ट्रंप के दबाव में झुके मोदी? कांग्रेस का बड़ा हमला
भारत को रणनीतिक रूप से बड़ा झटका लगने की खबर सामने आई है। ईरान के चाबहार एयरपोर्ट से भारत ने अपना कंट्रोल छोड़ दिया है

भारत ने चाबहार पोर्ट से छोड़ा कंट्रोल!
- कांग्रेस ने मोदी सरकार पर बोला हमला
- मोदी ने ट्रंप के आगे सरेंडर किया- कांग्रेस
नई दिल्ली। भारत को रणनीतिक रूप से बड़ा झटका लगने की खबर सामने आई है। ईरान के चाबहार एयरपोर्ट से भारत ने अपना कंट्रोल छोड़ दिया है। जिसे लेकर अब तमाम तरह के सवाल उठ रहे हैं...कहा जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के दबाव में आकर भारत पीचे हट गया है। इसे लेकर अब कांग्रेस ने पीएम मोदी पर ट्रंप के आगे सरेंडर करने का आरोप लगाया है।
ईरान के चाबहार पोर्ट को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। जो भारत के लिए रणनीतिक रूप से विफलता के तौर पर देखा जा रहा है, दरअसल कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में आकर इस प्रोजेक्ट पर भारत का नियंत्रण छोड़ दिया है, दरअसल चाबहार बंदरगाह भारत के लिए केवल एक व्यापारिक मार्ग नहीं, बल्कि एक रणनीतिक हथियार है। यह भारत को पाकिस्तान को बाईपास करके अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुँचने का सीधा रास्ता देता है।
साथ ही, इसे चीन के 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' के जवाब के तौर पर देखा जाता है। भारत ने इस प्रोजेक्ट में लगभग 120 मिलियन डॉलर का निवेश किया है। कांग्रेस के दावों के मुताबिक, भारत ने अब वहां से अपना कंट्रोल हटा लिया है और इससे जुड़ी वेबसाइट भी बंद कर दी गई है।
कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर इसे मोदी सरकार की 'रणनीतिक हार' करार दिया है.. पार्टी ने एक्स पर लिखा- नरेंद्र मोदी ने एकबार फिर ट्रंप के आगे सरेंडर कर दिया है।
ख़बरों के मुताबिक- ट्रंप के दबाव में नरेंद्र मोदी ने ईरान के चाबहार पोर्ट से अपना कंट्रोल छोड़ दिया है, चुपके से वेबसाइट भी बंद करवा दी। इस बेहद महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में मोदी सरकार ने देश की जनता के 120 मिलियन डॉलर लगाए थे और अब ये सब स्वाहा हैं।
जब चाबहार पोर्ट का एग्रीमेंट हुआ था तो नरेंद्र मोदी ने कहा था कि इकोनॉमी से जुड़ा बहुत बड़ा काम हुआ है। ये मेरी बहुत बड़ी सफलता है। अब जब चाबहार पोर्ट का कंट्रोल छोड़ दिया है तो इसपर कुछ नहीं बोल रहे हैं।
चाबहार कोई आम बंदरगाह नहीं है। यह भारत को अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया से एक अहम और सीधा समुद्री रास्ता देता है, जिससे हम पाकिस्तान को बाईपास कर सकते हैं और चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का मुकाबला भी कर सकते हैं। लेकिन अफ़सोस की बात है कि नरेंद्र मोदी ट्रंप के दबाव के आगे झुक गए और देश का नुकसान कर दिया।
कांग्रेस ने सवाल किया कि:-
- भारत की विदेश नीति अमेरिका के व्हाइट हाउस से क्यों तय की जा रही है?
- नरेंद्र मोदी, अमेरिका को भारत पर दबाव बनाने की अनुमति क्यों दे रहे हैं?
पार्टी ने ये भी कहा कि पीएम मोदी ने एक चैनल में कहा था कि—चाबहार पोर्ट का मेरा फाइनल एग्रीमेंट हुआ है- ये बहुत बड़ा काम है। सेंट्रल एशिया से जुड़ा हुआ, मेरा इकोनॉमी का बहुत बड़ा काम हुआ है।
और अब पार्टी का आरोप है कि पीएम ने ट्रंप के आगे सरेंडर कर, चाबहार पोर्ट का कंट्रोल छोड़ दिया। पार्टी ने आरोप लगाया कि इस प्रोजेक्ट में देश के 120 मिलियन डॉलर लगे थे, लेकिन ट्रंप के डर से मोदी ने सब बर्बाद कर दिया..अब तक इस मामले पर मोदी सरकार की तरफ से कोई बयान नहीं आया है। अब इस मामले में सरकार कुछ कहती है या नहीं। ये देखना होगा।


