प्रदूषण पर दिल्ली सरकार का बड़ा एक्शन, 1 नवंबर से निर्माण-तोड़फोड़ पर रोक; 50% कर्मचारियों को WFH
दिल्ली में सर्दियों के दौरान प्रदूषण बढ़ने की आशंका को देखते हुए निर्माण गतिविधियों को नियंत्रित करने का फैसला किया गया है। सरकार के मुताबिक, 1 नवंबर से बाहरी निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़े कामों पर रोक लागू होगी।

नई दिल्ली: सर्दियों के दौरान प्रदूषण की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने कई अहम कदमों का ऐलान किया है। राजधानी में प्रदूषण की रोकथाम को लेकर पर्यावरण भवन में हुई बैठक में निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर चरणबद्ध पाबंदी, निजी वाहनों को हतोत्साहित करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाने और सरकारी व निजी कार्यालयों में वर्क फ्रॉम होम लागू करने समेत कई फैसले लिए गए। सरकार के फैसले के मुताबिक, 1 नवंबर 2026 से दिल्ली में बाहरी निर्माण और तोड़फोड़ के काम पर रोक शुरू होगी। इसके बाद प्रदूषण के लिहाज से सबसे संवेदनशील अवधि में 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण गतिविधियों पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी।
1 नवंबर से निर्माण और तोड़फोड़ पर रोक
दिल्ली में सर्दियों के दौरान प्रदूषण बढ़ने की आशंका को देखते हुए निर्माण गतिविधियों को नियंत्रित करने का फैसला किया गया है। सरकार के मुताबिक, 1 नवंबर से बाहरी निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़े कामों पर रोक लागू होगी। इसके बाद प्रदूषण की गंभीर अवधि को ध्यान में रखते हुए 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण कार्य पूरी तरह बंद रखने का निर्णय लिया गया है। सरकार का उद्देश्य प्रदूषण के संभावित स्रोतों को कम करना और संवेदनशील अवधि में हवा की गुणवत्ता पर दबाव घटाना है।
पार्किंग शुल्क होगा दोगुना
निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने के लिए सरकार ने अधिकृत पार्किंग साइट्स पर मौजूदा पार्किंग शुल्क को दोगुना करने का फैसला किया है। यह व्यवस्था 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक लागू रहेगी। हालांकि, इस फैसले से दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) की ओर से संचालित और प्रबंधित पार्किंग स्थलों को बाहर रखा गया है। सरकार को उम्मीद है कि पार्किंग महंगी होने से लोग निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन जैसे विकल्पों का अधिक इस्तेमाल कर सकते हैं।
सरकारी दफ्तरों के समय में भी बदलाव
प्रदूषण नियंत्रण उपायों के तहत दिल्ली में सरकारी कार्यालयों के कामकाज के समय में भी बदलाव किया जाएगा। यह व्यवस्था 1 नवंबर से 28 फरवरी तक लागू रहेगी। निर्णय के मुताबिक, MCD के तहत आने वाले कार्यालय सुबह 8:30 बजे से शाम 5 बजे तक संचालित होंगे। वहीं GNCTD के तहत आने वाले कार्यालय सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक खुलेंगे। अलग-अलग समय पर कार्यालय शुरू और बंद होने से यातायात के दबाव को अलग-अलग समय में बांटने का प्रयास किया जाएगा।
50 फीसदी कर्मचारियों को Work From Home
सरकार ने सरकारी और निजी कार्यालयों के लिए 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था लागू करने का भी फैसला किया है। इसके तहत आधे कर्मचारी घर से काम करेंगे, जबकि बाकी 50 प्रतिशत कर्मचारी कार्यालयों में मौजूद रहेंगे। यह व्यवस्था भी 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक लागू रहने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य कार्यालयों तक आने-जाने वाले वाहनों की संख्या घटाकर सड़कों पर ट्रैफिक और उससे जुड़े प्रदूषण को कम करना है।
पर्यावरण भवन में हुई अहम बैठक
प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े इन फैसलों के लिए पर्यावरण भवन में सुबह अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में दिल्ली की प्रदूषण स्थिति, सर्दियों में संभावित चुनौतियों और उससे निपटने के उपायों पर चर्चा हुई। बैठक में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा और PWD मंत्री प्रवेश वर्मा मौजूद रहे।
प्रदूषण के संवेदनशील समय पर फोकस
बैठक में तय किया गया कि प्रदूषण के लिहाज से संवेदनशील अवधि के दौरान निर्माण और तोड़फोड़ जैसी गतिविधियों को चरणबद्ध तरीके से नियंत्रित किया जाएगा। पहले चरण में 1 नवंबर से बाहरी निर्माण और तोड़फोड़ पर रोक लगाई जाएगी। इसके बाद 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण कार्य पूरी तरह बंद रखने का फैसला किया गया है। इसके साथ ही पार्किंग शुल्क में बढ़ोतरी, कार्यालयों के समय में बदलाव और वर्क फ्रॉम होम जैसे उपायों के जरिए निजी वाहनों की आवाजाही कम करने की कोशिश की जाएगी। दिल्ली में हर साल सर्दियों के दौरान प्रदूषण की समस्या बढ़ती है। ऐसे में सरकार की ओर से घोषित इन उपायों का फोकस निर्माण गतिविधियों, वाहनों और कार्यालयों से जुड़ी आवाजाही को नियंत्रित करने पर है।


