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दिल्ली के उपराज्यपाल ने छात्रों से डिजिटल युग में बदलाव के सूत्रधार बनने का आह्वान किया

दिल्ली के उपराज्यपाल टीएस संधू ने छात्रों से तीव्र डिजिटल परिवर्तन के युग में बदलाव के सच्चे वाहक बनने का आह्वान किया।

दिल्ली के उपराज्यपाल ने छात्रों से डिजिटल युग में बदलाव के सूत्रधार बनने का आह्वान किया
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नई दिल्ली। दिल्ली के उपराज्यपाल टीएस संधू ने शुक्रवार को छात्रों से तीव्र डिजिटल परिवर्तन के युग में बदलाव के सच्चे वाहक बनने का आह्वान किया।

दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज में वार्षिक दिवस और पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित करते हुए संधू ने कहा कि आज के तीव्र डिजिटल परिवर्तन के युग में, मैं छात्रों को बदलाव के सच्चे सूत्रधार बनने के लिए प्रोत्साहित करता हूं। सूचना प्रौद्योगिकी सार्थक प्रभाव पैदा करने की अपार क्षमता प्रदान करती है, लेकिन नवाचार हमेशा मजबूत मूल्यों द्वारा निर्देशित होना चाहिए।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में उपराज्यपाल ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज के वार्षिक दिवस और पुरस्कार वितरण समारोह का हिस्सा बनकर मुझे बेहद खुशी हो रही है। एक संस्थान मात्र शिक्षा का स्थान नहीं होता, बल्कि यह मूल्यों, अनुशासन और छात्रों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब होता है।

उन्होंने आगे कहा कि सेवा, साहस, दृढ़ता और करुणा की शाश्वत विरासत से प्रेरित ऐसे संस्थान न केवल बुद्धि, बल्कि चरित्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नेतृत्व, संकाय और सभी पुरस्कार विजेताओं को हार्दिक बधाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत और विकसित दिल्ली के विजन में दृढ़ विश्वास और उद्देश्य के साथ आगे बढ़ते हुए आप सभी की निरंतर सफलता की कामना करता हूं।

गुरुवार को उपराज्यपाल ने श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) के 100वें वार्षिक दिवस समारोह को संबोधित करते हुए छात्रों को याद दिलाया कि शिक्षा को केवल अकादमिक विषयों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि “चरित्र, रचनात्मकता और आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देना चाहिए।"

उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान की ताकत उसके लोगों में निहित होती है। संकाय ने अपनी विद्वत्ता और समर्पण से अकादमिक मानकों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों को न केवल ज्ञान प्रदान करना चाहिए, बल्कि रचनात्मक सोच, परिवर्तन के अनुकूल ढलने और ईमानदारी से कार्य करने की क्षमता भी विकसित करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि ज्ञान और व्यवहार के बीच का संबंध वाणिज्य और अर्थशास्त्र जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है, जहां सिद्धांत को लगातार बदलती वास्तविकताओं से अवगत होना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में, हमने डिजिटल वित्त, उद्यमिता, डेटा विश्लेषण और वैश्विक व्यापार जैसे क्षेत्रों में नए अवसर उभरते देखे हैं। साथ ही, आज दुनिया के सामने कई जटिल चुनौतियां भी हैं।

उन्होंने आगे कहा कि छात्रों को इस परिवेश में आगे बढ़ने के लिए तैयार करने के लिए अकादमिक ज्ञान, व्यावहारिक अनुभव और नैतिक मूल्यों का संयोजन आवश्यक है।


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