वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पर चुनाव आयोग सख्त, अब निलंबन के साथ दर्ज होगा आपराधिक मामला
मतदाता सूची तैयार करने में लापरवाही या जानबूझकर गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है

ECI का बड़ा संदेश, मतदाता सूची में गड़बड़ी पर सीधा आपराधिक केस
- चुनावी प्रक्रिया पर सख्त पहरा, अनियमितता करने वालों पर कसेगा शिकंजा
नई दिल्ली। मतदाता सूची तैयार करने में लापरवाही या जानबूझकर गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने साफ संकेत दिए हैं कि वोटर लिस्ट से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की अनियमितता को गंभीर अपराध माना जाएगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अब केवल विभागीय कार्रवाई नहीं, आपराधिक केस भी
अब तक ऐसे मामलों में मुख्य रूप से विभागीय कार्रवाई, निलंबन या चुनाव संबंधी कानूनों के तहत कदम उठाए जाते थे। लेकिन अब चुनाव आयोग ने फैसला किया है कि गंभीर गड़बड़ियों में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक प्रावधानों के तहत भी मामला दर्ज कराया जाएगा।
आयोग का मानना है कि मतदाता सूची चुनावी प्रक्रिया की बुनियाद है और इसमें किसी भी तरह की चूक लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।
पीलीभीत मामले के बाद बड़ा फैसला
यह सख्ती उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में सामने आई कथित अनियमितताओं के बाद देखने को मिली है। जांच में आरोप लगा कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया।
रिपोर्ट के आधार पर चुनाव आयोग ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही कुछ कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश भी जारी किया गया है।
बिना अनुमति नहीं होगी बहाली
आयोग ने निर्देश दिए हैं कि जिन अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है, उन्हें चुनाव आयोग की पूर्व अनुमति के बिना दोबारा सेवा में बहाल नहीं किया जाएगा। इससे स्पष्ट है कि आयोग इस मामले को गंभीरता से ले रहा है।
जांच में क्या सामने आया?
जांच रिपोर्ट के अनुसार, हजारों मतदाताओं के रिकॉर्ड में कथित तौर पर आवश्यक आवेदन और दस्तावेजों के बिना बदलाव किए गए। आरोप है कि संबंधित रिकॉर्ड को पर्याप्त जांच के बिना मंजूरी भी दे दी गई।
इसी आधार पर आयोग ने संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए कड़ी कार्रवाई का निर्णय लिया है।
क्या है बीएनएस की धारा 198?
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 198 सरकारी कर्मचारियों द्वारा कानून का उल्लंघन करने या अपने अधिकारों का दुरुपयोग करने से संबंधित है। इस धारा के तहत दोषी पाए जाने पर एक वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों दंड दिए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े मामलों में इस धारा का इस्तेमाल जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की कोशिश
चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। आयोग ने सभी राज्यों के चुनाव अधिकारियों को भी निर्देश दिए हैं कि मतदाता सूचियों के निर्माण और संशोधन के दौरान नियमों का सख्ती से पालन किया जाए।


