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धार भोजशाला विवाद : हिंदू पक्ष के वकील वरुण सिन्हा ने कहा- मामले की तीसरे हफ्ते में सुनवाई

धार भोजशाला मामले में हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता वरुण सिन्हा ने याचिकाकर्ता जितेंद्र बिसेन की ओर से चल रही कानूनी कार्यवाही पर प्रतिक्रिया व्यक्त की।

धार भोजशाला विवाद : हिंदू पक्ष के वकील वरुण सिन्हा ने कहा- मामले की तीसरे हफ्ते में सुनवाई
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नई दिल्ली। धार भोजशाला मामले में हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता वरुण सिन्हा ने याचिकाकर्ता जितेंद्र बिसेन की ओर से चल रही कानूनी कार्यवाही पर प्रतिक्रिया व्यक्त की।

उन्होंने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की ओर से विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की गई थी। आज चारों एसएलपी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया। आज इस मामले में सुनवाई हुई और कोर्ट की ओर से नोटिस जारी किया गया है।

उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष की ओर से बार-बार कहा जा रहा था कि वो स्टेटस को एंटी बहाल कर दे। लेकिन, हम लोगों की ओर से विरोध जताया गया था, क्योंकि कोर्ट ने अपने फैसले में एएसआई के 2023 के दिए आदेश को निरस्त कर दिया है। ऐसी स्थिति में स्टेटस को एंटी नहीं कहा जा सकता है। सरकार और प्रशासन की ओर से सामाजिक सौहार्द को देखते हुए कई तरह के बदलाव किए गए हैं। ऐसी स्थिति में कोर्ट ने स्टेटस को एंटी कहने से इनकार कर दिया। लेकिन, एक अंतरिम व्यवस्था की गई है, जिसके तहत भोजशाला परिसर में खाली जगह पर शुक्रवार के दिन मुस्लिम पक्ष की ओर से नमाज अदा किया जा सकता है। हालांकि, मुस्लिम पक्ष की ओर से बार-बार कहा जा रहा था कि उन्हें परिसर के अंदर ही नमाज अदा करने की अनुमति दी जाए। लेकिन, कोर्ट ने उन्हें ऐसा आदेश देने से इनकार कर दिया।

उन्होंने कहा कि डायरेक्शन नंबर 7 में भारत सरकार और एएसआई को मैनेजमेंट करने का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा, यह साफ किया गया है कि बिना सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बुनियादी बदलाव नहीं किए जा सकते हैं। अगर बदलाव करना है, तो इसके लिए पहले केंद्र सरकार की अनुमति लेनी होगी। अब मामले पर अंतिम सुनवाई तीसरे हफ्ते में होगी। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मेरिट के आधार पर सुनवाई होगी।

अधिवक्ता वरुण सिन्हा के मुताबिक, मुस्लिम पक्ष की ओर से तर्क दिया गया कि यह सबकुछ जल्दबादी में किया जा रहा है। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला बहुत संवेदनशील है। अगर प्रशासन की ओर से अंतरिम आदेश दिया गया है, तो आप किसी भी प्रकार से अंतरिम आदेश की प्रार्थना नहीं कर सकते हैं और न ही आप आरोप लगा सकते हैं। आज सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए इसके निस्तारण का आदेश दिया है।


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