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लोन के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले 2 साइबर अपराधियों को दिल्ली पुलिस ने किया गिरफ्तार

शाहदरा साइबर पुलिस स्टेशन ने लोन धोखाधड़ी के मामले में 2 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इसके कब्जे से दो मोबाइल फोन, दो सिम कार्ड और एक एटीएम कार्ड बरामद हुए हैं।

लोन के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले 2 साइबर अपराधियों को दिल्ली पुलिस ने किया गिरफ्तार
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नई दिल्ली। शाहदरा साइबर पुलिस स्टेशन ने लोन धोखाधड़ी के मामले में 2 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इसके कब्जे से दो मोबाइल फोन, दो सिम कार्ड और एक एटीएम कार्ड बरामद हुए हैं।

दरअसल, दिल्ली के शाहदरा निवासी कृष्ण अवतार सहगल की शिकायत पर साइबर पुलिस स्टेशन शाहदरा में एफआईआर दर्ज हुई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि वह बैंक लोन की प्रक्रिया कर रहे थे, तभी उन्हें एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को लोन-प्रोसेसिंग अधिकारी बताया। फाइल, प्रोसेसिंग चार्ज और लोन मंजूरी के बहाने, कॉलर ने उनसे कई बार पेमेंट करवाए। बाद में शिकायतकर्ता को पता चला कि कॉलर का बैंक से कोई संबंध नहीं था और उसने धोखाधड़ी से उनसे 1 लाख 10 हजार रुपए ठग लिए थे। शिकायत पर पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने के लिए एक टीम का गठन किया।

जांच के दौरान इटावा के रहने वाले रवि कुमार (26) की पहचान की गई और उसे गाजियाबाद के वैशाली में उसके किराए के मकान से गिरफ्तार किया गया। धोखाधड़ी वाली कॉल के लिए इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर उसके नाम पर रजिस्टर्ड पाए गए और वे दिल्ली में साइबर अपराध के एक अन्य मामले से भी जुड़ा था। पूछताछ के दौरान उसने बताया कि धोखाधड़ी के बाद सिम कार्ड नष्ट कर दिए गए थे। उसने धोखाधड़ी से हासिल रकम लेने के लिए बैंक खातों का इंतजाम किया और पैसे अपने साथी कुंदन को ट्रांसफर कर दिए। सीसीटीवी फुटेज में रवि कुमार को एटीएम से धोखाधड़ी की रकम निकालते हुए भी देखा गया।

आगे की जांच में इटावा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले लगभग 23 साल के अरुण सिंह की पहचान हुई। बाद में उसे गाजियाबाद के वैशाली में उसके किराए के घर से गिरफ्तार किया गया। जांच से पता चला कि अरुण सिंह ने बैंक एग्जीक्यूटिव बनकर पीड़ित से बात की और लोन दिलाने के झूठे बहाने से संपर्क किया। उसके पास से एक एटीएम कार्ड मिला, जो उस अकाउंट से जुड़ा था जिसमें ठगी की रकम का लगभग 70,000 जमा किया गया था। इसके अलावा, दो मोबाइल फोन और दो सिम कार्ड भी बरामद किए गए।

आरोपी अरुण सिंह से बरामद मोबाइल फोन की जांच के दौरान ग्राहकों की जानकारी और फोन नंबरों की एक लिस्ट मिली। इसकी जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या लोन के लिए आवेदन करने वाले अन्य लोगों को भी निशाना बनाया गया था या निशाना बनाने की योजना थी।

आगे की जांच से पता चला कि अरुण सिंह ने यस बैंक के कर्मचारी शिवम ठाकुर की पहचान अपनाई और ग्राहकों से उसी की पहचान का इस्तेमाल करके बात की। बरामद मोबाइल फोन में शिवम ठाकुर के नाम वाला एक एम्प्लॉई आईडी कार्ड भी मिला। बरामद पहचान-संबंधी सामग्री के स्रोत, असलियत, मकसद और इस्तेमाल के दायरे का पता लगाने के लिए आगे की जांच चल रही है।

आरोपियों ने लोन-प्रोसेसिंग फीस के नाम पर धोखाधड़ी का तरीका अपनाया। इसमें वे लोन के लिए आवेदन करने वाले संभावित लोगों को निशाना बनाते थे और बैंक अधिकारियों या लोन-प्रोसेसिंग एग्जीक्यूटिव बनकर मोबाइल नंबरों के जरिए उनसे संपर्क करते थे। वे झूठा दावा करते थे कि प्रोसेसिंग, डॉक्यूमेंटेशन या अप्रूवल के लिए चार्ज लगेगा और पीड़ितों को उनके बताए अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करने के लिए मना लेते थे। पैसे मिलने के बाद वे कोई जवाब नहीं देते थे या और पैसे ऐंठने के लिए झूठी बातें करते रहते थे।



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