दिल्ली की मतदाता सूची पर सियासी घमासान, केजरीवाल के आरोपों पर चुनाव आयोग ने दी सफाई, भाजपा का पलटवार
अरविंद केजरीवाल ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली की मतदाता सूची में बड़े स्तर पर छेड़छाड़ की गई। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि मतदाताओं के नाम हटाने या जोड़ने की प्रक्रिया का इस्तेमाल चुनावी लाभ के लिए किया गया।

नई दिल्ली: दिल्ली की मतदाता सूची को लेकर आम आदमी पार्टी और चुनाव आयोग के बीच विवाद गहरा गया है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि पिछले वर्ष विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हेरफेर की गई। उनका दावा है कि मतदाता सूची में बदलाव का फायदा भारतीय जनता पार्टी को मिला और इसी वजह से चुनाव परिणाम प्रभावित हुए। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि अलग-अलग समय पर तैयार की गई मतदाता सूचियों में नाम जुड़ने और बाद में नाम नहीं होने के आंकड़ों की तुलना मात्र से गलत तरीके से नाम हटाए जाने या किसी साजिश का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
केजरीवाल ने मीडिया रिपोर्ट का दिया हवाला
अरविंद केजरीवाल ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली की मतदाता सूची में बड़े स्तर पर छेड़छाड़ की गई। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि मतदाताओं के नाम हटाने या जोड़ने की प्रक्रिया का इस्तेमाल चुनावी लाभ के लिए किया गया। केजरीवाल के आरोपों के बाद आम आदमी पार्टी के अन्य नेताओं ने भी मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। पार्टी ने दावा किया कि मतदाता सूची में बदलाव की जांच की जानी चाहिए और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सभी आंकड़े सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
So, this is how Modi ji won Delhi. By massively tampering with the voter lists.
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) September 17, 2026
Congratulations Modi ji for killing Indian democracy
Happy birthday@narendramodi pic.twitter.com/hhbAU8xNxo
मनीष सिसोदिया का ‘फर्जी वोट’ का आरोप
आप के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया कि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान दिल्ली में बड़ी संख्या में कथित फर्जी मतदाता बनाए गए थे। उनका दावा है कि कुछ मकानों के पते पर 40 से 50 तक मतदाता दर्ज थे। सिसोदिया ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद ऐसे नामों को हटाया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में करीब 40 प्रतिशत वोट कथित तौर पर फर्जी थे। हालांकि, इन दावों के समर्थन में विस्तृत प्रमाण या स्वतंत्र जांच के निष्कर्षों का उल्लेख नहीं किया गया है।
चुनाव आयोग ने आंकड़ों की तुलना पर जताई आपत्ति
चुनाव आयोग के अनुसार, जिन आंकड़ों और मामलों का हवाला दिया जा रहा है, वे मतदाता सूची के अलग-अलग वर्गों तथा अलग-अलग अवधियों में हुए पुनरीक्षण से संबंधित हैं। आयोग ने कहा कि किसी सूची में नाम जुड़ना और बाद की सूची में उसका दिखाई नहीं देना अपने आप में गलत तरीके से नाम हटाए जाने का प्रमाण नहीं है। आयोग के मुताबिक, मतदाता सूची में किसी नाम को हटाने या शामिल नहीं करने का फैसला मतदाता की पात्रता, मौके पर जांच, दस्तावेजों और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर किया जाता है। इसलिए अलग-अलग सूचियों के आंकड़ों को सीधे जोड़कर या घटाकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है।
अनुपस्थित और दोहरे मतदाताओं की सूची तैयार हुई
चुनाव आयोग ने बताया कि प्रत्येक मतदान केंद्र के लिए अनुपस्थित, स्थानांतरित, दोहरे नाम वाले और मृत मतदाताओं की सूची तैयार की गई थी। आयोग के अनुसार, सूची तैयार करने के दौरान संबंधित प्रक्रिया के तहत किसी पूर्व आपत्ति की जानकारी नहीं मिली थी। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता सूची स्थिर दस्तावेज नहीं है, बल्कि इसे समय-समय पर अपडेट किया जाता है। मतदाता के स्थान बदलने, मृत्यु, दोहरे पंजीकरण या पात्रता संबंधी स्थिति में बदलाव होने पर नाम में संशोधन किया जा सकता है।
प्रवेश वर्मा ने आरोपों को बताया निराधार
दिल्ली के लोक निर्माण मंत्री प्रवेश वर्मा ने आम आदमी पार्टी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव या एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान एक भी वोट से छेड़छाड़ नहीं हुई। उन्होंने मतदाताओं की संख्या में बदलाव के लिए कुछ इलाकों में हुए निर्माण कार्यों का उदाहरण दिया। वर्मा के अनुसार, सरोजिनी नगर में पुराने फ्लैटों को तोड़े जाने और उनके पुनर्निर्माण के कारण कुछ समय के लिए मतदाताओं की संख्या में कमी आई थी। फ्लैटों के दोबारा तैयार होने और सरकारी कर्मचारियों के लौटने के बाद मतदाताओं की संख्या फिर बढ़ी।


