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Delhi News: जनकपुरी में खुले गड्ढे में गिरने से मौत मामले में चौंकाने वाले खुलासे, 4 लोगों ने देखा पर किसी ने नहीं की मदद
पुलिस की प्राथमिक जांच में खुलासा हुआ है कि गुरुवार देर रात जब कमल अपनी बाइक समेत गड्ढे में गिरा, तो एक नहीं बल्कि चार लोग इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी बने। इसके बावजूद किसी ने भी न तो उसे बाहर निकालने की कोशिश की और न ही 112 पर कॉल कर पुलिस या एंबुलेंस को सूचना दी।

नई दिल्ली: राजधानी के जनकपुरी थाना क्षेत्र में दिल्ली जल बोर्ड के एक खुले गड्ढे में गिरने से कमल ध्यानी नामक युवक की मौत ने राजधानी को झकझोर दिया है। लेकिन इस मामले में सामने आए तथ्य सिर्फ एक हादसे की कहानी नहीं कहते, बल्कि इंसानियत पर भी गंभीर सवाल खड़े करते हैं। पुलिस की प्राथमिक जांच में खुलासा हुआ है कि गुरुवार देर रात जब कमल अपनी बाइक समेत गड्ढे में गिरा, तो एक नहीं बल्कि चार लोग इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी बने। इसके बावजूद किसी ने भी न तो उसे बाहर निकालने की कोशिश की और न ही 112 पर कॉल कर पुलिस या एंबुलेंस को सूचना दी। शनिवार को इस मामले में दिल्ली जल बोर्ड के सब-कांट्रैक्टर राजेश प्रजापति को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अब उस सुरक्षा गार्ड की तलाश कर रही है, जिसने सब-कांट्रैक्टर को हादसे की सूचना दी थी। एक अन्य व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है।
सीसीटीवी फुटेज से खुली लापरवाही की परतें
पश्चिमी जिला पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) डी. शरद भास्कर ने बताया कि घटनास्थल के पास स्थित एक कैफे के सीसीटीवी फुटेज ने पूरे घटनाक्रम की कड़ी जोड़ने में अहम भूमिका निभाई। फुटेज के अनुसार, हादसे के समय सागरपुर निवासी विपिन सिंह अपने परिवार के साथ कार से वहां से गुजर रहे थे। उन्होंने गड्ढे में बाइक गिरते देख अपनी कार रोकी। विपिन ने गड्ढे में झांककर देखा तो बाइक की हेडलाइट जल रही थी और कमल बेसुध हालत में पड़ा था। हालांकि, उन्होंने खुद मदद करने के बजाय पास स्थित जनकपुरी के बी-ब्लॉक में स्थित बीबी ग्रीन वैली अपार्टमेंट के सुरक्षाकर्मी को इसकी सूचना दी।
सुरक्षाकर्मी घटनास्थल तक गया और पास ही टेंट में रह रहे दिल्ली जल बोर्ड के कर्मचारी योगेश को इस बारे में बताया। योगेश ने रात करीब 12:22 बजे अपने मालिक और सब-कांट्रैक्टर राजेश प्रजापति को फोन कर घटना की जानकारी दी।
मौके पर पहुंचा सब-कांट्रैक्टर, लेकिन नहीं की मदद
सूचना मिलने के बाद राजेश प्रजापति घटनास्थल पर पहुंचा। पुलिस के अनुसार, उसने गड्ढे में पड़े कमल को देखा, जो उस समय भी जिंदा था लेकिन बेसुध अवस्था में था। इसके बावजूद न तो उसने उसे बाहर निकालने की कोशिश की और न ही एंबुलेंस या पुलिस को बुलाया। डीसीपी के मुताबिक, राजेश प्रजापति वहां से ऐसे चला गया, जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो। वह अपने घर लौट गया और सो गया। इसी तरह कार सवार विपिन सिंह भी अपने घर सागरपुर लौट गए। सुरक्षाकर्मी वापस अपनी ड्यूटी पर कैफे के बाहर बैठ गया, जबकि कर्मचारी योगेश अपनी झुग्गी में जाकर सो गया। सर्द रात में गड्ढे में पड़े कमल की सुबह तक मौत हो चुकी थी।
पूछताछ में तकनीकी साक्ष्यों ने खोली पोल
