊपर जा रहे हैं। यह प्रदूषण और इको-सेंसिटिव जोन में कंस्ट्रक्शन के कारण हो रहा है। ब्लास्टिंग की जा रही है। इन्हें सिर्फ नेचुरल डिजास्टर नहीं मानकर जो गलतियां हो रही हैं, उन्हें सुधारना चाहिए।"

उन्होंने एक सुझाव देते हुए कहा, "हिमालय को साझा करने वाले जो भी देश हैं, उन्हें एक साथ मिलकर इससे बचने के उपाय करने चाहिए।"

उन्होंने कहा कि तापमान लगातार बढ़ रहा है और इस पर काफी स्टडी और असेसमेंट हो चुके हैं। मामला बहुत नाजुक है और गलती की कोई गुंजाइश नहीं है। पूरी समस्या को समग्र रूप से देखना जरूरी है, चाहे वह कोयले का उत्पादन हो, हाइड्रोपावर प्लांट बनाना हो, या इन इलाकों में बहुत ज्यादा पर्यटकों को लाना और कार्बन फुटप्रिंट बढ़ाना हो। हमने उत्तराखंड और हिमाचल में साफ तौर पर ऐसी गलतियां देखी हैं, जहां पेड़ों की कटाई वाले कई प्रोजेक्ट चलाए गए।

सीमा पार सहयोग पर जोर देते हुए भवरीन कंधारी ने कहा, "हां, बिल्कुल। न सिर्फ भारत और नेपाल के बीच, बल्कि चीन के साथ भी सीमा पार सहयोग की जरूरत है। हिमालय रेंज से जुड़े सभी देशों को साथ आना होगा, और साथ ही अर्ली वार्निंग और दूसरे सिग्नलिंग सिस्टम वगैरह का भी इस्तेमाल करना होगा।"


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it