दिल्ली-NCR में पुराने वाहनों पर शिकंजे की तैयारी, 2030 तक नई कारों की बिक्री 100% इलेक्ट्रिक करने का प्रस्ताव
विशेषज्ञ समिति ने बीएस-1, बीएस-2 और बीएस-3 वाहनों को तत्काल चरण में हटाने की सिफारिश की है। इसके बाद बीएस-4 वाहनों को 2030 तक, बीएस-6 दोपहिया वाहनों को 2035 तक और बीएस-6 चारपहिया वाहनों को 2040 तक चरणबद्ध तरीके से हटाने का प्रस्ताव दिया गया है।

नई दिल्ली : दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए पुराने पेट्रोल-डीजल वाहनों को चरणबद्ध तरीके से सड़कों से हटाने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की तैयारी है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) को सौंपी गई एक विशेषज्ञ समिति की अंतरिम रिपोर्ट में अगले दशक के दौरान परिवहन क्षेत्र को शून्य या लगभग शून्य उत्सर्जन की दिशा में ले जाने का रोडमैप सुझाया गया है। रिपोर्ट में बीएस-1, बीएस-2 और बीएस-3 वाहनों को तत्काल हटाने, बीएस-4 वाहनों को 2030 तक चरणबद्ध तरीके से बाहर करने और बीएस-6 वाहनों के लिए भी समयसीमा निर्धारित करने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री, चार्जिंग सुविधाओं और पुराने वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलने के लिए कई प्रस्ताव रखे गए हैं।
2.21 करोड़ वाहनों में सिर्फ 1.6% इलेक्ट्रिक
सीएक्यूएम ने दिसंबर 2025 में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के उपाय सुझाने के लिए 15 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित की थी। समिति ने 18 अगस्त 2026 को आयोग को अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली और एनसीआर में करीब 2.21 करोड़ सक्रिय तथा फिटनेस-स्वीकृत वाहन हैं। इनमें इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या लगभग 3.6 लाख है, जो कुल वाहनों का केवल 1.6 प्रतिशत है। वहीं, करीब 57 प्रतिशत वाहन बीएस-4 या उससे पुराने उत्सर्जन मानकों के अंतर्गत आते हैं। बीएस-1 से बीएस-3 श्रेणी के वाहन कुल वाहन बेड़े का लगभग 30 प्रतिशत हैं। समिति का मानना है कि पुराने वाहनों को हटाने और इलेक्ट्रिक परिवहन को बढ़ावा देने से क्षेत्र में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सकती है।
पुराने वाहनों को हटाने की समयसीमा तय करने का सुझाव
विशेषज्ञ समिति ने बीएस-1, बीएस-2 और बीएस-3 वाहनों को तत्काल चरण में हटाने की सिफारिश की है। इसके बाद बीएस-4 वाहनों को 2030 तक, बीएस-6 दोपहिया वाहनों को 2035 तक और बीएस-6 चारपहिया वाहनों को 2040 तक चरणबद्ध तरीके से हटाने का प्रस्ताव दिया गया है। दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के दौरान प्रदूषण की स्थिति गंभीर हो जाती है। इसे देखते हुए समिति ने एक नवंबर से 31 जनवरी के बीच बीएस-4 वाहनों पर रोक लगाने का पायलट कार्यक्रम 2026 की सर्दियों से शुरू करने का सुझाव दिया है। इसके बाद 2027 से इसे पूर्ण स्तर पर लागू करने का प्रस्ताव है। हालांकि, ये विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें हैं; इन्हें लागू करने के लिए संबंधित प्राधिकरणों के फैसले जरूरी होंगे।
हर घर को चार्जिंग सुविधा का अधिकार
इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में चार्जिंग सुविधाओं की कमी बड़ी बाधा है। इसे दूर करने के लिए समिति ने दिल्ली और एनसीआर में 'राइट टू चार्ज' कानून बनाने की सिफारिश की है। इसके तहत मकान मालिकों और किरायेदारों को 3, 7 या 11 किलोवाट क्षमता के चार्जर लगाने का कानूनी अधिकार देने का प्रस्ताव है। सिफारिश में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और बिल्डरों की अनावश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) संबंधी शर्तें खत्म करने की बात कही गई है। तकनीकी रूप से संभव होने पर बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) को 15 दिनों के भीतर कनेक्शन देना होगा। जिन आवासीय और कार्यालय परिसरों में व्यक्तिगत पार्किंग की सुविधा नहीं है, वहां कम से कम 20 प्रतिशत पार्किंग क्षमता के बराबर साझा चार्जिंग सुविधा विकसित करने और नए भवनों को ईवी-रेडी बनाने का सुझाव भी दिया गया है।
2030 तक नई कारों की बिक्री पूरी तरह इलेक्ट्रिक करने का प्रस्ताव
समिति ने निजी चारपहिया वाहनों की नई बिक्री में शून्य-उत्सर्जन वाहनों की हिस्सेदारी 2027 में 20 प्रतिशत, 2028 में 45 प्रतिशत, 2029 में 70 प्रतिशत और 2030 में 100 प्रतिशत करने का लक्ष्य सुझाया है। कंपनियों को हर महीने बिक्री का ब्योरा देना होगा। लक्ष्य पूरा नहीं करने वाली कंपनियों पर नए पेट्रोल-डीजल वाहनों की बिक्री और पंजीकरण को लेकर क्रमशः कड़े प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। रिपोर्ट में परिवहन क्षेत्र के लिए भी समयसीमा तय की गई है। तिपहिया, दोपहिया टैक्सी, डिलीवरी वाहनों और हल्के मालवाहक वाहनों को अप्रैल 2027 से शून्य-उत्सर्जन श्रेणी में लाने का सुझाव है। चारपहिया टैक्सी और मध्यम-भारी बसों के लिए अप्रैल 2028, मध्यम मालवाहक वाहनों के लिए 2031 और भारी मालवाहक वाहनों के लिए 2032 की समयसीमा प्रस्तावित है।
ईवी खरीदने और पुराने वाहन बदलने पर मिल सकती है राहत
इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद को प्रोत्साहित करने के लिए समिति ने आर्थिक सहायता का प्रस्ताव दिया है। ई-ऑटो पर तीन वर्षों में क्रमशः 50,000, 40,000 और 30,000 रुपये की सहायता सुझाई गई है। दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए यह राशि 30,000, 20,000 और 10,000 रुपये प्रस्तावित है। ईवी टैक्सी और निजी हल्के चारपहिया वाहनों के लिए 2026-28 के दौरान एक लाख रुपये तथा 2028-30 के दौरान 60,000 रुपये प्रोत्साहन देने का सुझाव है। पुराने दोपहिया और तिपहिया वाहनों को प्रमाणित इलेक्ट्रिक पावरट्रेन में बदलने पर क्रमशः 20,000 और 40,000 रुपये की सहायता देने की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही पांच वर्ष अतिरिक्त फिटनेस और परमिट को 10 साल तक नवीनीकृत करने का प्रस्ताव है। समिति ने स्क्रैपिंग पर अलग प्रोत्साहन तथा इलेक्ट्रिक वाहनों पर पांच प्रतिशत जीएसटी की दर 2032 तक जारी रखने की भी सिफारिश की है। इन प्रस्तावों का उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण घटाने के साथ स्वच्छ परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देना है। हालांकि, इनकी अंतिम रूपरेखा और क्रियान्वयन संबंधित सरकारी निर्णयों पर निर्भर करेगा।