पुलिस ने शुरुआत में राजेश प्रजापति को हिरासत में लेकर पूछताछ की। उसने खुद को घटना से अनभिज्ञ बताया। लेकिन जब पुलिस ने उसके मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स और घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज की जांच की, तो उसकी कहानी में कई विरोधाभास सामने आए। फुटेज और कॉल रिकॉर्ड से पुष्टि हुई कि उसे घटना की सूचना मिली थी और वह मौके पर भी गया था। इसके बाद पुलिस ने उसे आधिकारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। डीसीपी शरद भास्कर ने कहा कि यह सिर्फ एक दुर्घटना का मामला नहीं है, बल्कि आपराधिक लापरवाही का स्पष्ट उदाहरण है। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या खुले गड्ढे को लेकर पहले से कोई चेतावनी या सुरक्षा प्रबंध किए गए थे या नहीं।
गार्ड की तलाश, एक व्यक्ति हिरासत में
मामले में पुलिस उस सुरक्षा गार्ड की तलाश कर रही है, जिसने सबसे पहले कर्मचारी योगेश को सूचना दी थी। जांच एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि क्या किसी स्तर पर जानबूझकर सूचना छिपाई गई। एक व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी देख रही है कि क्या अन्य लोगों पर भी कानूनी कार्रवाई बनती है, क्योंकि चारों प्रत्यक्षदर्शियों ने गंभीर रूप से घायल युवक की मदद करने के बजाय उसे वहीं छोड़ दिया।
कमल के भाई का आरोप: सच छिपाया गया
मृतक कमल ध्यानी के भाई करण ने भी पुलिस को अहम जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि रात करीब डेढ़ बजे वह जनकपुरी थाना पुलिस के साथ लोकेशन ट्रेस करते हुए घटनास्थल के पास पहुंचे थे। करण के अनुसार, उन्होंने सड़क की दूसरी ओर से आवाज लगाकर टेंट में मौजूद कर्मचारी योगेश से पूछा था कि क्या यहां कोई हादसा हुआ है। लेकिन योगेश ने उन्हें यह नहीं बताया कि कमल गड्ढे में बेसुध पड़ा है। यदि उस समय सही जानकारी दी जाती, तो संभव है कि कमल की जान बचाई जा सकती थी। करण का आरोप है कि सूचना छिपाने की वजह से बहुमूल्य समय बर्बाद हुआ।
सवालों के घेरे में दिल्ली जल बोर्ड
यह हादसा दिल्ली जल बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। खुले गड्ढे को बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम के छोड़ दिया गया था। न तो उसके आसपास पर्याप्त बैरिकेडिंग थी और न ही स्पष्ट चेतावनी संकेत। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था। यदि लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
इंसानियत पर सवाल
इस मामले ने समाज में मददगार नागरिक की भूमिका पर भी बहस छेड़ दी है। चार लोगों ने एक घायल युवक को देखा, लेकिन किसी ने तत्काल मदद करने की कोशिश नहीं की। न 112 पर कॉल की गई, न एंबुलेंस बुलाई गई। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं नागरिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की कमी को दर्शाती हैं। कई बार कानूनी उलझनों के डर से लोग मदद करने से बचते हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, हादसे के पीड़ित की मदद करने वाले व्यक्ति को कानूनी सुरक्षा प्राप्त है।
प्रत्यक्षदर्शियों की भूमिका की भी जांच
पुलिस ने सब-कांट्रैक्टर राजेश प्रजापति को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की विस्तृत जांच जारी है। अन्य प्रत्यक्षदर्शियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। कमल ध्यानी की मौत अब सिर्फ एक दुर्घटना नहीं रह गई है, बल्कि यह लापरवाही, संवेदनहीनता और जिम्मेदारी से मुंह मोड़ने का प्रतीक बन गई है। जांच के नतीजे यह तय करेंगे कि किन-किन लोगों की जवाबदेही तय होगी और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
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