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भारत में ई85 ईंधन लॉन्च: पुरी बोले– ग्रीन फ्यूचर की ओर ऐतिहासिक कदम

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर इंडियन ऑयल फ्यूल स्टेशन पर ई85 ईंधन को लॉन्च किया

भारत में ई85 ईंधन लॉन्च: पुरी बोले– ग्रीन फ्यूचर की ओर ऐतिहासिक कदम
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ई85 फ्यूल: पेट्रोल से 20 रुपए सस्ता, प्रदूषण में 61% कमी

  • ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन: किसानों की आय बढ़ाने और ऊर्जा सुरक्षा की नई राह
  • विश्व पर्यावरण दिवस पर पुरी का बड़ा ऐलान– फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के लिए नया विकल्प
  • स्वदेशी तकनीक से बनेगा भारत आत्मनिर्भर, घटेगा ऊर्जा आयात बिल

नई दिल्ली। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर इंडियन ऑयल फ्यूल स्टेशन पर ई85 ईंधन को लॉन्च किया। इस दौरान उन्होंने इसे ग्रीन फ्यूचर की तरफ ऐतिहासिक कदम बताया।

ई85 एक एथेनॉल प्लस पेट्रोल मिश्रित ईंधन है। इसमें एथेनॉल 80-85 प्रतिशत और पेंट्रोल 14-19 प्रतिशत होता है और यह विशेषकर फ्लेक्स-फ्यूल ईंधन वाले वाहनों के लिए डिजाइन किया गया है।

इस पर केंद्रीय मंत्री पुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में कहा,"विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ, हरित एवं ऊर्जा सुरक्षित भारत की विजन से प्रेरणा लेकर आज दिल्ली में फ्लैक्स फ्यूल पर चलने वाले वाहनों के लिए दिल्ली के पेट्रोल पंप पर ई85 ईंधन का ऐतिहासिक उद्घाटन किया।"

उन्होंने आगे कहा, "ये ना केवल भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है, बल्कि किसानों की अतिरिक्त आय का साधन भी है। इस पहल से हमारे ऊर्जादाताओं के जीवन में खुशहाली और उन्नति बनी रहेगी।"

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए 100 प्रतिशत आत्मनिर्भर ई85 ईंधन एक मील का पत्थर है, जो पेट्रोल की तुलना में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में 61 प्रतिशत तक की कमी सुनिश्चित करेगा और यह काफी सस्ता भी होगा।

नई दिल्ली में ई85 ईंधन का दाम 82.12 रुपए प्रति लीटर निर्धारित किया गया है, जबकि मौजूदा सामान्य पेट्रोल का दाम 102.12 रुपए प्रति लीटर है, जो इसे 20 रुपए प्रति लीटर सस्ता बनाता है।

उन्होंने आगे कहा कि वाहनों को इस ग्रीन फ्यूल के अनुकूल बनाने वाली तकनीकें भी काफी हद तक स्वदेशी हैं। ऐसे ईंधनों और तकनीकों का विकास भारत के ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन को गति प्रदान करेगा, ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में भारत के प्रयासों में महत्वपूर्ण योगदान देगा और हमारे ऊर्जा आयात बिलों को कम करेगा।


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